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किसी ने पिता खोया किसी ने बेटा, कहीं बेटा-बेटी बढ़ा रहे पिता का मान

Sun, 20 Jun 2021 05:30 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jun 2021 05:30 PM IST
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Somebody lost the father, somebody lost the son, somewhere the son and daughter are increasing the respect of the father
बदायूं। रविवार को फादर्स डे मनाया जाएगा। बेटियां हों या बेटे, जब वे अपने पिता के सपनों को पूरा करते हैं तो पिता को संतुष्टि मिली है। इस बार कोरोना काल के दौरान कई ऐसे बेटे और बेटियां भी हैं जिन्होंने अपने पिता को खो दिया। उनको अपने पिता की कमी खलती है। व्यापार का क्षेत्र हो या फिर कोई अन्य पेशा, खेल का मैदान हो या फिर आईएएस-आईपीएस जैसी शीर्ष प्रशासनिक सेवाएं जिले में कई ऐसी होनहार संतानें भी हैं जो लोगों को प्रेरणा देती हैं।
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प्रख्यात कवि उर्मिलेश की परंपरा को आगे बढ़ा रहे पुत्र-पुत्री
- जिले से ताल्लुक रखने वाले राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश शंखधार का कई साल पहले स्वर्गवास हो चुका है। उनके पुत्र डॉ. अक्षत अशेष व बेटी डॉ. सोनरूपा विशाल पिता की गीत परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. अक्षत एसएनएनएम दास पीजी कॉलेज में कार्यरत हैं और बदायूं क्लब जैसी पुरानी संस्था के कई वर्ष से सचिव भी हैं। वह कई प्रदेशों में सम्मानित हो चुके हैं और गीतकार के तौर पर पिता की तरह पहचान कायम कर चुके हैं। उनकी बहन सोनरूपा भी देश के बड़े मंचों पर कविता व गजल पढ़ती हैं। पिता की रचनाओं को स्वर देने का काम भी भाई बहन बखूबी कर रहे हैं तो नए गीत गजल के लिए भी पहचान बना रहे हैं। दोनों का कहना है कि पिता जितनी ख्याति बनाना मुश्किल काम है पर वह प्रयास करते हैं कि गीतों से समाज को कुछ नया दे सके।
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नहीं भूलेेंगे पिता को खोने का दर्द
- शहर निवासी रूपेंद्र सिंह लामा ने इस कोरोना काल में अपने पिता सरबंत सिंह लामा को खो दिया। उनका कहना है कि पिता को खोने का दर्द वह कभी नहीं भूल सकेंगे। मैकूलाल रेलवे क्रॉसिंग के पास रहने वाले व्यापारी रूपेंद्र सिंह का कहना है कि पिता की प्रेरणा से ही वह आज एक सफल व्यापारी और कारोबारी हैं। फादर्स डे पह वह अपने पिता की कमी को महसूस कर रहे हैं।
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हमेशा खलेगी पिता की कमी
- उद्योगपति अनमोल गुप्ता और अनुपम गुप्ता जिम्मी भी अपने पिता रमेश चंद्र गुप्ता की कमी महसूस करते हैं। कोराना काल में करीब छह माह पहले रमेश चंद्र गुप्ता का निधन हो गया था। अनुपम गुप्ता का कहना है कि पिता की प्रेरणा से ही वह आज यहां तक पहुंचे हैं। जीवन में पिता को खोने का दर्द कभी खत्म नहीं होता।
पिता से प्रेरणा लेकर किया एमबीबीएस
- कस्बा अलापुर निवासी डॉ. आजाद अंसारी का सपना था कि उनका बेटा अमन आजाद भी डॉक्टर बने। बदायूं से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा के बाद अमन आजाद ने आगे की शिक्षा मेरठ में ली। पिता से प्रेरणा लेकर वह आगे बढ़े और एमबीबीएस कर डॉक्टर बने। अमन का कहना है कि अगर पिता का हाथ सिर पर हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऋषिका ने बढ़ाया पिता का मान
