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Budaun News: अंधकार की राह में अध्यात्म की अलख जला रहे ककराला के सुरेश

Fri, 11 Jul 2025 12:50 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:50 AM IST
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Suresh of Kakrala is lighting the flame of spirituality in the path of darkness
हरमोनियम की धुन पर सुंदरकांड का पाठ करते सुरेश और उनके साथ खड़ी पत्नी अंजना व तीन बच्चे। संवाद
बदायूं। अंधकार से शुरू हुए जीवन में तमाम कठिनाइयों को पार करते हुए ककराला के सुरेश श्रीवास्तव अब अध्यात्म की अलख जा रहे हैं। उनकी दृष्टिहीन पत्नी अंजना भी इसमें साथ दे रही है। इन दोनों ने ब्रेल लिपि से पढ़ाई की। अब दृष्टिहीन बच्चों को ब्रेललिपि में धार्मिक ग्रंथ पढ़ा रहे हैं। सुरेश के पास ब्रेललिपि में रामचरित मानस, महाभारत, गीता, शिवपुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथ हैं। इसके सहारे वह दृष्टिहीन बच्चों में अध्यात्म की अलख जला रहे हैं।
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नगर पंचायत ककराला के सुरेश श्रीवास्तव के पिता स्व. श्यामलाल पुलिस विभाग में थे। सुरेश बचपन से ही दृष्टिहीन हैं। इस वजह से उन्होंने अपने जीवन के अंधकार को शिक्षा के जरिए मिटाने की कोशिश की। सुरेश ने बताया कि उन्होंने ब्रेललिपि में कक्षा एक से चार तक की पढ़ाई हरिद्वार के सत्य सरोवर स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय में की। इसके बाद पांचवीं से इंटर तक की पढ़ाई लखनऊ के ब्लाइंड स्कूल से की।
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2007 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में एमए किया। इसके बाद दिल्ली में बीआर संस्था से फिजियोथेरेपी की ट्रेनिंग ली। कुछ साल दिल्ली में फिजियोथेरेपी की नौकरी की और फिर घर लौट आए।
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उनका भक्तिभाव में मन लगने लगा। उन्हें अहसास हुआ कि उन्हें अपने जैसे दृष्टिहीन बच्चों के लिए भी ब्रेललिपि का हुनर देना चाहिए। इस वजह से वह गांव के दो बच्चों को ब्रेललिपि में पढ़ा रहे हैं। इससे पहले वह कई बच्चों को ब्रेललिपि में पढ़ा चुके हैं।
उनके पास ब्रेल लिपि में कई धार्मिक ग्रंथ है। वह सुबह शाम ईश्वर की वंदना तो करते ही है। हारमोनियम की धुन पर रामचरित मानस का पाठ करते हैं। साथ ही दृष्टिहीन बच्चों व अन्य लोगों को अध्यात्म की राह दिखा रहे हैं।
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दिल्ली में मुलाकात और जीवनसंगिनी बनी दार्जिलिंग की अंजना

सुरेश की पत्नी अंजना दार्जिलिंग की रहने वाली है। वह और सुरेश दिल्ली में फिजियोथेरेपी की ट्रेनिंग कर रहे थे। तभी एक दूसरे का सहारा बनने की ठानी। फिर दोनों ने प्रेम विवाह किया है।

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दृष्टि, उज्ज्वल और जयंती के सहारे आगे का सफर

सुरेश पर तीन बच्चे है। बड़ी बेटी का नाम दृष्टि है, उसके बाद बेटा उज्ज्वल और छोटी बेटी जयंती है। तीनों बच्चे पढ़ रहे हैं। सुरेश ने बताया कि उनके जीवन में अंधेरा रहा है। उन्होंने अपने बच्चों के नाम ऐसे रखे हैं, जिससे उन्हें उजाले का एहसास हो।
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