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दूसरे जिलों में हताश सपा के सामने बदायूं में किला बचाने की चुनौती

Wed, 30 Jun 2021 01:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jun 2021 01:13 AM IST
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The challenge of saving the fort in Badaun in front of the desperate SP in other districts
बदायूं। बरेली मंडल के पीलीभीत और शाहजहांपुर में सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को तोड़कर भाजपा ने अपने प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन करा लिया। बदायूं में ऐसा नहीं हुआ। दरअसल, बदायूं सपा का गढ़ रहा है। मोदी लहर में भले सपा ने यहां तगड़ा नुकसान झेला हो, लेकिन भाजपा को सपा से कड़ी टक्कर मिलती रही है। अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव यूं तो सत्ता पक्ष का चुनाव ही माना जाता है। जो पार्टी सत्ता में होती है कमोवेश उसी का अध्यक्ष भी चुना जाता है। लेकिन बदायूं में सपा की ओर से भाजपा को टक्कर मिल रही है। 2007 के विधानसभा चुनाव में सपा ने बदायूं की बिसौली, दातागंज, सहसवान, बदायूं और शेखूपुर सीट पर कब्जा किया था। मोदी लहर के बावजूद 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा के धर्मेंद्र यादव बदायूं से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए। इससे पहले सपा के सलीम शेरवानी लगातार तीन बार यहां सांसद रहे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते सियासी गणित कुछ बड़बड़ा गया। इस बार सपा सिर्फ सहसवान सीट जीत सकी, लेकिन बदायूं, दातागंज, बिसौली, शेखूपुर सीट पर सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र यादव भाजपा की संघमित्रा मौर्य से मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे।
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पंचायत चुनावों को 2022 के विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। पंचायत चुनाव में सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है। जिला पंचायत की 31 में से 12 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की। ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों पर भी सपा का दबदबा रहा। अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को मतदान होना है। यहां भी भाजपा को सपा से टक्कर मिल रही है। सपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है। भाजपा के यादव कार्ड पर सपा ने मौर्य-शाक्य-कुशवाह कार्ड खेला है। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव खुद दिन-रात लगे हैं। ऐसे में मुकाबला रोचक होने जा रहा है।
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