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डेंगू और बुखार के बाद अब चिकनगुनिया से मौत
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2016 11:59 PM IST
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डेंगू और बुखार के बाद अब चिकनगुनिया से मौत
- फोटो : अमर उजाला
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ककराला के वार्ड नंबर तीन में महिला ने दम तोड़ा
बुखार और डेंगू अब तक निगल चुके हैं 50 जिंदगियां
जिले में बुखार और डेंगू के बाद अब चिकनगुनिया से मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया है। अलापुर के वार्ड नगर तीन में रविवार को चिकनगुनिया पीड़ित बानो नाम की बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। दर्जनों लोग इससे पीड़ित हैं। देहात इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं किसी से छिपी हुई नहीं हैं। ऐसे में बीमार लोगों को निजी डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल भी फुल हो चुका है।
जिले में अगस्त के पहले सप्ताह में संक्रामक बुखार का प्रकोप शुरू हुआ था। धीरे-धीरे की कादरचौक, जगत, म्याऊं ब्लाक के साथ बुखार ने सालारपुर ब्लाक को भी चपेट में ले लिया। डेढ़ महीने में बुखार और डेंगू से मरने वालों की संख्या 50 के पार हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के साथ नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों ने संक्रामक बुखार की गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते स्थिति ज्यादा खराब होने लगी है।
ककराला के वार्ड नंबर तीन निवासी अफसर अली की बेवा बानो बेगम (68) की शनिवार को चिकनगुनिया से मौत हो गई। बानो को करीब 10 दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले निजी डॉक्टर से इलाज करा रहे थे। निजी डॉक्टर ने उनको चिकनुनिया की पुष्टि की थी। कस्बा समेत आस-पास के गांवों में करीब 20 लोग चिकनगुनिया की चपेट में हैं। बुखार और डेंगू से मौतों के बाद चिकनगुनिया से मौतों के चलते लोगों में दहशत है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर भी लोगों में रोष बना हुआ है।
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तीन सौ बेड के जिला अस्पताल में 700 मरीज
बदायूं। संक्रामक रोगों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 300 बेड के जिला अस्पताल में इस समय करीब 700 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें सबसे ज्यादा बुखार पीड़ित हैं। स्थिति यह है कि एक बेड पर तीन-तीन मरीजों को रखा गया है। मलेरिया और डेंगू वार्ड अलग से बनाए गए हैं। यह भी फुल हो चुके हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के भी हाथ-पांव फूले हुए नजर आ रहे हैं।
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सबसे ज्यादा मरीज मिले मलेरिया के
बदायूं। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में डेड़ महीने में सबसे ज्यादा मलेरिया के करीब 680 मरीज मिल चुके हैं। मलेरिया विभाग ने अब तक 6020 स्लाइड की जांच की है। इनमें 680 लोगों में मलेरिया पॉजीटिव पाया गया। गौर करने वाली बात है कि यह आंकड़े सरकारी हैं। इनमें निजी डॉक्टर के यहां जांच और इलाज कराने वालों की संख्या शामिल नहीं है।
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सरकारी रिकार्ड में डेंगू के सिर्फ तीन मामले
बदायूं। डेढ़ महीने के दौरान जिले में डेंगू से सात लोगों की मौत हो चुकी है। इन सभी को निजी डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि की थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अब तक जिले में डेंगू के सिर्फ तीन मरीज मिले हैं। संक्रामक रोग नियंत्रण सेल के रिकार्ड पर गौर करें तो स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।
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गांवों में गंदगी-जल भराव पर कोई ध्यान नहीं
बदायूं। जिले में संक्रामक रोग फैलने की एक वजह गंदगी भी है। पंचायती राज विभाग की ओर से गांवों में साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों को रख गया है। इसके बावजूद तमाम गांवों में जल भराव और गंदगी का साम्राज्य है। सफाई अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग भी कई बार जिला पंचायत राज विभाग विभाग को लिख चुका है। इसके बाद भी गांवों में सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है।
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अलग-अलग हेल्थ कैंप में देखे 1344 मरीज
बदायूं। संक्रामक रोग नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता के निर्देशन में अलापुर, ककराला, सालारपुर और कादरचौक में लगाए गए हेल्थ कैंप में 1344 मरीज देखे गए। ककराला में लगे हेल्थ कैंप में 782 और अलापुर में 562 मरीज देखे गए। 46 स्लाइड भी बनाई गईं। इस मौके पर डॉ. कमर इकबाल, डॉ. महेंद्र भान, डॉ. मनोज और डॉ. नीरज रहे। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मरीजों को दवाइयां भी दी गईं।
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स्वास्थ्य विभाग और संक्रामक रोग नियंत्रण सेल की 15 टीमें जिले में काम कर रही हैं। स्थिति नियंत्रण में है। मलेरिया और डेंगू फैलने की एक वजह गांवों में गंदगी का होना भी है। इसके बावजूद गांवों में सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही। चिकनगुनिया से मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसको दिखवाया जाएगा।
-डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ
बुखार और डेंगू अब तक निगल चुके हैं 50 जिंदगियां
जिले में बुखार और डेंगू के बाद अब चिकनगुनिया से मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया है। अलापुर के वार्ड नगर तीन में रविवार को चिकनगुनिया पीड़ित बानो नाम की बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। दर्जनों लोग इससे पीड़ित हैं। देहात इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं किसी से छिपी हुई नहीं हैं। ऐसे में बीमार लोगों को निजी डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल भी फुल हो चुका है।
जिले में अगस्त के पहले सप्ताह में संक्रामक बुखार का प्रकोप शुरू हुआ था। धीरे-धीरे की कादरचौक, जगत, म्याऊं ब्लाक के साथ बुखार ने सालारपुर ब्लाक को भी चपेट में ले लिया। डेढ़ महीने में बुखार और डेंगू से मरने वालों की संख्या 50 के पार हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के साथ नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों ने संक्रामक बुखार की गंभीरता से नहीं लिया। इसके चलते स्थिति ज्यादा खराब होने लगी है।
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ककराला के वार्ड नंबर तीन निवासी अफसर अली की बेवा बानो बेगम (68) की शनिवार को चिकनगुनिया से मौत हो गई। बानो को करीब 10 दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले निजी डॉक्टर से इलाज करा रहे थे। निजी डॉक्टर ने उनको चिकनुनिया की पुष्टि की थी। कस्बा समेत आस-पास के गांवों में करीब 20 लोग चिकनगुनिया की चपेट में हैं। बुखार और डेंगू से मौतों के बाद चिकनगुनिया से मौतों के चलते लोगों में दहशत है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को लेकर भी लोगों में रोष बना हुआ है।
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तीन सौ बेड के जिला अस्पताल में 700 मरीज
बदायूं। संक्रामक रोगों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 300 बेड के जिला अस्पताल में इस समय करीब 700 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें सबसे ज्यादा बुखार पीड़ित हैं। स्थिति यह है कि एक बेड पर तीन-तीन मरीजों को रखा गया है। मलेरिया और डेंगू वार्ड अलग से बनाए गए हैं। यह भी फुल हो चुके हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के भी हाथ-पांव फूले हुए नजर आ रहे हैं।
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सबसे ज्यादा मरीज मिले मलेरिया के
बदायूं। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में डेड़ महीने में सबसे ज्यादा मलेरिया के करीब 680 मरीज मिल चुके हैं। मलेरिया विभाग ने अब तक 6020 स्लाइड की जांच की है। इनमें 680 लोगों में मलेरिया पॉजीटिव पाया गया। गौर करने वाली बात है कि यह आंकड़े सरकारी हैं। इनमें निजी डॉक्टर के यहां जांच और इलाज कराने वालों की संख्या शामिल नहीं है।
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सरकारी रिकार्ड में डेंगू के सिर्फ तीन मामले
बदायूं। डेढ़ महीने के दौरान जिले में डेंगू से सात लोगों की मौत हो चुकी है। इन सभी को निजी डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि की थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अब तक जिले में डेंगू के सिर्फ तीन मरीज मिले हैं। संक्रामक रोग नियंत्रण सेल के रिकार्ड पर गौर करें तो स्थिति पूरी तरह से सामान्य है।
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गांवों में गंदगी-जल भराव पर कोई ध्यान नहीं
बदायूं। जिले में संक्रामक रोग फैलने की एक वजह गंदगी भी है। पंचायती राज विभाग की ओर से गांवों में साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों को रख गया है। इसके बावजूद तमाम गांवों में जल भराव और गंदगी का साम्राज्य है। सफाई अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग भी कई बार जिला पंचायत राज विभाग विभाग को लिख चुका है। इसके बाद भी गांवों में सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है।
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अलग-अलग हेल्थ कैंप में देखे 1344 मरीज
बदायूं। संक्रामक रोग नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता के निर्देशन में अलापुर, ककराला, सालारपुर और कादरचौक में लगाए गए हेल्थ कैंप में 1344 मरीज देखे गए। ककराला में लगे हेल्थ कैंप में 782 और अलापुर में 562 मरीज देखे गए। 46 स्लाइड भी बनाई गईं। इस मौके पर डॉ. कमर इकबाल, डॉ. महेंद्र भान, डॉ. मनोज और डॉ. नीरज रहे। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मरीजों को दवाइयां भी दी गईं।
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स्वास्थ्य विभाग और संक्रामक रोग नियंत्रण सेल की 15 टीमें जिले में काम कर रही हैं। स्थिति नियंत्रण में है। मलेरिया और डेंगू फैलने की एक वजह गांवों में गंदगी का होना भी है। इसके बावजूद गांवों में सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही। चिकनगुनिया से मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसको दिखवाया जाएगा।
-डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