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बच्चों ने दोहे सुनाकर मनाया संस्कृत सप्ताह
ब्यूरो /बदायूं
Updated Fri, 02 Sep 2016 11:56 PM IST
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बच्चों ने मनाया संस्कृत सप्ताह
- फोटो : बदायूं/उत्ततर प्रदेश्ा
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एपीएस इंटरनेशनल स्कूल में चल रहे संस्कृत सप्ताह के तहत शुक्रवार को बच्चों ने संस्कृत भाषा का महत्व जाना। बच्चों ने संस्कृत में श्लोक भी दोहराए। साथ ही दोहे सुनाकर लोगों का मनमोह लिया।
स्कूल परिसर में संस्कृत सप्ताह की शुरूआत 29 अगस्त को हुई थी। पांचवे दिन छात्र और छात्राओं ने संस्कृत भाषा के महत्व का समझते हुए उसके बोलचाल के लहजे का समझा। बच्चों की टोलियों ने दोहे सुनाकर समां बांध दिया। पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष पूनम अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो शुरू से ही प्रचलन में रही है। संस्कृत में महाकाव्य तक लिखे जा चुके हैं। अभिव्यक्ति का भी यह एक माध्यम है। जो लोगअपनी संकीर्ण प्रथकतावादी भावना के कारण संस्कृत भाषा का विरोध करते हैं, उन्हें अपनी सोच में बदलाव करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कविता के माध्यम से भी संस्कृत के प्रति जागरुकता का संदेश दिया। कहा कि भारतवर्ष में सांस्कृतिक परंपराओं और संस्कारों के लिए भी संस्कृत के योगदान कम नहीं आंका जा सकता। प्रबंधक नीलांशु अग्रवाल ने प्रतिभागी बच्चों का हौसला बढ़ाया। प्रधानाचार्य रवींद्र भट्ट और ऊषा खरे, शिक्षिक और शिक्षिकाओं ने संस्कृत की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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स्कूल परिसर में संस्कृत सप्ताह की शुरूआत 29 अगस्त को हुई थी। पांचवे दिन छात्र और छात्राओं ने संस्कृत भाषा के महत्व का समझते हुए उसके बोलचाल के लहजे का समझा। बच्चों की टोलियों ने दोहे सुनाकर समां बांध दिया। पूर्व राज्यमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष पूनम अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो शुरू से ही प्रचलन में रही है। संस्कृत में महाकाव्य तक लिखे जा चुके हैं। अभिव्यक्ति का भी यह एक माध्यम है। जो लोगअपनी संकीर्ण प्रथकतावादी भावना के कारण संस्कृत भाषा का विरोध करते हैं, उन्हें अपनी सोच में बदलाव करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कविता के माध्यम से भी संस्कृत के प्रति जागरुकता का संदेश दिया। कहा कि भारतवर्ष में सांस्कृतिक परंपराओं और संस्कारों के लिए भी संस्कृत के योगदान कम नहीं आंका जा सकता। प्रबंधक नीलांशु अग्रवाल ने प्रतिभागी बच्चों का हौसला बढ़ाया। प्रधानाचार्य रवींद्र भट्ट और ऊषा खरे, शिक्षिक और शिक्षिकाओं ने संस्कृत की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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