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कब्रिस्तानों में रोशनी, इबादत की
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बदायूं। शुक्रवार को होली के साथ ही मुस्लिम धर्म का पर्व शब ए बरात भी था। इस दिन लोग कुरान ख्वानी के साथ ही बुजुर्गों को याद करते हैं। इस लिहाज से बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तानों में जुटे, वहां रोशनी की गई। साथ ही कब्रों पर गुलपोशी व चिरागा किया गया। बच्चों ने भी इबादत में हिस्सा लिया।
शब-ए-बरात मुसलमान समुदाय के लिए इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी जाती है. इसीलिए तमाम मुस्लिम समुदाय के लोग इस रात नमाज और कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगते हैं।
वैसे तो साल के सभी दिन रात समान हैं, लेकिन इस्लाम में पांच रातें ज्यादा अहम मानी जाती हैं। इनमें ईद की रात, बकरीद की रात, मेअराज की रात, रमजान में शबे कद्र और पांचवीं रात शब-ए-बरात है। बुजुर्ग कहते हैं कि इस रात को की जाने वाली हर जायज दुआ को अल्लाह जरूर कुबूल करते हैं। इस पूरी रात लोगों पर अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। इसीलिए मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर जागकर नमाज और कुरान पढ़ते हैं। बल्कि अपने उन बुजुर्गों की मगफिरत के लिए भी दुआ मांगते हैं जिनका निधन हो चुका होता है। यही वजह है कि लोग इस मौके पर कब्रिस्तान भी जाते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग शब-ए-ारात के अगले दिन रोजा रखते हैं। शुक्रवार को शहर के प्रमुख कब्रिस्तानों में रोशनी की गई। चौधरी फैजान, अशरफ राइन,अब्दुल समद, असद आदि कई लोगों ने एसके इंटर कॉलेज के सामने कब्रिस्तान पर इबादत की। बच्चे भी यहां गुलपोशी व दुआ करने पहुंचे। संवाद
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शब-ए-बरात मुसलमान समुदाय के लिए इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी जाती है. इसीलिए तमाम मुस्लिम समुदाय के लोग इस रात नमाज और कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगते हैं।
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वैसे तो साल के सभी दिन रात समान हैं, लेकिन इस्लाम में पांच रातें ज्यादा अहम मानी जाती हैं। इनमें ईद की रात, बकरीद की रात, मेअराज की रात, रमजान में शबे कद्र और पांचवीं रात शब-ए-बरात है। बुजुर्ग कहते हैं कि इस रात को की जाने वाली हर जायज दुआ को अल्लाह जरूर कुबूल करते हैं। इस पूरी रात लोगों पर अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। इसीलिए मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर जागकर नमाज और कुरान पढ़ते हैं। बल्कि अपने उन बुजुर्गों की मगफिरत के लिए भी दुआ मांगते हैं जिनका निधन हो चुका होता है। यही वजह है कि लोग इस मौके पर कब्रिस्तान भी जाते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग शब-ए-ारात के अगले दिन रोजा रखते हैं। शुक्रवार को शहर के प्रमुख कब्रिस्तानों में रोशनी की गई। चौधरी फैजान, अशरफ राइन,अब्दुल समद, असद आदि कई लोगों ने एसके इंटर कॉलेज के सामने कब्रिस्तान पर इबादत की। बच्चे भी यहां गुलपोशी व दुआ करने पहुंचे। संवाद
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