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Budaun News: नरऊ तालाब का बंधा फिर कटा, फसलों को नुकसान
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उझानी में नरऊ तालाब के क्षतिग्रस्त बंधा से पानी रोकने की कोशिश में जुटा किसान। संवाद
- फोटो : सदिकापुर गांव में खेत में दिखाई दे रही जलकुंभी की बेल।
उझानी। नरऊ तालाब का बंधा एक बार फिर कट गया। तालाब के आसपास खेतों की फसलों में भरा देख किसान बंधा की मरम्मत करने में जुट गए। इसके बाद भी वह फसलों में पानी भरने से नहीं रोक पाए।
तालाब का बंधा कटने की जानकारी किसानों को बुधवार सुबह खेतों पर पहुंचने के बाद हुई। अचौरा निवासी शिवशंकर शाक्य ने बताया कि मंगलवार शाम जब वह खेत पर गए, तब बंधा ठीक था। बंधा रात में किस समय कटा, यह तो उन्हें नहीं पता, लेकिन सुबह में उनके अलावा करीब 25 किसानों के खेत में आलू, सरसों और गेहूं की फसल में पानी भरा मिला।
अचौरा के अलावा नरऊ और मीहलालनगला के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी प्लॉस्टिक के बोरों में मिट्टी भरकर क्षतिग्रस्त बंधा के आसपास रखना शुरू कर दिया। शाम तक कोशिश के बाद भी ग्रामीण फसलों बचाने की कोशिश में जुटे रहे। नरऊ निवासी हरीबाबू, ओमपाल और बेचेलाल ने बताया कि नाले का पानी गिरने से तालाब में पिछले कई दिनों से ओवरफ्लो हो रहा है।
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सूचना के बाद भी पालिका के कर्मचारी मौके पर नहीं आए हैं। करीब दो सौ बीघा खेतों में खड़ी फसलें फिर पानी भर जान से सड़ने के कगार पर पहुंच सकती है। खेतों से पानी के निकास के लिए कोई रास्ता भी नहीं बचा है। बता दें कि पिछले महीना भी बंधा कट गया था। इसके बाद पालिका कर्मियों ने क्षतिग्रस्त बंधे की मरम्मत करा दी थी।
मरम्मत से पहले अफसर भी कर चुके थे मुआयना
नरऊ तालाब का पिछले महीना बंधा क्षतिग्रस्त हुआ, तब अगले दिन ही नायब तहसीलदार, क्षेत्र पंचायत अधिकारी और ईओ भी मौके पर पहुंच गए थे। अफसरों ने तालाब और फसलों की हकीकत पर गौर करने के बाद मरम्मत कराने का निर्देश दिया था। पालिका कर्मियों ने मरम्मत तो करा दी, लेकिन जेसीबी नहीं पहुंच पाने की वजह से उन्हें मिट्टी भरे प्लॉस्टिक के बोरे लगाने पड़े थे। पालिका कर्मियों की मानें तो पानी सूखने के बाद ही जेसीबी मौके पर पहुंच सकती है।
नरऊ तालाब का बंधा मंगलवार रात फिर कट जाने के बारे में उन्हें पता नहीं है। वह लखनऊ में विभागीय स्तर की मीटिंग में हैं। फिर भी वह कर्मचारियों को मौके पर भेज रहे हैं। मरम्मत भी कराएंगे।- अब्दुल शबूर, ईओ
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तालाब का बंधा कटने की जानकारी किसानों को बुधवार सुबह खेतों पर पहुंचने के बाद हुई। अचौरा निवासी शिवशंकर शाक्य ने बताया कि मंगलवार शाम जब वह खेत पर गए, तब बंधा ठीक था। बंधा रात में किस समय कटा, यह तो उन्हें नहीं पता, लेकिन सुबह में उनके अलावा करीब 25 किसानों के खेत में आलू, सरसों और गेहूं की फसल में पानी भरा मिला।
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अचौरा के अलावा नरऊ और मीहलालनगला के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी प्लॉस्टिक के बोरों में मिट्टी भरकर क्षतिग्रस्त बंधा के आसपास रखना शुरू कर दिया। शाम तक कोशिश के बाद भी ग्रामीण फसलों बचाने की कोशिश में जुटे रहे। नरऊ निवासी हरीबाबू, ओमपाल और बेचेलाल ने बताया कि नाले का पानी गिरने से तालाब में पिछले कई दिनों से ओवरफ्लो हो रहा है।
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सूचना के बाद भी पालिका के कर्मचारी मौके पर नहीं आए हैं। करीब दो सौ बीघा खेतों में खड़ी फसलें फिर पानी भर जान से सड़ने के कगार पर पहुंच सकती है। खेतों से पानी के निकास के लिए कोई रास्ता भी नहीं बचा है। बता दें कि पिछले महीना भी बंधा कट गया था। इसके बाद पालिका कर्मियों ने क्षतिग्रस्त बंधे की मरम्मत करा दी थी।
मरम्मत से पहले अफसर भी कर चुके थे मुआयना
नरऊ तालाब का पिछले महीना बंधा क्षतिग्रस्त हुआ, तब अगले दिन ही नायब तहसीलदार, क्षेत्र पंचायत अधिकारी और ईओ भी मौके पर पहुंच गए थे। अफसरों ने तालाब और फसलों की हकीकत पर गौर करने के बाद मरम्मत कराने का निर्देश दिया था। पालिका कर्मियों ने मरम्मत तो करा दी, लेकिन जेसीबी नहीं पहुंच पाने की वजह से उन्हें मिट्टी भरे प्लॉस्टिक के बोरे लगाने पड़े थे। पालिका कर्मियों की मानें तो पानी सूखने के बाद ही जेसीबी मौके पर पहुंच सकती है।
नरऊ तालाब का बंधा मंगलवार रात फिर कट जाने के बारे में उन्हें पता नहीं है। वह लखनऊ में विभागीय स्तर की मीटिंग में हैं। फिर भी वह कर्मचारियों को मौके पर भेज रहे हैं। मरम्मत भी कराएंगे।- अब्दुल शबूर, ईओ