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Budaun News: शिवपाल यादव आज बदायूं में
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बदायूं। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव बृहस्पतिवार को बदायूं लोकसभा क्षेत्र में अपने चुनावी अभियान का शुभारंभ करेंगे। बदायूं के श्रीबालाजी धाम में माथा टेकेंगे फिर बड़े सरकार की दरगाह पर हाजिरी लगाकर चादरपोशी करेंगे।
शिवपाल सिंह यादव अपने तीन दिनों के इस दौरे में 40 स्थानों पर छोटी-बड़ी सभाएं करेंगे। 14 मार्च को वह सैफई से चलेंगे और मैनपुरी, कुरावली, एटा, कासगंज होते हु कचला से जनपद की सीमा में प्रवेश करेंगे। पहले ही दिन उनका जगह- जगह स्वागत किया जाएगा। बदायूं में प्रवेश करने से पहले वह मंदिर और दरगाह में जाएंगे। अगले दिन 15 मार्च को सहसवान तथा 16 मार्च को गु्न्नौर क्षेत्र में रहेंगे।
धीमी पड़ने लगी प्रत्याशी बदलने की चर्चा
बदायूं। टिकट घोषित होने के 20 दिन बाद भी लोकसभा क्षेत्र में नहीं पहुंचने के कारण जिले के सियासी हलके ही नहीं बल्कि पार्टी में भी उम्मीदवारी में बदलाव की चर्चाएं होने लगी थीं। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का नाम उछलने लगा था। साथ ही शिवपाल यादव के खुद विधान सभा की राजनीति में सक्रिय रहने की इच्छा जाहिर करने के साथ सांसदी की सियासत में बेटे को उतारने की बात होने लगी था। पार्टी सूत्रों पर यकीन करें तो चुनावी अभियान शुरू होने में देरी की मुख्य वजह यही रही। अलबत्ता इस बारे में अधिकृत पर नेताओं ने कोई टिप्पणी नहीं की।
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शिवपाल सिंह यादव अपने तीन दिनों के इस दौरे में 40 स्थानों पर छोटी-बड़ी सभाएं करेंगे। 14 मार्च को वह सैफई से चलेंगे और मैनपुरी, कुरावली, एटा, कासगंज होते हु कचला से जनपद की सीमा में प्रवेश करेंगे। पहले ही दिन उनका जगह- जगह स्वागत किया जाएगा। बदायूं में प्रवेश करने से पहले वह मंदिर और दरगाह में जाएंगे। अगले दिन 15 मार्च को सहसवान तथा 16 मार्च को गु्न्नौर क्षेत्र में रहेंगे।
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धीमी पड़ने लगी प्रत्याशी बदलने की चर्चा
बदायूं। टिकट घोषित होने के 20 दिन बाद भी लोकसभा क्षेत्र में नहीं पहुंचने के कारण जिले के सियासी हलके ही नहीं बल्कि पार्टी में भी उम्मीदवारी में बदलाव की चर्चाएं होने लगी थीं। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव का नाम उछलने लगा था। साथ ही शिवपाल यादव के खुद विधान सभा की राजनीति में सक्रिय रहने की इच्छा जाहिर करने के साथ सांसदी की सियासत में बेटे को उतारने की बात होने लगी था। पार्टी सूत्रों पर यकीन करें तो चुनावी अभियान शुरू होने में देरी की मुख्य वजह यही रही। अलबत्ता इस बारे में अधिकृत पर नेताओं ने कोई टिप्पणी नहीं की।
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