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Budaun News: काला कानून वापस लो, चलाया एक्स पर अभियान
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बदायूं। सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी पास करने की अनिवार्यता का शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया है। नाराज परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने शिक्षक दिवस पर विरोध जताया। बदायूं सहित प्रदेश भर में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज किया और एक्स (ट्विटर) पर “काला कानून वापस लो” अभियान चलाया। यह अभियान दिनभर ट्रेंड में बना रहा।
जनपद में विरोध कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष व प्रांतीय प्रचार मंत्री संजीव शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि एक सितंबर को दिया गया सुप्रीम कोर्ट का आदेश शिक्षक विरोधी है। इससे देशभर के करीब 10 लाख शिक्षकों की नौकरी संकट में पड़ गई है। शिक्षकों ने शिक्षक दिवस पर जश्न मनाने के बजाय अपने शोषण के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई।
ट्वीट करते हुए शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग कर आदेश वापस लेने की मांग की। संजीव शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश भर के शिक्षक सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने बताया कि शिक्षक पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में पदोन्नति और सेवा की शर्तों में टीईटी को अनिवार्य करना अन्यायपूर्ण है।
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जिला मंत्री उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि यह निर्णय उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस मौके पर कोषाध्यक्ष सुशील चौधरी, उपाध्यक्ष हरीश यादव सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष व कार्यसमिति सदस्य भी मौजूद रहे। म्याऊं और जगत ब्लॉक की महिला शिक्षिकाएं श्वेता आर्य, रंजना, वीना राठौर, कुसुम आदि ने भी काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।
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जनपद में विरोध कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष व प्रांतीय प्रचार मंत्री संजीव शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि एक सितंबर को दिया गया सुप्रीम कोर्ट का आदेश शिक्षक विरोधी है। इससे देशभर के करीब 10 लाख शिक्षकों की नौकरी संकट में पड़ गई है। शिक्षकों ने शिक्षक दिवस पर जश्न मनाने के बजाय अपने शोषण के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई।
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ट्वीट करते हुए शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग कर आदेश वापस लेने की मांग की। संजीव शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश भर के शिक्षक सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने बताया कि शिक्षक पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में पदोन्नति और सेवा की शर्तों में टीईटी को अनिवार्य करना अन्यायपूर्ण है।
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जिला मंत्री उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि यह निर्णय उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस मौके पर कोषाध्यक्ष सुशील चौधरी, उपाध्यक्ष हरीश यादव सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष व कार्यसमिति सदस्य भी मौजूद रहे। म्याऊं और जगत ब्लॉक की महिला शिक्षिकाएं श्वेता आर्य, रंजना, वीना राठौर, कुसुम आदि ने भी काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।