{"_id":"66b7cdfbdc40c34d7e0d24b6","slug":"shravan-kumar-becomes-four-sonswill-perform-jalabhishek-in-patna-devkali-temple-badaun-news-c-123-1-sbly1035-123955-2024-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: श्रवण कुमार बने चार बेटे... पटना देवकली के मंदिर में करेंगे जलाभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: श्रवण कुमार बने चार बेटे... पटना देवकली के मंदिर में करेंगे जलाभिषेक
Sun, 11 Aug 2024 02:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sun, 11 Aug 2024 02:00 AM IST
विज्ञापन
उझानी। अलापुर के गांव गुढाना के बुजुर्ग कल्लू और रामस्नेही के चारों बेटे उनके लिए श्रवण कुमार से कम नहीं हैं। बेटे उन्हें लेकर तड़के गंगाघाट पर पहुंचे। श्रद्धापूर्वक उन्हें गंगा स्नान कराया। उनकी पूजा- अर्चना की और कांवड़ में बैठाकर निकल पड़े शिव मंदिर की ओर। वह अपने बुजुर्ग माता- पिता के साथ पटना देवकली के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।
कछला गंगाघाट से पटना देवकली के शिव मंदिर की ओर माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर निकले उनके चारों बेटे राजपाल, द्वारिका प्रसाद, धर्म सिंह और सुभाषचंद्र रास्ते में काफी खुश दिखे। रास्ते में शिवभक्तों ने भी माता- पिता के प्रति चारों बेटे की आस्था की तारीफ की। बेटों में धर्म सिंह और सुभाष बोले- मां-बाप ही उनके भगवान हैं।
संस्कार भी इन्हीं से मिले हैं तो सेवा में कमी कैसे छोड़ेंगे। राजपाल ने बताया कि बुजुर्ग माता- पिता की पैदल ही कांवड़ यात्रा पूरी करने की इच्छा रही, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर वह उन्हें पैदल कैसे जाने देते, सो चारों भाइयों ने तय कर लिया कि सावन महीना के चौथे सोमवार को वह उन्हें कांवड़ में बैठाकर माता- पिता के प्रति अपने पुत्रधर्म को पूरा करेंगे।
विज्ञापन
बुजुर्ग दंपती के श्रवण कुमार बेटों के साथ उनकी पत्नियां और नातियों के साथ कुछेक रिश्तेदार भी कांवड़ यात्रा के साक्षी बनने को साथ चल रहे हैं। नाती राहुल, सोहित, मोहित और अभि भी अपने बाबा- दादी की सेवा में साथ हैं। राहगीरों में जिरौली निवासी संजीव कुमार ने बताया कि ऐसा बहुत कम ही नजर आता है। आसान भी नहीं होता कि कोई इस तरह बैठाकर करीब 80 किलोमीटर तक आस्था का सफर पूरा कर पाए। लोग यह कहते हुए भी आगे बढ़ गए कि धन्य है ऐसे माता- पिता, जिन्हें श्रवण कुमार सरीखे बेटे मिले हैं।
विज्ञापन
कछला गंगाघाट से पटना देवकली के शिव मंदिर की ओर माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर निकले उनके चारों बेटे राजपाल, द्वारिका प्रसाद, धर्म सिंह और सुभाषचंद्र रास्ते में काफी खुश दिखे। रास्ते में शिवभक्तों ने भी माता- पिता के प्रति चारों बेटे की आस्था की तारीफ की। बेटों में धर्म सिंह और सुभाष बोले- मां-बाप ही उनके भगवान हैं।
विज्ञापन
संस्कार भी इन्हीं से मिले हैं तो सेवा में कमी कैसे छोड़ेंगे। राजपाल ने बताया कि बुजुर्ग माता- पिता की पैदल ही कांवड़ यात्रा पूरी करने की इच्छा रही, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर वह उन्हें पैदल कैसे जाने देते, सो चारों भाइयों ने तय कर लिया कि सावन महीना के चौथे सोमवार को वह उन्हें कांवड़ में बैठाकर माता- पिता के प्रति अपने पुत्रधर्म को पूरा करेंगे।
विज्ञापन
बुजुर्ग दंपती के श्रवण कुमार बेटों के साथ उनकी पत्नियां और नातियों के साथ कुछेक रिश्तेदार भी कांवड़ यात्रा के साक्षी बनने को साथ चल रहे हैं। नाती राहुल, सोहित, मोहित और अभि भी अपने बाबा- दादी की सेवा में साथ हैं। राहगीरों में जिरौली निवासी संजीव कुमार ने बताया कि ऐसा बहुत कम ही नजर आता है। आसान भी नहीं होता कि कोई इस तरह बैठाकर करीब 80 किलोमीटर तक आस्था का सफर पूरा कर पाए। लोग यह कहते हुए भी आगे बढ़ गए कि धन्य है ऐसे माता- पिता, जिन्हें श्रवण कुमार सरीखे बेटे मिले हैं।