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Budaun News: इलाज न मिलने पर मरीज के साथ आए तीमारदार भड़के
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बदायूं। जिला अस्पताल में मरीज भर्ती करने में हीलाहवाली और देरी पर परिजन भड़क गए। कुछ देर हंगामा भी हुआ। पुलिस पहुंच गई। बाद में परिजन मरीज को निजी अस्पताल ले गए।
सिविल लाइन क्षेत्र के मोहल्ला खेड़ा नवादा निवासी सैफुद्दीन को अचानक उल्टी-दस्त होने लगे तो परिजन बृहस्पतिवार देर रात 12 बजे के करीब जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में डॉक्टर नहीं थे। अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड बॉय के हवाला था। जब मरीज के इलाज के लिए परिजन ने डॉक्टर को बुलाने को कहा तो वार्ड बॉय ने पहले टाला, फिर कहा कि उल्टी-दस्त के मरीज को भर्ती करने की जरूरत नहीं है। जब परिजन ने कहा हालत ठीक नहीं है, भर्ती कर लीजिए तो वार्ड बॉय अपशब्द कहने लगा। इसी बीच डॉक्टर आ गए।
उन्होंने खुद कोई परीक्षण नहीं किया, बल्कि कर्मचारियों के कहने पर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया। इस पर तीमारदारों और डॉक्टर के बीच जमकर कहासुनी हुई। आखिर में इमरजेंसी के चिकित्साधिकारी ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस पहुंची। वहीं इलाज न मिलने पर परिजन मरीज को प्राइवेट अस्पताल ले गए।
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इमरजेंसी के चिकित्साधिकारी डॉ. नितिन कुमार सिंह का कहना है कि मरीज का इलाज शुरू होने से पहले ही तीमारदारों ने रौब गांठना शुरू कर दिया। बेवजह का हंगामा तीमारदारों ने किया। बात जब हद से बाहर हुई तो पुलिस बुलानी पड़ी।
रात में कुछ लोगों की शिकायत थी। समाधान के निर्देश दिए थे। ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. नितिन से मैंने बात भी की थी। मुझे हंगामे और मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की बात पता नहीं है। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच कराएंगे। किसी भी मरीज और तीमारदार को समस्या नहीं होने दी जाएगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
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सिविल लाइन क्षेत्र के मोहल्ला खेड़ा नवादा निवासी सैफुद्दीन को अचानक उल्टी-दस्त होने लगे तो परिजन बृहस्पतिवार देर रात 12 बजे के करीब जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में डॉक्टर नहीं थे। अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड बॉय के हवाला था। जब मरीज के इलाज के लिए परिजन ने डॉक्टर को बुलाने को कहा तो वार्ड बॉय ने पहले टाला, फिर कहा कि उल्टी-दस्त के मरीज को भर्ती करने की जरूरत नहीं है। जब परिजन ने कहा हालत ठीक नहीं है, भर्ती कर लीजिए तो वार्ड बॉय अपशब्द कहने लगा। इसी बीच डॉक्टर आ गए।
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उन्होंने खुद कोई परीक्षण नहीं किया, बल्कि कर्मचारियों के कहने पर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया। इस पर तीमारदारों और डॉक्टर के बीच जमकर कहासुनी हुई। आखिर में इमरजेंसी के चिकित्साधिकारी ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस पहुंची। वहीं इलाज न मिलने पर परिजन मरीज को प्राइवेट अस्पताल ले गए।
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इमरजेंसी के चिकित्साधिकारी डॉ. नितिन कुमार सिंह का कहना है कि मरीज का इलाज शुरू होने से पहले ही तीमारदारों ने रौब गांठना शुरू कर दिया। बेवजह का हंगामा तीमारदारों ने किया। बात जब हद से बाहर हुई तो पुलिस बुलानी पड़ी।
रात में कुछ लोगों की शिकायत थी। समाधान के निर्देश दिए थे। ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. नितिन से मैंने बात भी की थी। मुझे हंगामे और मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की बात पता नहीं है। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच कराएंगे। किसी भी मरीज और तीमारदार को समस्या नहीं होने दी जाएगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस