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Budaun News: दो माह में दस श्रद्धालुओं ने जान गंवाई.... इंतजाम फिर भी नहीं
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कछला गंगा तट पर बिना सुरक्षा इंतजाम के ही कच्चे घाट पर स्नान करते लोग। संवाद
कछला। गंगातट पर पक्के घाट के अभाव में श्रद्धालुओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ जाता है। दो महीना के दौरान ही 10 श्रद्धालुओं की जान चली गई, बावजूद इसके इंतजाम के नाम पर नगर पंचायत प्रशासन ने कोई पहल नहीं की। शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है, ऐसा माना जा सकता है।
ऐसा भी नहीं कि गंगाघाट पर दो महीनों से पहले कोई हादसा न हुआ हो। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व के अलावा अन्य दिनों में भी श्रद्धालुओं को हादसे का शिकार होना पड़ा था। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल भी करीब 20 श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। उस वक्त भी अफसरों ने अगली बार से बेहतर इंतजाम कराने का दावा किया था। इंतजाम न होने से हादसे होते रहे।
गंगा में नाव चलाकर परिवार चलाते नाविकों में महावीर बताते हैं कि गंगा में डुबकी लगाते समय श्रद्धालुओं की जान बचाने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे। अच्छा यही रहेगा कि पक्के घाटों का निर्माण हो। घाटों पर लोहे की ग्रिल और जंजीर लगें। इसके बाद हादसों पर काफी हद तक अंकुश लग जाएगा।
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बता दें कि गंगाघाट पर खासकर पूर्णिमा, दशहरा और सोमवती अमावस्या पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। बरेली, बदायूं, कासगंज, एटा, हाथरस, राजस्थान आदि के श्रद्धालु भी इनमें शामिल होते हैं। बाहर के श्रद्धालुओं को गंगा में गहराई के बारे में भी पता नहीं चल पाता। हादसा होने की स्थिति में उन्हें खोजना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा कई बार सामने भी आ चुका है।
वैसे, पक्के घाट निर्माण के लिए शासन स्तर पर दो-तीन बार प्रस्ताव भी जा चुके हैं, हालांकि अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। नगर पंचायत की ओर से भी पक्के घाट और आसपास इलाके के जीर्णोंद्धार का प्रस्ताव भेजा गया था। नगर पंचायत अध्यक्ष जगदीश सिंह लौनिया चौहान ने बताया कि जल्द ही शासन स्तर पर पैरोकारी कराएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को जानमाल का नुकसान नहीं उठाना पड़े।
उठती रही है फ्लड यूनिट की मांग
गंगाघाट पर पीएसी की फ्लड यूनिट की तैनाती के लिए स्थानीय स्तर से कई बार मांग उठाई जा चुकी है। इसके बाद भी शासन स्तर से फ्लड यूनिट की तैनाती नहीं की गई। हादसा होने पर फ्लड यूनिट बुलाई तो जाती है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इलाके के संतों में हरीओम शास्त्री का कहना है कि अगर फ्लड यूनिट के गोताखोर संसाधनों के साथ घाट पर रहेंगे तो हादसा होने पर तत्काल कार्रवाई कर श्रद्धालुओं की जान बचा सकते हैं।
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ऐसा भी नहीं कि गंगाघाट पर दो महीनों से पहले कोई हादसा न हुआ हो। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व के अलावा अन्य दिनों में भी श्रद्धालुओं को हादसे का शिकार होना पड़ा था। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल भी करीब 20 श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। उस वक्त भी अफसरों ने अगली बार से बेहतर इंतजाम कराने का दावा किया था। इंतजाम न होने से हादसे होते रहे।
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गंगा में नाव चलाकर परिवार चलाते नाविकों में महावीर बताते हैं कि गंगा में डुबकी लगाते समय श्रद्धालुओं की जान बचाने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे। अच्छा यही रहेगा कि पक्के घाटों का निर्माण हो। घाटों पर लोहे की ग्रिल और जंजीर लगें। इसके बाद हादसों पर काफी हद तक अंकुश लग जाएगा।
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बता दें कि गंगाघाट पर खासकर पूर्णिमा, दशहरा और सोमवती अमावस्या पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। बरेली, बदायूं, कासगंज, एटा, हाथरस, राजस्थान आदि के श्रद्धालु भी इनमें शामिल होते हैं। बाहर के श्रद्धालुओं को गंगा में गहराई के बारे में भी पता नहीं चल पाता। हादसा होने की स्थिति में उन्हें खोजना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा कई बार सामने भी आ चुका है।
वैसे, पक्के घाट निर्माण के लिए शासन स्तर पर दो-तीन बार प्रस्ताव भी जा चुके हैं, हालांकि अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। नगर पंचायत की ओर से भी पक्के घाट और आसपास इलाके के जीर्णोंद्धार का प्रस्ताव भेजा गया था। नगर पंचायत अध्यक्ष जगदीश सिंह लौनिया चौहान ने बताया कि जल्द ही शासन स्तर पर पैरोकारी कराएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को जानमाल का नुकसान नहीं उठाना पड़े।
उठती रही है फ्लड यूनिट की मांग
गंगाघाट पर पीएसी की फ्लड यूनिट की तैनाती के लिए स्थानीय स्तर से कई बार मांग उठाई जा चुकी है। इसके बाद भी शासन स्तर से फ्लड यूनिट की तैनाती नहीं की गई। हादसा होने पर फ्लड यूनिट बुलाई तो जाती है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इलाके के संतों में हरीओम शास्त्री का कहना है कि अगर फ्लड यूनिट के गोताखोर संसाधनों के साथ घाट पर रहेंगे तो हादसा होने पर तत्काल कार्रवाई कर श्रद्धालुओं की जान बचा सकते हैं।