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बदायूं में एच1एन1 का खतरा, अलर्ट
अमर उजाला, बदायूं
Updated Sun, 06 Dec 2015 08:18 PM IST
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जिले में पांच साल में स्वाइन फ्लू के आठ केस मिले हैं। इनमें तीन लोगों की जान चली गई थी। मरने वालों में एक उझानी के गांव सिरौमली का और दो ककराला कस्बे के थे। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कोई चूक करना नहीं चाहता।
जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में स्वाइन फ्लू वार्ड बनाया गया है। संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता की टीम ने संदिग्ध मरीजों की निगरानी शुरू कर दी है। इस संबंध में निजी नर्सिंग होम्स के लिए भी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
लक्षण-
- सात दिन से अधिक जुकाम रहना।
- सांस फूलना।
- खांसी में बलगम और बलगम में खून का आना।
- आंख, नाक से पानी आना और दस्त होना।
- हाई ब्लड प्रेशर, बेहोशी आने लगना।
क्या करें-
- भीड़-भाड़ से जहां तक संभव हो दूर रहें।
- छींकते समय टिशू पेपर का प्रयोग करें।
- बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
- सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का इस्तेमाल करें।
- लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं।
बदायूं में मिले यह केस-
वर्ष 2010 में ककराला निवासी जितिन प्रकाश गुप्ता (एच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आग गए थे। इनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
वर्ष 2012 में ककराला निवासी अशरफुलनिशा पत्नी डॉ. अब्दुल हनीफ (एच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आई थीं। समय रहते इनको इलाज मिल गया। इससे इनकी जान बच गई।
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वर्ष 2014 में उझानी ब्लाक के गांव सिरौली निवासी नफीस नाम के युवक की बरेली के एक अस्पताल में (एच1एन1) स्वाइन फ्लू से मौत हो गई।
ये बनाई टीम
डॉ. हरिदत्त कुमार, डॉ. आंशू अग्रवाल, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. एपी गौतम, फार्मासिस्ट कमर इकबाल, वार्ड ब्वाय राकेश, एक एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग के पास दवाओं का स्टॉक पूरा है। जिला अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड बना दिया गया है। चार डॉक्टरों की एक टीम भी बना दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
-डॉ. आरडी तिवारी
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जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में स्वाइन फ्लू वार्ड बनाया गया है। संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता की टीम ने संदिग्ध मरीजों की निगरानी शुरू कर दी है। इस संबंध में निजी नर्सिंग होम्स के लिए भी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
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लक्षण-
- सात दिन से अधिक जुकाम रहना।
- सांस फूलना।
- खांसी में बलगम और बलगम में खून का आना।
- आंख, नाक से पानी आना और दस्त होना।
- हाई ब्लड प्रेशर, बेहोशी आने लगना।
क्या करें-
- भीड़-भाड़ से जहां तक संभव हो दूर रहें।
- छींकते समय टिशू पेपर का प्रयोग करें।
- बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
- सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का इस्तेमाल करें।
- लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं।
बदायूं में मिले यह केस-
वर्ष 2010 में ककराला निवासी जितिन प्रकाश गुप्ता (एच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आग गए थे। इनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
वर्ष 2012 में ककराला निवासी अशरफुलनिशा पत्नी डॉ. अब्दुल हनीफ (एच1एन1) स्वाइन फ्लू की चपेट में आई थीं। समय रहते इनको इलाज मिल गया। इससे इनकी जान बच गई।
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वर्ष 2014 में उझानी ब्लाक के गांव सिरौली निवासी नफीस नाम के युवक की बरेली के एक अस्पताल में (एच1एन1) स्वाइन फ्लू से मौत हो गई।
ये बनाई टीम
डॉ. हरिदत्त कुमार, डॉ. आंशू अग्रवाल, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. एपी गौतम, फार्मासिस्ट कमर इकबाल, वार्ड ब्वाय राकेश, एक एंबुलेंस
स्वास्थ्य विभाग के पास दवाओं का स्टॉक पूरा है। जिला अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड बना दिया गया है। चार डॉक्टरों की एक टीम भी बना दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
-डॉ. आरडी तिवारी