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हर महीने डेढ़ करोड़ खर्च पर शहर साफ नहीं
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Sat, 06 May 2017 12:01 AM IST
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cleaning
- फोटो : amar ujala
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शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वे ने भी मुहर लगाई, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न
हर महीने एक करोड़ 57 लाख रुपये सफाई के लिए खर्च करने के बाद भी शहर में गंदगी ही गंदगी है। इस पर शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वे ने भी मुहर लगा दी है। नगर पालिका के लिए यह बेहद शर्म की बात है कि बदायूं शहर ने देश के सबसे गंदे शहरों में 14 वां स्थान पाया है। गोंडा शहर सबसे गंदा मिला है। जाहिर है कि बदायूं नगर पालिका अब गोंडा से अपनी तुलना कर सकती है।
नगर पालिका को शहर की सफाई व्यवस्था के लिए हर साल 18 करोड़ 84 लाख रुपये मिलता है। सफाई कर्मियों के वेतन और मानदेय तथा अन्य मदों में इतना खर्च करने के बाद भी शहर की सफाई नहीं हो पाती है। सफाई कर्मचारियों और सफाई नायकों की लंबी चौड़ी फौज होने के बावजूद सफाई न हो पाने से केंद्र और प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने की मंशा नजर नहीं आ रही है। शहरवासियों का कहना है कि सफाई कर्मी सफाई नहीं करते। नतीजतन, शहर भर में जगह-जगह कूड़े-करकट के ढेर लगे हुए हैं। मोहल्लों और गलियों में की नालियों में कीचड़ से लोगों का रहना मुश्किल है। फरवरी के प्रथम सप्ताह में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीम शहर में स्वच्छता अभियान का जायजा लेने आई थी। उसके सर्वे में बदायूं शहर स्वच्छता के मामले में फेल हो गया। उस सर्वे के आधार पर ही शहर को गंदे शहरों में 14 वें स्थान पर शुमार किया गया है।
सफाई कर्मी बहुत लेकिन सफाई नहीं करते
शहर की सफाई के लिए नगर पालिका के पास कुल 422 सफाई कर्मचारी हैं। इसमें स्थाई सफाईकर्मी 210, संविदा पर 49, दैनिक वेतन भोगी 64, बैकलॉग 44 और ठेके पर 55 सफाई कर्मचारी तैनात हैं लेकिन इतनी लंबी फौज होते हुए भी शहर की सफाई नहीं हो पाती।
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अधूरा
जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से 55 टन पर डे (टीपीडी) कूड़ा निस्तारित करने वाला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनना था, जो अधूरा पड़ा है। इससे शहर का कूड़ा नाले-नालियों और शहर से बाहर जाने वाली सड़कों के किनारे डाला जा रहा है। वर्ष 2011 में शुरू हुआ निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे शहर के कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। शहर की गलियों से जब भी कूड़ा उठाया जाता है, लेकिन उसे शेखूपुर, दातागंज, बिसौली एवं अन्य सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है। कूड़े के इन ढेरों से लोगों को बेहद दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अमृत योजना में न पार्क बने, न बिछी पाइप लाइन
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत चलने वाली अटल मिशन फॉर रेजोवेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के तहत जिले में वाटर सप्लाई, सीवरेज और पार्क डेवलपमेंट का कार्य किया जाना था। इसके लिए 12.65 करोड़ रुपये से निर्माण कार्य कराया जाना था, जिसमें वाटर सप्लाई के लिए पहली किश्त के रूप में 205 लाख रुपये नगर पालिका को मिल चुके हैं, लेकिन अब तक नगर पालिका ने जल निगम को यह धनराशि ट्रांसफर नहीं की है। शहर में बिछने वाली 12 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइप लाइन, 3600 हाउस कनेक्शन और 28850 वाटर मीटर लगाने के कार्य की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। पार्क सुंदरीकरण का कार्य भी नगर पालिका परिषद की ओर से शुरू नहीं किया गया है।
