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Budaun News: दो साल में मक्का की खेती का रकबा तीन गुना से अधिक बढ़ा

Sat, 03 Jan 2026 01:34 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Sat, 03 Jan 2026 01:34 AM IST
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The area under maize cultivation has increased more than three times in two years.
बदायूं। जिले में मक्का की खेती अब किसानों की आय का मजबूत साधन बनती जा रही है। बीते दो वर्षों में मक्का के उत्पादन और कारोबार में जिस तेजी से वृद्धि हुई है, उसने जिले की कृषि तस्वीर ही बदलकर रख दी है। परंपरागत फसलों से हटकर किसान अब मक्का की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, इसका सीधा असर खेती के रकबे और बाजार गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दो वर्ष पूर्व जिले में जहां लगभग 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर ही मक्का की खेती होती थी, वहीं वर्तमान समय में यह रकबा बढ़कर करीब 70 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यानी मक्का की खेती का क्षेत्रफल तीन गुना से भी अधिक हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि किसानों को मक्का से मिल रहे बेहतर आर्थिक लाभ और बाजार में लगातार बढ़ती मांग का परिणाम है।
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कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिले में मक्का की बोआई मुख्य रूप से फरवरी में की जाती है। बोआई के लगभग तीन माह के भीतर फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर लेते हैं। फसल चक्र के तहत किसान पहले आलू की खेती करते हैं, इसके बाद मक्का और फिर मक्का कटाई के बाद धान की खेती कर लेते हैं।
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इस तीन फसली प्रणाली से किसानों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। किसानों का कहना है कि जिले में हाइब्रिड मक्का की खेती तेजी से बढ़ रही है। हाइब्रिड बीजों से उत्पादन अधिक मिलता है, रोगों का प्रकोप कम रहता है और लागत भी नियंत्रित रहती है। इससे किसानों को कम खर्च में अधिक मुनाफा हो रहा है। यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी मक्का की खेती को अपनाने लगे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मक्का की खेती न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि पशु आहार, पोल्ट्री फीड और औद्योगिक उपयोग के कारण इसकी बाजार मांग भी लगातार बनी रहती है। यदि किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और उचित विपणन सुविधा उपलब्ध कराई जाए, तो आने वाले वर्षों में मक्का जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो सकती है।

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मक्का की खेती में आई इस तेजी को जिले की कृषि प्रगति के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जिले के कृषि कारोबार को भी नई दिशा मिलेगी। बीते दो साल पहले जहां यहां पर 20 हजार हेक्टेयर में खेती होती थी। लेकिन अब 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर किसान मक्का की खेती कर रहे है।
मनोज कुमार, उप कृषि निदेशक
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