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जेल का अधिकारी बनकर बंदी के रिश्तेदारों से सात हजार ठगे
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बदायूं। जिले में सक्रिय ठगों ने जेल के बंदियों के परिवार वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एक बंदी के रिश्तेदारों से सात हजार रुपये ठग लिए गए। उन्हें बताया कि बंदी ने भागने की कोशिश की थी, जिससे वह घायल हो गया है। उसका इलाज कराने के नाम पर सात हजार रुपये अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। अभी इसकी तहरीर नहीं दी गई है।
बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव परसिया निवासी नीरज जानलेवा हमले के मामले में जेल में है। बताते हैं कि शुक्रवार को उघैती के स्वरूपपुर निवासी उसके बहन-बहनोई के मोबाइल पर एक कॉल गई थी। कॉल करने वाले ने बताया कि नीरज जेल से भागने की कोशिश कर रहा था। वह दूसरी मंजिल पर चढ़ गया था। इस कोशिश में वह छत से गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया है। उसका ऑपरेशन चल रहा है। जल्दी अकाउंट में सात हजार रुपये ट्रांसफर कर दो, जिससे नीरज का उपचार कराया जा सके। उसके बहन-बहनोई ने सात हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
इसके साथ ही वह तुरंत गांव से आए। जब जेल पहुंचे तो पता चला कि कोई ऐसा मामला नहीं हुआ। जेलर रणंजय सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिन से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। दो दिन पहले जेल के बंदी सतीश और अर्जुन के परिवार वालों को भी कॉल की गई थी। हालांकि उनके परिवार वालों ने रुपये ट्रांसफर करने से पहले अपने वकीलों को कॉल करके इसकी जानकारी ले ली। इससे वह ठगी होने से बच गए। जेलर ने बताया कि उन्होंने ऐसी घटनाओं के संबंध में पुलिस और न्यायालय को सूचना दे दी है।
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बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव परसिया निवासी नीरज जानलेवा हमले के मामले में जेल में है। बताते हैं कि शुक्रवार को उघैती के स्वरूपपुर निवासी उसके बहन-बहनोई के मोबाइल पर एक कॉल गई थी। कॉल करने वाले ने बताया कि नीरज जेल से भागने की कोशिश कर रहा था। वह दूसरी मंजिल पर चढ़ गया था। इस कोशिश में वह छत से गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया है। उसका ऑपरेशन चल रहा है। जल्दी अकाउंट में सात हजार रुपये ट्रांसफर कर दो, जिससे नीरज का उपचार कराया जा सके। उसके बहन-बहनोई ने सात हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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इसके साथ ही वह तुरंत गांव से आए। जब जेल पहुंचे तो पता चला कि कोई ऐसा मामला नहीं हुआ। जेलर रणंजय सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिन से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। दो दिन पहले जेल के बंदी सतीश और अर्जुन के परिवार वालों को भी कॉल की गई थी। हालांकि उनके परिवार वालों ने रुपये ट्रांसफर करने से पहले अपने वकीलों को कॉल करके इसकी जानकारी ले ली। इससे वह ठगी होने से बच गए। जेलर ने बताया कि उन्होंने ऐसी घटनाओं के संबंध में पुलिस और न्यायालय को सूचना दे दी है।
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