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तेरस पर जयघोष केसाथ शिवालयों में हुआ जलाभिषेक
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2016 10:55 PM IST
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जलाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
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शिवालयों में उमड़ी भीड़, भक्तों ने चढ़ाए बेलपाती, धतूरा, भांग और ऋतु-फल
मनोकामना पूरी करने के लिए भगवान भोले की पूजा, उतारी गई आरती
कांवड़ियों से गंगाजल से अपने-अपने इलाके के शिवालयों में भगवान भोले का जलाभिषेक किया। शिवभक्तों में स्त्री, पुरुष, बाल और वृद्धों की भीड़ शिवालयों पर मानो उमड़ी पड़ रही हो। घंटों की ध्वनि के साथ हर-हर महादेव के बोल गूंज उठे। कांवडिय़ों ने जहां गंगाजल से जलाभिषेक किया तो भक्तों ने घी, दूध, शहद आदि से भगवान भोले का अभिषेक किया और मन्नते मांगी। सावन में शिव तेरस का बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान भोले इच्छित वरदान देते हैं। मान्यता को देखते हुए उन तमाम लोगों ने भी पूजा अर्चना की जो सावन में मंदिर नहीं जा सके थे।
सुबह से ही सावन के दूसरे सोमवार और शिवतेरस होने चके कारण भक्तों की शिवालयों पर भीड़ जुट गई। हर-हर, बम-बम
उद्घोष के साथ जलाभिषेक के लिए लाइनें लग गईं। शहर में बिरुआबाड़ी मंदिर, हर प्रसाद मंदिर, दरीबा मंदिर, गौरीशंकर मंदिर के अलावा गली-मोहल्लों के मंदिरों और शिवालयों में भक्तों का सैलाव उमड़ पड़ा। धूप, दीप नैवेद्य से पूजा अर्चना का सिलसिला लंबे समय तक चला। बाबा भोले का आशीर्वाद लेने को हर एक के मन में उत्कंठा थी। सुबह से ही अभिषेक का क्रम चलता रहा। बेलपाती, भांग, धतूरा, फूल और फल चढ़ाकर भक्तों ने मनोकामनाएं भोले केसामने रखीं और उन्हें पूरी करने के लिए उन्हें प्रसन्न किया।
कांवडिय़ों ने यहां कछला घाट समेत विभिन्न घाटों से गंगा जल लेकर अपने-अपने क्षेत्र केशिवालयों में चढ़ाया। कांवडिय़ों की भीड़ के कारण मंदिरों और रास्तों में पुलिस की जबर्दस्त व्यवस्था की गई थी। जिले में ऐसा कोई मार्ग नहीं था, जिन मार्गों से कांवडिय़ों के दल न दिखाई दिए हों। डीजे और लाउडस्पीकरों के साथ ट्रैक्टर ट्रालियों और विभिन्न वाहनों के अलावा पैदन कांवड़ लेकर शिवालय पहुंचने वाले कांवडिय़ों ने भक्ति का संदेश दिया और पूजा-अर्चना कर अपने आराध्य को मनाया।
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जिलेभर में शिव तेरस पर भगवान भोले को उनके परिवार पार्वती, गणेश, नंदी, कार्तिकेय के साथ पूजा गया। उनकी आराधना में घंटे बजाकर जयघोष के साथ पूजा अर्चना कर उनके प्रिय व्यंजन चढ़ाए गए। तमाम भक्तों ने इस अवसर पर व्रत रखकर आराधना की। घरों से लेकर मंदिर और शिवालयों तक भगवान भोले की पूजा अर्चना की गई।
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साधू मढ़ी घाट पर उमड़े कांवड़िया
जरीफनगर। सावन के दूसरे सोमवार को गंगा के साधू मढ़ी घाट पर कांवड़ियों की भीड़ रही। तमाम गांवों से शिव भक्त जल लेने पहुंचे। यहां से जल लेने के बाद अपने-अपने गांवों के शिवालयों में शिव का अभिषेक किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे।