सॉलिडवेस्ट मैंनेजमेंट प्लांट की वजह से सर्वेे में बदायूं को नंबर कम दिए गए हैं, इसलिए सर्वे में बदायूं पीछे रहा है, लेकिन शहर मेें सफाई अभियान बराबर चल रहा है।
-डालचंद भारती, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
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हर महीने एक करोड़ 57 लाख रुपये सफाई के लिए खर्च करने के बाद भी शहर में गंदगी ही गंदगी है। इस पर शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वे ने भी मुहर लगा दी है। नगर पालिका के लिए यह बेहद शर्म की बात है कि बदायूं शहर ने देश के सबसे गंदे शहरों में 14 वां स्थान पाया है। गोंडा शहर सबसे गंदा मिला है। जाहिर है कि बदायूं नगर पालिका अब गोंडा से अपनी तुलना कर सकती है।
नगर पालिका को शहर की सफाई व्यवस्था के लिए हर साल 18 करोड़ 84 लाख रुपये मिलता है। सफाई कर्मियों के वेतन और मानदेय तथा अन्य मदों में इतना खर्च करने के बाद भी शहर की सफाई नहीं हो पाती है। सफाई कर्मचारियों और सफाई नायकों की लंबी चौड़ी फौज होने के बावजूद सफाई न हो पाने से केंद्र और प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने की मंशा नजर नहीं आ रही है। शहरवासियों का कहना है कि सफाई कर्मी सफाई नहीं करते। नतीजतन, शहर भर में जगह-जगह कूड़े-करकट के ढेर लगे हुए हैं। मोहल्लों और गलियों में की नालियों में कीचड़ से लोगों का रहना मुश्किल है। फरवरी के प्रथम सप्ताह में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीम शहर में स्वच्छता अभियान का जायजा लेने आई थी। उसके सर्वे में बदायूं शहर स्वच्छता के मामले में फेल हो गया। उस सर्वे के आधार पर ही शहर को गंदे शहरों में 14 वें स्थान पर शुमार किया गया है।
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सफाई कर्मी बहुत लेकिन सफाई नहीं करते
शहर की सफाई के लिए नगर पालिका के पास कुल 422 सफाई कर्मचारी हैं। इसमें स्थाई सफाईकर्मी 210, संविदा पर 49, दैनिक वेतन भोगी 64, बैकलॉग 44 और ठेके पर 55 सफाई कर्मचारी तैनात हैं लेकिन इतनी लंबी फौज होते हुए भी शहर की सफाई नहीं हो पाती।
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अधूरा
जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से 55 टन पर डे (टीपीडी) कूड़ा निस्तारित करने वाला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनना था, जो अधूरा पड़ा है। इससे शहर का कूड़ा नाले-नालियों और शहर से बाहर जाने वाली सड़कों के किनारे डाला जा रहा है। वर्ष 2011 में शुरू हुआ निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इससे शहर के कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। शहर की गलियों से जब भी कूड़ा उठाया जाता है, लेकिन उसे शेखूपुर, दातागंज, बिसौली एवं अन्य सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है। कूड़े के इन ढेरों से लोगों को बेहद दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अमृत योजना में न पार्क बने, न बिछी पाइप लाइन
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत चलने वाली अटल मिशन फॉर रेजोवेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के तहत जिले में वाटर सप्लाई, सीवरेज और पार्क डेवलपमेंट का कार्य किया जाना था। इसके लिए 12.65 करोड़ रुपये से निर्माण कार्य कराया जाना था, जिसमें वाटर सप्लाई के लिए पहली किश्त के रूप में 205 लाख रुपये नगर पालिका को मिल चुके हैं, लेकिन अब तक नगर पालिका ने जल निगम को यह धनराशि ट्रांसफर नहीं की है। शहर में बिछने वाली 12 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइप लाइन, 3600 हाउस कनेक्शन और 28850 वाटर मीटर लगाने के कार्य की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। पार्क सुंदरीकरण का कार्य भी नगर पालिका परिषद की ओर से शुरू नहीं किया गया है।
सॉलिडवेस्ट मैंनेजमेंट प्लांट की वजह से सर्वेे में बदायूं को नंबर कम दिए गए हैं, इसलिए सर्वे में बदायूं पीछे रहा है, लेकिन शहर मेें सफाई अभियान बराबर चल रहा है।
-डालचंद भारती, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका