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अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने से मिलों को नुकसान
badaun
Updated Sat, 21 Feb 2015 12:20 AM IST
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जल्द बीमारी की जद में आने वाली प्रतिबंधित प्रजाति के गन्ने से चीनी मिलों को नुकसान हो रहा है। गन्ना की ‘91269-प्रजाति’ को गन्ना शोध संस्थान ने करीब पांच साल पहले अस्वीकृत घोषित कर दिया था। इसके बाद भी जिले में किसान इस प्रजाति का उत्पादन कर रहे हैं। इससे न सिर्फ किसानों को, बल्कि चीनी मिलों को भी नुकसान हो रहा है।
मौसम में बदलावों के चलते करीब पांच साल पहले गन्ना की ‘91269-प्रजाति को बीमारियों ने घेर लिया था। प्रजाति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई। वजन में भारी और कठोर इस प्रजाति की रिकवरी कम हो गई, तो चीनी मिलें भी इससे परहेज करने लगीं। गन्ना की इस प्रजाति को बीमारियों से बचाने के सभी जतन नाकाम रहे तो गन्ना शोध संस्थान ने इस प्रजाति को अस्वीकृत घोषित कर दिया। इसके बाद गन्ना की कई उन्नत प्रजातियां विकसित की गईं। बावजूद इसके बदायूं के किसान किसान 91269 का मोह नहीं छोड़ पाए हैं।
ये हैं किसानों के मोह की वजह
91269 प्रजाति का गन्ना वजन में भारी होने के साथ ज्यादा कठोर होता है। इसे न तो जानवर पसंद करते हैं और न ही गन्ना खाने वाले ग्रामीण। ऐसे में किसान इस प्रजाति के गन्ने को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। हालांकि यह प्रजाति फरवरी के आखिर तक पूरी तरह से विकसित हो पाती है। तब तक तापमान बढ़ने से इसको तमाम बीमारियां घेर लेती हैं। इससे रिकवरी कम हो जाती है। रिकवरी कम होने से चीनी मिलों को नुकसान होता है।
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ये प्रजातियां हैं फायदेमंद
07250, 01434, 0238, 0239, 0118
गन्ना की 91269 प्रजाति फरवरी केअंत तक पूरी तरह से विकसित हो पाती है। अगर इससे पहले इस गन्ने की पेराई होती है तो रिकवरी कम रहती है। इसके अलावा फरवरी के तापमान में वृद्घि होने के साथ इस प्रजाति को बीमारियां घेर लेती हैं। बीमार गन्ने से भी रिकवरी कम मिलती है। -डॉ. एसपी सिंह, वैज्ञानिक, गन्ना शोध संस्थान
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मौसम में बदलावों के चलते करीब पांच साल पहले गन्ना की ‘91269-प्रजाति को बीमारियों ने घेर लिया था। प्रजाति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई। वजन में भारी और कठोर इस प्रजाति की रिकवरी कम हो गई, तो चीनी मिलें भी इससे परहेज करने लगीं। गन्ना की इस प्रजाति को बीमारियों से बचाने के सभी जतन नाकाम रहे तो गन्ना शोध संस्थान ने इस प्रजाति को अस्वीकृत घोषित कर दिया। इसके बाद गन्ना की कई उन्नत प्रजातियां विकसित की गईं। बावजूद इसके बदायूं के किसान किसान 91269 का मोह नहीं छोड़ पाए हैं।
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ये हैं किसानों के मोह की वजह
91269 प्रजाति का गन्ना वजन में भारी होने के साथ ज्यादा कठोर होता है। इसे न तो जानवर पसंद करते हैं और न ही गन्ना खाने वाले ग्रामीण। ऐसे में किसान इस प्रजाति के गन्ने को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। हालांकि यह प्रजाति फरवरी के आखिर तक पूरी तरह से विकसित हो पाती है। तब तक तापमान बढ़ने से इसको तमाम बीमारियां घेर लेती हैं। इससे रिकवरी कम हो जाती है। रिकवरी कम होने से चीनी मिलों को नुकसान होता है।
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ये प्रजातियां हैं फायदेमंद
07250, 01434, 0238, 0239, 0118
गन्ना की 91269 प्रजाति फरवरी केअंत तक पूरी तरह से विकसित हो पाती है। अगर इससे पहले इस गन्ने की पेराई होती है तो रिकवरी कम रहती है। इसके अलावा फरवरी के तापमान में वृद्घि होने के साथ इस प्रजाति को बीमारियां घेर लेती हैं। बीमार गन्ने से भी रिकवरी कम मिलती है। -डॉ. एसपी सिंह, वैज्ञानिक, गन्ना शोध संस्थान