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पटना मंदिर पर दिन भर लगी रहीं कतारें
उसावां। प्राचीन और प्रसिद्ध पटना देवकली शिव मंदिर पर सावन के दूसरे सोमवार को महादेव का जलाभिषेक करने वाले शिव भक्तों की दिन भर कतारें लगी रहीं। शिव तेरस पर भीड़ को देखते हुए यहां कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया गया। मंदिर में सुबह तीन बजे से ही महादेव का जलाभिषेक शुरू हो गया। यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। अटैना घाट, फर्रखाबाद, कलान आदि स्थानों के कांवडिय़ों ने भी मंदिर में जलाभिषेक किया।
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वनखंडी मंदिर में उमड़े भक्त
इस्लामनगर। प्रसिद्ध वनखंडी मंदिर में शिव तेरस पर दिन भर भक्तों की कतारें लगी रहीं। शिव भक्तों ने मंदिर में महादेव का जलाभिषेक किया। पताली महादेव, गंगा चंदोई स्थित शिवालयों में भी जलाभिषेक किया गया। चेयरमैन वीरेंद्र लीडर, सपा नेता हितेंद्र शंखधार, संजीव गुप्ता, हिमांशु गुप्ता आदि ने कांवड़ियों का स्वागत किया।
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नशा छोड़ने का व्रत लेकर शिव को किया नमन
सावन का महीना भगवान शंकर या नीलकंठेश्वर का विशेष महीना है। इसी माह में सागर मंथन हुआ था, ऐसा माना जाता है। मंथन में निकला हलाहल नाम का जहर पीकर भगवान भोले ने विश्व का बचाया था। आज भी समाज में कुछ नशीले पदार्थ समाज में विष वमन कर रहे हैं। इन हालातों में बुजुर्गों के उपदेश पर कुछ लोग सावन माह में नशा छोड़ने का भी व्रत लेते हैं। इस बार भी तमाम लोगों ने बीड़ी-सिगरेट, शराब, गांजा, सुल्फा आदि शिव का समर्पित कर आजीवन नशा छोड़ने का संकल्प लिया।
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मनोकामना पूरी करने के लिए भगवान भोले की पूजा, उतारी गई आरती
कांवड़ियों से गंगाजल से अपने-अपने इलाके के शिवालयों में भगवान भोले का जलाभिषेक किया। शिवभक्तों में स्त्री, पुरुष, बाल और वृद्धों की भीड़ शिवालयों पर मानो उमड़ी पड़ रही हो। घंटों की ध्वनि के साथ हर-हर महादेव के बोल गूंज उठे। कांवडिय़ों ने जहां गंगाजल से जलाभिषेक किया तो भक्तों ने घी, दूध, शहद आदि से भगवान भोले का अभिषेक किया और मन्नते मांगी। सावन में शिव तेरस का बड़ा महत्व है। इस दिन भगवान भोले इच्छित वरदान देते हैं। मान्यता को देखते हुए उन तमाम लोगों ने भी पूजा अर्चना की जो सावन में मंदिर नहीं जा सके थे।
सुबह से ही सावन के दूसरे सोमवार और शिवतेरस होने चके कारण भक्तों की शिवालयों पर भीड़ जुट गई। हर-हर, बम-बम
उद्घोष के साथ जलाभिषेक के लिए लाइनें लग गईं। शहर में बिरुआबाड़ी मंदिर, हर प्रसाद मंदिर, दरीबा मंदिर, गौरीशंकर मंदिर के अलावा गली-मोहल्लों के मंदिरों और शिवालयों में भक्तों का सैलाव उमड़ पड़ा। धूप, दीप नैवेद्य से पूजा अर्चना का सिलसिला लंबे समय तक चला। बाबा भोले का आशीर्वाद लेने को हर एक के मन में उत्कंठा थी। सुबह से ही अभिषेक का क्रम चलता रहा। बेलपाती, भांग, धतूरा, फूल और फल चढ़ाकर भक्तों ने मनोकामनाएं भोले केसामने रखीं और उन्हें पूरी करने के लिए उन्हें प्रसन्न किया।