शहर में स्टेशन रोड स्थित गणेश बिहार निवासी प्रमोद कुमार गुप्ता की बेटी ऋषिका गुप्ता ने पिता से प्रेरणा लेकर पिता के साथ जिले का नाम भी अंतर राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। ऋतिका अमेरिका, इंडोनेशिया, कनाडा में हुई कई अंतर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल झटक चुकी हैं। हाल ही में स्पेन में हुई अमेरिकन फुटबॉल प्रतियोगिता में भी ऋषिका हिस्सा ले चुकी हैं। पोस्ट ग्रेजुएट कर चुकीं ऋषिका योगा की पढ़ाई भी कर रही हैं। अमेरिकन फुटबाल के अलावा ऋषिका को इंडोनेशियाई मार्शल आर्ट और ताइक्वांडो में भी महारत हासिल है। ताइक्वांडो में ऋषिका ऑल इंडिया गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं। ऋषिका का कहना है कि वह पिता से मिली प्रेरणा से ही यहां तक पहुंची हैं।
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जालंधरी सराय निवासी जाकिरा नुसरत का कहना है कि पिता से प्रेरणा लेकर ही वह कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ रही हैं। डॉ. नुसरत हुसैन की बेटी जाकिरा नुुसरत बरेली कॉलेज बरेली की गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामियां यूनिवर्सिटी से वह बीएड कर रही हैं। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकीं जाकिरा का कहना है कि सिर्फ बेटे ही नहीं बेटियां भी पिता का नाम रोशन करती हैं।
आईएएस बेटी पर है पिता को नाज
- शहर में नेकपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास रहने वाले सेवानिवृत्त संस्कृत शिक्षक जगन्नाथ प्रसाद शास्त्री को जहां अपनी बेटी प्रतिभा पाल पर नाज है वहीं आईएएस अधिकारी प्रतिभा पाल भी अपने पिता का सपना पूरा करने के बाद काफी खुश हैं। करीब आठ साल पहले जब प्रतिभा पाल ने संघ लोक सेवा आयोग की शीर्ष प्रशासनिक सेवा आईएएस उत्तीर्ण की तो उनके पिता का सीना चौड़ा हो गया। प्रतिभा पाल का कहना है कि यह पिता की प्रेरणा से ही संभव हो सका।
कोरोना काल में पिता को खोया
- शहर के रहने वाले राकेश गुप्ता और वीरेश गुप्ता ने कोरोना काल में अपने पिता को खो दिया। दवा व्यापारी वीरेश गुप्ता का कहना है कि जब तक पिता का साया सिर पर रहता है तब तक कोई मंजिल मुश्किल नहीं लगती। राकेश गुप्ता का कहना है कि पिता को खोने का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस फादर्स डे पर वह अपने पिता की कमी महसूस करेंगे।
फौजी ने बेटे-बेटी की याद में बाग लगाया
कुंवरगांव निवासी श्रीपाल सेना से रिटायर हैं। 58 साल के श्रीपाल सिपाही पद से भर्ती होकर नायक पद से रिटायर हुए और कश्मीर समेत कई दुर्गम स्थानों पर सेना को सेवाएं दीं। उनके 22 साल के बेटे अमर सिंह और 18 साल की बेटी पूजा की करीब दस साल पहले मौत हो गई। इसके बाद अपने परिवार के साथ ही अमर सिंह की पत्नी व दो साल के नाती सूरज की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई। अब सूरज करीब 12 साल का है। श्रीपाल ने पुत्र व पुत्री की याद में एक बाग लगाया है जिसमें फलदार पेड़ लहलहा रहे हैं। कहते हैं कि सूरज को पढ़ा लिखाकर सेना में भर्ती कराएंगे। यही उनके पुत्र के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

किराना व्यापारी की बेटियों ने किया नाम रोशन
- कुंवरगांव के किराना व्यापारी महेश चंद्र गुप्ता अपनी तीन बेटियों को सफलता की सीढ़ियां चढ़ाकर बेहद खुश हैं। उनकी बेटी मनीषा गुप्ता लखनऊ की एक बैंक में प्रबंधक हैं। छोटी दिव्या गुप्ता सॉफ्टवेयर इजीनियर हैं तो उनसे छोटी निमिषा बीएड की छात्रा हैं। सबसे छोटा बेटा दीपांशु केमिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कर रहे हैं। छोटे कस्बे में मेहनत से दुकान चलाकर पूरे परिवार को कामयाब बनाने वाले महेश गुप्ता का भी इलाके भर में सम्मान है। वह खुद कहते हैं कि उनकी बेटियां किसी तरह बेटों से कम नहीं हैं।
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