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Budaun News: सतरंगी आतिशबाजी के बीच छट गया अमावस का अंधेरा

Wed, 22 Oct 2025 12:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2025 12:08 AM IST
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The darkness of the new moon dissipated amidst the colorful fireworks.
बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद
बदायूं। दिवाली वाले दिन इतनी जबरदस्त आतिशबाजी हुई कि अमावस्या का काला घना अंधेरा भी छट सा गया। गांव से लेकर शहर तक घर और प्रतिष्ठान रोशनी से नहा गए। धूम-धड़ाकों से आकाश तक गूंज उठा। मानों जीत का बड़ा जश्न हो। इसके बीच धन और वैभव प्रदान करने वाली मां लक्ष्मी की पूजा की गई। किसी भी पूजा में प्रथम पूज्य गणपति भी उनके साथ पूजे गए।
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नए-नए परिधानों में सजे बच्चों में दीपोत्सव का उत्साह देखते ही बनता था। परिवार वालों के साथ बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की। इस मौके पर आकाश में आतिशबाजी की सतरंगी छटा और पटाखों की गूंज किसी बड़ी जीत के जश्न से कम नहीं दिखी। शहर में गली मोहल्लों से लेकर बाजारों में दीपावली का जश्न देखते ही बनता था।
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बिजली की झालरों और अन्य रोशनी के उपकरणों, झिलमिल चमकते झूमर और कंदील रोशनी काे चार चांद लगा रहे थे। मानों तारों से सजा आसमान ही धरती पर उतर आया हो। एक दूसरे को मिठाई खिलाकर और शुभकामना संदेश देकर लोगों ने पर्व का पूरा आनंद लिया और अन्य लोगों को भी खुशी का सहभागी बनाया।
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कादरचौक। क्षेत्र के रमजानपुर में घरों को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया। मुस्लिम भाइयों ने हिंदू भाइयों को शुभकामनाएं दीं। गांवों में भी दीपावली हर्षोल्लास मनाई गई। शेरपाल शर्मा, वेदप्रकाश, हृदयेश,केशव, आयुष गुप्ता, रिहान, विनोद आदि दीपोत्सव में शामिल रहे।
अमावस की रात खूब हुए टोने-टोटके
तंत्र साधना और क्रियाओं में अमावस का विशेष महत्व माना जाता है। उसमें भी दिवाली की रात इसकी सिद्धी के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। दिवाली की पूजा में जहां लोग धन और वैभव की दात्री मां लक्ष्मी की पूजा में लगे रहे तो वहीं तंत्र-मंत्र में विश्वास रखने वाले पहले से ही इस दिन के लिए तैयारियां करके बैठे थे। उन्होंने दिवाली की रात में तंत्र सिद्धियां हासिल करने के लिए टोने-टोटके भी खूब किए।

शिक्षा से जुड़े परिवारों ने तीन मूर्तियां पूंजी
दिवाली पर आमतौर पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की पूजा की परंपरा है, लेकिन शिक्षा से जुड़े परिवारों में लक्ष्मी-गणेश के साथ सरस्वती मां वाली तस्वीर पूजा स्थल पर लगाई गई। बाजार में ऐसी तस्वीर, जिसमें लक्ष्मी, गणेश के साथ वीणावादिनी भी मौजूद हों, कम संख्या में थी। इसलिए इनकी बिक्री भी हाथों-हाथ हो गई। दो सफेद हाथियों के बीच लक्ष्मी पर जल वर्षा करने वाली तस्वीर भी लोगों को कम मिली। सबसे ज्यादा लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां लोगों ने पूजा स्थल में रखीं।



गेंदा और गुलाब के फूलों से सजे मंदिर और घर
दिवाली पर जहां रोशनी को खास तवज्जो दी गई। वहीं सजावट में गेंदा और गुलाब के फूलों की मालाएं और झालरों से देवस्थलों और घरों को सजाया गया। सजावट के अन्य साधनों तोरणद्वार, अल्पनाओं के अलावा फूलों से भी शानदार सजावट आकर्षण का केंद्र रही।

लोगों में लेजर लाइटों का रहा विशेष क्रेज
इस बार इलेक्ट्रॉनिक झूमर और कंदील के अलावा लेजर लाइटों का भी लोगों में क्रेज देखा गया। खास बात यह थी कि पहले इन सब चीजों पर चाइना का ही एक मात्र राज था, लेकिन इस बार स्वदेशी झालर और स्वदेशी इलेक्ट्रिक आइटम भी शामिल रहे। दिल्ली और आगरा से आईं स्वदेशी लेजर लाइटों को भी लोगों ने घर और प्रतिष्ठानों की सजावट में शामिल किया। इससे जमीन से आसमान तक इसकी रंगबिरंगी किरणों का लोगों ने पूरा मजा लिया।




घर-घर लगी मिट्टी के दीयों की हाजिरी
आधुनिकता के दौर में घर और प्रतिष्ठानों की सजावट में परंपरागत मिट्टी के दीयों की भी पूरी हाजिरी रही। लोगों ने पहले मोमबत्ती और दीयों को जलाकर रोशनी के इस त्योहार की शुरूआत की। बाद में बिजली की झालरें जलाईं और घर-दुकान इलेक्ट्रिक आइटम से जगमग किए। दीपोत्सव की शुरूआत मंदिरों में शुद्ध देशी घी के दीये जलाकर की गई। हालांकि मिट्टी के दीयों की संख्या कम होती जा रही है, लेकिन इनकी उपयोगिता अभी कायम है।

