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सिंथेटिक टेनिस के खिलाड़ी नहीं, कोर्ट पर खर्च किए 50 लाख
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:02 AM IST
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सिंथेटिक टेनिस के खिलाड़ी नहीं, कोर्ट पर खर्च किए 50 लाख
- फोटो : अमर उजाला
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खेल विभाग
सिंथेटिक टेनिस कोर्ट पर अब तक नहीं हुआ एक भी टूर्नामेंट
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित कहावत कि अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपने को देय। यह कहावत जिले के स्पोर्ट्स स्टेडियम पर एकदम सटीक बैठती है। क्योंकि स्टेडियम में सिंथेटिक टेनिस कोर्ट का निर्माण करने में 50 लाख 30 हजार रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि इस खेल के तो जिले में खिलाड़ी ही नहीं है। हां, इतना जरूर है कि इस खेल के कोच जिला क्रीड़ा अधिकारी अनिल कुमार हैं।
जिले में प्रतिभावान खिलाड़ियों को एक मंच देने के लिए जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन करके खिलाडिय़ों को निखारा जा सके। स्पोर्ट्स स्टेडियम में इन दिनों आधे से ज्यादा ग्राउंड में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है, जिसमें, क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी जैसे मैच होने में खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही अधिकांश खेलों के तो कोच भी नहीं हैं, जिससे खेलों की प्रैक्टिस नियमित एवं बेहतरी के साथ नहीं हो पा रही है।
इसके विपरीत स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक टेनिस कोर्ट का निर्माण 50 लाख 30 हजार रुपये खर्च करके कराया गया, जिसे अप्रैल 2016 में ही हैंडओवर कर दिया गया। इस कोर्ट पर अब तक एक भी टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हो सका है, क्योंकि जिले में सिंथेटिक टेनिस के खिलाड़ी ही नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो टेनिस कोर्ट पर अब तक ढंग का मैच भी नहीं हुआ है।
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पचास लाख की कीमत से बने इसे सिंथेटिक टेनिस कोर्ट पर दो पूर्व खिलाड़ी कभी-कभार प्रैक्टिस करने के लिए पहुंचे जाते हैं। इनके अलावा कुछ जिला स्तरीय अधिकारी मनोरंजन के नजरिए से यदा-कदा सिंथेटिक टेनिस की प्रैक्टिस कर लेते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि कोर्ट को हैंडओवर हुए करीब चार माह बीत चुके हैं और इसके कोच खुद जिला क्रीड़ा अधिकारी हैं। बावजूद इसके खिलाड़ियों की खोज अभी तक नहीं हो सकी है, इससे सिंथेटिक टेनिस कोर्ट निष्प्रोज्य साबित हो रहा है।
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सिंथेटिक टेनिस के खिलाड़ी नहीं होने की वजह से इसके खेल नहीं होते हैं। कुछ पूर्व खिलाड़ी लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं। जल्द ही नए खिलाड़ियों के आने की उम्मीद है। किसी स्टेडियम में टूर्नामेंट का आयोजन तीन कोर्ट होने पर ही किया जा सकता है, जबकि जिले में महज एक कोर्ट है।
अनिल कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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सिंथेटिक टेनिस कोर्ट पर अब तक नहीं हुआ एक भी टूर्नामेंट
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित कहावत कि अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपने को देय। यह कहावत जिले के स्पोर्ट्स स्टेडियम पर एकदम सटीक बैठती है। क्योंकि स्टेडियम में सिंथेटिक टेनिस कोर्ट का निर्माण करने में 50 लाख 30 हजार रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि इस खेल के तो जिले में खिलाड़ी ही नहीं है। हां, इतना जरूर है कि इस खेल के कोच जिला क्रीड़ा अधिकारी अनिल कुमार हैं।
जिले में प्रतिभावान खिलाड़ियों को एक मंच देने के लिए जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन करके खिलाडिय़ों को निखारा जा सके। स्पोर्ट्स स्टेडियम में इन दिनों आधे से ज्यादा ग्राउंड में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है, जिसमें, क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी जैसे मैच होने में खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही अधिकांश खेलों के तो कोच भी नहीं हैं, जिससे खेलों की प्रैक्टिस नियमित एवं बेहतरी के साथ नहीं हो पा रही है।
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इसके विपरीत स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक टेनिस कोर्ट का निर्माण 50 लाख 30 हजार रुपये खर्च करके कराया गया, जिसे अप्रैल 2016 में ही हैंडओवर कर दिया गया। इस कोर्ट पर अब तक एक भी टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हो सका है, क्योंकि जिले में सिंथेटिक टेनिस के खिलाड़ी ही नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो टेनिस कोर्ट पर अब तक ढंग का मैच भी नहीं हुआ है।
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पचास लाख की कीमत से बने इसे सिंथेटिक टेनिस कोर्ट पर दो पूर्व खिलाड़ी कभी-कभार प्रैक्टिस करने के लिए पहुंचे जाते हैं। इनके अलावा कुछ जिला स्तरीय अधिकारी मनोरंजन के नजरिए से यदा-कदा सिंथेटिक टेनिस की प्रैक्टिस कर लेते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि कोर्ट को हैंडओवर हुए करीब चार माह बीत चुके हैं और इसके कोच खुद जिला क्रीड़ा अधिकारी हैं। बावजूद इसके खिलाड़ियों की खोज अभी तक नहीं हो सकी है, इससे सिंथेटिक टेनिस कोर्ट निष्प्रोज्य साबित हो रहा है।
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सिंथेटिक टेनिस के खिलाड़ी नहीं होने की वजह से इसके खेल नहीं होते हैं। कुछ पूर्व खिलाड़ी लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं। जल्द ही नए खिलाड़ियों के आने की उम्मीद है। किसी स्टेडियम में टूर्नामेंट का आयोजन तीन कोर्ट होने पर ही किया जा सकता है, जबकि जिले में महज एक कोर्ट है।
अनिल कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी