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मेडिकल कॉलेज में सैनिक की पत्नी को भर्ती न करने के मामले में बयान दर्ज
सार
डेंगू पीड़ित सैनिक की पत्नी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती न करने के मामले में जांच शुरू हो गई है।शुक्रवार को रुचि के तीमारदार संजीव के बयान ईएमओ डॉ. शिवानी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विमलेश ने दर्ज किए।संजीव ने डॉ. ज्ञानेंद्र पर अभद्रता का आरोप लगाया है।
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बयान दर्ज करतीं डॉ. शिवानी और डॉ. विमलेश। संवाद
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
बदायूं। डेंगू पीड़ित सैनिक की पत्नी को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती न करने के मामले में जांच शुरू हो गई है। शुक्रवार को ईएमओ डॉ. शिवानी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विमलेश ने इस मामले में तीमारदार के बयान दर्ज किए। बयान की वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई है।
शहर की मोती विहार कॉलोनी निवासी कृष्णपाल सिंह भारतीय सेना में सैनिक हैं। उनकी तैनाती पठानकोट में पाकिस्तान सीमा पर है। यहां घर पर उनकी पत्नी रुचि परिवार के साथ रहती हैं। रुचि को डेंगू हो गया था। वह अपने मामा संजीव और परिवार के लोगों के साथ 29 सितंबर को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंची थीं।
उस दिन इमरजेंसी में बतौर ईएमओ डॉ. ज्ञानेंद्र यादव तैनात थे। आरोप है कि डॉ. ज्ञानेंद्र ने रुचि को भर्ती करने से इन्कार कर दिया और अभद्रता भी की। मेडिकल कॉलेज में ही रुचि को डेंगू की पुष्टि भी हुई। बाद में परिवार के लोगों ने रुचि को बरेली में भर्ती कराया था।
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मामले में डॉ. ज्ञानेंद्र यादव की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में की गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को जांच का आदेश दिया। अब मामले में जांच शुरू हो गई है। शुक्रवार को रुचि के तीमारदार संजीव के बयान ईएमओ डॉ. शिवानी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विमलेश ने दर्ज किए।
संजीव ने डॉ. ज्ञानेंद्र पर अभद्रता का आरोप लगाया है। डॉ. विमलेश ने बताया कि मरीज के तीमारदारों को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। शनिवार को मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सीपी सिंह मामले में बयान दर्ज करेंगे।
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शहर की मोती विहार कॉलोनी निवासी कृष्णपाल सिंह भारतीय सेना में सैनिक हैं। उनकी तैनाती पठानकोट में पाकिस्तान सीमा पर है। यहां घर पर उनकी पत्नी रुचि परिवार के साथ रहती हैं। रुचि को डेंगू हो गया था। वह अपने मामा संजीव और परिवार के लोगों के साथ 29 सितंबर को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंची थीं।
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उस दिन इमरजेंसी में बतौर ईएमओ डॉ. ज्ञानेंद्र यादव तैनात थे। आरोप है कि डॉ. ज्ञानेंद्र ने रुचि को भर्ती करने से इन्कार कर दिया और अभद्रता भी की। मेडिकल कॉलेज में ही रुचि को डेंगू की पुष्टि भी हुई। बाद में परिवार के लोगों ने रुचि को बरेली में भर्ती कराया था।
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मामले में डॉ. ज्ञानेंद्र यादव की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में की गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को जांच का आदेश दिया। अब मामले में जांच शुरू हो गई है। शुक्रवार को रुचि के तीमारदार संजीव के बयान ईएमओ डॉ. शिवानी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विमलेश ने दर्ज किए।
संजीव ने डॉ. ज्ञानेंद्र पर अभद्रता का आरोप लगाया है। डॉ. विमलेश ने बताया कि मरीज के तीमारदारों को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। शनिवार को मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सीपी सिंह मामले में बयान दर्ज करेंगे।