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तापमान बढ़ने से ठंडा पड़ा गर्म कपड़ों का कारोबार

Fri, 08 Jan 2016 08:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Updated Fri, 08 Jan 2016 08:48 PM IST
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the cloth market cools down due to the temprature increase
पूस के महीना में उम्मीद से काफी कम पड़ रही है ठंडक
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पिछले साल के मुकाबले आधे तक नहीं पहुंचा व्यापार
गर्म कपड़ों के खरीदकारों ने बाजार से मुंह मोड़ा


दिसंबर और जनवरी महीना में गर्म कपड़ों की बिक्री सर्वाधिक होती आई है। पिछले साल इन दोनों महीना में शायद ही ऐसा कोई दिन बचा हो जब रेडीमेड गर्म कपड़ों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ नजर नहीं आती हो। गर्म कपड़ों के कारोबारियों में सुनील सचदेवा उर्फ विट्टू और सोनू शर्मा कहते हैं कि ठंड कम पड़ने से बिक्री प्रभावित हुई है। विट्टू का तो यहां तक कहना है कि पिछले साल कारोबार उम्मीद से अच्छा रहा था। उसी को देखते हुए थोक में माल भी बहुतायत में खरीदा गया। रेडीमेड गर्म कपड़ों में लोग इन दिनों इनर और स्वेटर तो खरीदने आते हैं लेकिन फुल जैकेट और फुल स्वेटर मौसम की मिजाज देखकर खरीदने से बचने लगते हैं।
सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे कारोबारियों के सामने है। ठेला और खोमचों की तरह सड़क किनारे गर्म कपड़े बेचने वाले छोटे व्यापारी पूरे दिन में एक हजार रुपया से अधिक की बिक्री नहीं कर पाते। कइयों का तो पुराना माल भी नहीं बिक पाया है। मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में भी गर्म कपड़ों के कारोबार के दिन सुधरने वाले नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार थोक में खरीदकर इकट्ठा किया गया माल अगले साल घाटे का सौदा साबित होगा, क्योंकि हर साल ही नये क्लेक्शन की मार्केट में धूम नजर आती है। ऐसे में पुराना माल कौन खरीदेगा।
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लाखों में सिमटा करोड़ों का काम
उझानी। रेडीमेड गर्म कपड़ों के कारोबारियों की मानें तो यहां रेडीमेड कपड़ों की दुकानें से 50 से अधिक हैं। ऐसी कोई दुकान नहीं जहां चार-छह लाख रुपये काम डंप न हो। करोडों रुपया का कारोबार कर चुके व्यापारियों के सामने जमापूंजी फंस जाने का भी संकट बरकरार है। कई छोटे कारोबारी तो ऐसे भी है जो व्यापार करने के लिए ब्याज पर रकम जुटाते हैं। उन्हें सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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