{"_id":"6aa070b35a6d92ed880510c9","slug":"the-biers-of-devotees-were-carried-through-mud-drenched-streets-badaun-news-c-123-1-sbly1035-172596-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: कीचड़ से सराबोर गलियों से होकर निकलीं श्रद्धालुओं की अर्थियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: कीचड़ से सराबोर गलियों से होकर निकलीं श्रद्धालुओं की अर्थियां
विज्ञापन
गांव से कीचड़ में अंतिम यात्रा निकलने के बाद सफाई करते सफाई कर्मी। संवाद
उझानी। बागपत हादसे में मृत श्रद्धालुओं में महिलाओं समेत छह लोगों के शव अल्लापुर चमारी पहुंचने के बाद मंगलवार पूर्वाह्न में उनके घरों से अर्थियां उठाकर शवयात्रा के रूप में गलियों से होकर निकाली गईं तो रिश्तेदारों समेत उनके आश्रितों को कीचड़ का सामना करना पड़ा। ऐसी कोई अर्थी नहीं दिखी, जिसे कंधा देने वाले उनके परिजन कीचड़ में पैर सने बिना आगे बढ़ पाए हों।
अल्लापुर चमारी गांव की अधिकतर गलियों में कीचड़ है... यह बात प्रधान ही नहीं, बल्कि सफाई व्यवस्था से जुड़े ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को भी पता थी। इतनी बड़ी संख्या में अर्थियां मंगलवार को गलियों से निकाली जाएंगी, यह बात भी सभी को पता थी। बावजूद इसके गलियों की सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
प्रेम सिंह, उनके भाई जय सिंह उर्फ साधु, साधु की पत्नी मुन्नी देवी और भगवती देवी पत्नी चित्रपाल के शव जिस गली से होकर निकले, उसमें सबसे ज्यादा कीचड़ थी। अर्थियों को कंधा देने वाले मृतकों के परिजन और रिश्तेदारों को अपने पेंट-पायजामा समेटकर आगे बढ़ना पड़ा।
विज्ञापन
दिक्कत तो मूर्ति देवी और रामेश्वर की शवयात्रा के दौरान भी लोगों को आई, लेकिन माहौल गमगीन होने की वजह से कोई भी कुछ कह नहीं सका। इसी दौरान एक थानेदार ने बताया कि गांव में जिले के वरिष्ठ अधिकारी आ रहे हैं। इसके बाद सफाई कर्मी गलियों में पहुंच गए। हालांकि तब तक अर्थियां दाह संस्कार के लिए कछला की ओर निकल चुकी थीं।
शवयात्रा में जुटे रिश्तेदारों में अहीरवारा गांव के चंद्रपाल सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना के बाद भी सोमवार को अधिकारी गांव में आए थे, लेकिन उन्होंने भी गलियों में भरी कीचड़ पर गौर नहीं किया था।
विज्ञापन
अल्लापुर चमारी गांव की अधिकतर गलियों में कीचड़ है... यह बात प्रधान ही नहीं, बल्कि सफाई व्यवस्था से जुड़े ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को भी पता थी। इतनी बड़ी संख्या में अर्थियां मंगलवार को गलियों से निकाली जाएंगी, यह बात भी सभी को पता थी। बावजूद इसके गलियों की सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
विज्ञापन
प्रेम सिंह, उनके भाई जय सिंह उर्फ साधु, साधु की पत्नी मुन्नी देवी और भगवती देवी पत्नी चित्रपाल के शव जिस गली से होकर निकले, उसमें सबसे ज्यादा कीचड़ थी। अर्थियों को कंधा देने वाले मृतकों के परिजन और रिश्तेदारों को अपने पेंट-पायजामा समेटकर आगे बढ़ना पड़ा।
विज्ञापन
दिक्कत तो मूर्ति देवी और रामेश्वर की शवयात्रा के दौरान भी लोगों को आई, लेकिन माहौल गमगीन होने की वजह से कोई भी कुछ कह नहीं सका। इसी दौरान एक थानेदार ने बताया कि गांव में जिले के वरिष्ठ अधिकारी आ रहे हैं। इसके बाद सफाई कर्मी गलियों में पहुंच गए। हालांकि तब तक अर्थियां दाह संस्कार के लिए कछला की ओर निकल चुकी थीं।
शवयात्रा में जुटे रिश्तेदारों में अहीरवारा गांव के चंद्रपाल सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना के बाद भी सोमवार को अधिकारी गांव में आए थे, लेकिन उन्होंने भी गलियों में भरी कीचड़ पर गौर नहीं किया था।

गांव से कीचड़ में अंतिम यात्रा निकलने के बाद सफाई करते सफाई कर्मी। संवाद