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कांवडिय़ों ने यहां कछला घाट समेत विभिन्न घाटों से गंगा जल लेकर अपने-अपने क्षेत्र केशिवालयों में चढ़ाया। कांवडिय़ों की भीड़ के कारण मंदिरों और रास्तों में पुलिस की जबर्दस्त व्यवस्था की गई थी। जिले में ऐसा कोई मार्ग नहीं था, जिन मार्गों से कांवडिय़ों के दल न दिखाई दिए हों। डीजे और लाउडस्पीकरों के साथ ट्रैक्टर ट्रालियों और विभिन्न वाहनों के अलावा पैदन कांवड़ लेकर शिवालय पहुंचने वाले कांवडिय़ों ने भक्ति का संदेश दिया और पूजा-अर्चना कर अपने आराध्य को मनाया।
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जिलेभर में शिव तेरस पर भगवान भोले को उनके परिवार पार्वती, गणेश, नंदी, कार्तिकेय के साथ पूजा गया। उनकी आराधना में घंटे बजाकर जयघोष के साथ पूजा अर्चना कर उनके प्रिय व्यंजन चढ़ाए गए। तमाम भक्तों ने इस अवसर पर व्रत रखकर आराधना की। घरों से लेकर मंदिर और शिवालयों तक भगवान भोले की पूजा अर्चना की गई।
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साधू मढ़ी घाट पर उमड़े कांवड़िया
जरीफनगर। सावन के दूसरे सोमवार को गंगा के साधू मढ़ी घाट पर कांवड़ियों की भीड़ रही। तमाम गांवों से शिव भक्त जल लेने पहुंचे। यहां से जल लेने के बाद अपने-अपने गांवों के शिवालयों में शिव का अभिषेक किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे।
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पटना मंदिर पर दिन भर लगी रहीं कतारें
उसावां। प्राचीन और प्रसिद्ध पटना देवकली शिव मंदिर पर सावन के दूसरे सोमवार को महादेव का जलाभिषेक करने वाले शिव भक्तों की दिन भर कतारें लगी रहीं। शिव तेरस पर भीड़ को देखते हुए यहां कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया गया। मंदिर में सुबह तीन बजे से ही महादेव का जलाभिषेक शुरू हो गया। यह सिलसिला शाम तक चलता रहा। अटैना घाट, फर्रखाबाद, कलान आदि स्थानों के कांवडिय़ों ने भी मंदिर में जलाभिषेक किया।
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वनखंडी मंदिर में उमड़े भक्त
इस्लामनगर। प्रसिद्ध वनखंडी मंदिर में शिव तेरस पर दिन भर भक्तों की कतारें लगी रहीं। शिव भक्तों ने मंदिर में महादेव का जलाभिषेक किया। पताली महादेव, गंगा चंदोई स्थित शिवालयों में भी जलाभिषेक किया गया। चेयरमैन वीरेंद्र लीडर, सपा नेता हितेंद्र शंखधार, संजीव गुप्ता, हिमांशु गुप्ता आदि ने कांवड़ियों का स्वागत किया।
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नशा छोड़ने का व्रत लेकर शिव को किया नमन
सावन का महीना भगवान शंकर या नीलकंठेश्वर का विशेष महीना है। इसी माह में सागर मंथन हुआ था, ऐसा माना जाता है। मंथन में निकला हलाहल नाम का जहर पीकर भगवान भोले ने विश्व का बचाया था। आज भी समाज में कुछ नशीले पदार्थ समाज में विष वमन कर रहे हैं। इन हालातों में बुजुर्गों के उपदेश पर कुछ लोग सावन माह में नशा छोड़ने का भी व्रत लेते हैं। इस बार भी तमाम लोगों ने बीड़ी-सिगरेट, शराब, गांजा, सुल्फा आदि शिव का समर्पित कर आजीवन नशा छोड़ने का संकल्प लिया।