दिवाली में नहीं दिखी छछूंदर, तलाश करते रहे लोग
मान्यता है कि दिवाली के दिन छछूंदर के जिसे दर्शन हो जाएं वह भाग्यशाली होता है। इस मान्यता को स्वीकारने वाले लोग छछूंदर को देखने के लिए लालायित दिखे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। यह ऐसा जीव है, जो प्रकाश से डरता है। इसलिए आतिशबाजी के दौरान बिल से निकलता ही नहीं है। जहां-जहां छछूंदर लोगों को आम दिनों में दिखाई देती रही, लोग उन जगहों को तांकते रहे, लेकिन दिवाली वाले दिन छछूंदर के दर्शन नहीं हो सके।

जमकर हुई चांदी के सिक्कों पर बने लक्ष्मी-गणेश की बिक्री
दातागंज। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। ऐसे में देहात क्षेत्रों में लक्ष्मी-गणेश बने चांदी के सिक्कों की जमकर बिक्री हुई। देहात के सराफों ने इसका फायदा उठाते हुए 10 से 50 प्रतिशत मिलावट वाले चांदी के सिक्कों को 1000 रुपये तक में बेचा, जबकि खालिस चांदी का सिक्का 1700 रुपये तक में बिका। बता दें कि मिलावटी चांदी के सिक्के कुछ दिनों में ही काले पड़ जाते हैं।

दो दिन हुई दिवाली, अमावस्या के कारण रही भ्रम की स्थिति
दबतोरी। अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी रही। इसलिए क्षेत्र के गांवों में कुछ लोगों ने सोमवार को तो कुछ ने मंगलवार को भी दीपावली मनाई। बाजार में सोमवार व मंगलवार दोनों दिन रौनक रही। इलेक्ट्रिक सामान व मिठाई की दुकानों पर खूब बिक्री हुई। संवाद




लक्ष्मी पूजा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जगमगाए दीये और मोमबत्तियां

सैदपुर। नगर व आसपास के क्षेत्र और बाजारों में भारी भीड़ रही। इस दौरान लोगों ने एक दूसरे को उपहार देकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। शाम को शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी जी की पूजा की गई और बच्चों ने जमकर आतिशबाजी और पटाखे चलाकर खुशियां मनाईं। संवाद

मिट्टी के दीयों से घर हुए रोशन


उसावां। घरों पर मिट्टी के दीये के साथ साथ मोमबत्ती भी जलाकर रखी गईं। बिजली की झालरों से इमारतें चमकती रहीं। घरों में मां लक्ष्मी जी का विधिविधान के साथ पूजन किया गया। खील खिलौने के साथ साथ विभिन्न प्रकार की मिठाइयों से भोग लगाकर आरती की गई। व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर पूजन किया। दिन ढलने के साथ आतिशबाजी शुरू हो गई, जो देर रात तक जारी रही। नगर वासियों ने अपने-अपने परिचितों को मिठाई पहुंचाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। संवाद

रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया कस्बा


फैजगंज बेहटा। कस्बा समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली का पर्व शांति व सौहार्द के साथ मनाया गया। नगर पंचायत परिसर व थाना परिसर को रंग- बिरंगी रोशनी से सजाया गया। खील-खिलौनों की जमकर खरीदारी हुई। आसपास के गांव दांवरी, जैतपुर, गनगोली, दासपुर, जखौरा, खजुरिया, पाठकपुर, धन्यावली आदि में दीपावली हर्षोल्लास से मनाई गई। संवाद

(फोटो-12, 13)
जमकर चली अतिशबाजी



बिल्सी। लोगों ने देर रात तक जमकर आतिशबाजी की। मिष्ठान की दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ रही। सबसे पहले लोगों ने मंदिरों में भगवान गणेश और लक्ष्मी जी के समक्ष दीप जलाए। घर के आंगन में रंगोली बनाई। व्यापारियों ने प्रतिष्ठानों को झालरों और बिजली से चलने वाले अन्य उपकरणों से सजाया। दिन ढलते ही आतिशबाजी का नजारा शुरु हो गया। देर रात तक यह सिलसिला जारी रहा। आतिशबाजी ने आकाश में कई तरह के रंग बिखेरे। लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। दीपावली के मद्देनजर सभी स्थानों पर कोतवाली पुलिस की भी खास चौकसी रही। संवाद





नगर में नहीं लगा जाम
बदायूं। बिसौली में पांच दिवसीय संयुक्त दिवाली त्योहार के मद्देनजर इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने जाम की स्थिति से निपटने के विशेष इंतजाम किए। मुख्य मार्गों, चौराहों और बाजारों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। इंस्पेक्टर के प्रयास से यातायात नियंत्रण में रहा। नगरवासियों ने राहत की सांस ली। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

बिल्सी के भवन मंदिर में दीपावली पर पूजा करते माता रानी के भक्त। संवाद

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