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मिलावटी दूध बेचने के आरोपी को कैद, जुर्माना
बदायूं
Updated Wed, 12 Aug 2015 08:47 PM IST
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न्यायालय एसीजेएम द्वितीय मोहम्मद असलम सिद्दीकी ने दूध में मिलावट करके बेचने के आरोपी को दो वर्ष की कैद सहित पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगेगा।
मामला थाना उझानी क्षेत्र का है। 12 जनवरी 1999 को खाद्य निरीक्षक एके सिंह ने दिन में दस बजे आरोपी किशन पाल पुत्र रामदयाल निवासी बरसुआ थाना उझानी को मिलावटी दूध जनता को बेचते हुए पकड़ा था। उनकी साइकिल में लटके हुए एक डिब्बे में बीस किलो दूध था। उसको खाद्य निरीक्षक ने रोककर अपना परिचय दिया और उससे किस्म पता की तो उसने बताया कि भैंस का दूध है। निरीक्षण पर संदेह होने पर सरकारी जांच के लिए नमूना देने को कहा गया। जिसका नोटिस तैयार कर गवाहों के सामने प्रपत्र दो प्रतियों में तैयार किया। आरोपी किशनपाल ने सरकारी कागजों पर हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी लगाने से मना कर दिया। मौके पर गवाहों के सामने दूध खरीदकर तीन साफ शीशियों में सैंपल भरा गया। सैंपल की जांच के बाद दूध में मिलावट में निर्धारित मानकों से 25 फीसदी कम फैट पाया गया। आरोपी के विरुद्ध दूध में मिलावट करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया।
मजिस्ट्रेट श्री सिद्दीकी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आरोपी किशनपाल को दूध में मिलावट करने का दोषी पाकर दो वर्ष की कैद सहित पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामला थाना उझानी क्षेत्र का है। 12 जनवरी 1999 को खाद्य निरीक्षक एके सिंह ने दिन में दस बजे आरोपी किशन पाल पुत्र रामदयाल निवासी बरसुआ थाना उझानी को मिलावटी दूध जनता को बेचते हुए पकड़ा था। उनकी साइकिल में लटके हुए एक डिब्बे में बीस किलो दूध था। उसको खाद्य निरीक्षक ने रोककर अपना परिचय दिया और उससे किस्म पता की तो उसने बताया कि भैंस का दूध है। निरीक्षण पर संदेह होने पर सरकारी जांच के लिए नमूना देने को कहा गया। जिसका नोटिस तैयार कर गवाहों के सामने प्रपत्र दो प्रतियों में तैयार किया। आरोपी किशनपाल ने सरकारी कागजों पर हस्ताक्षर या अंगूठा निशानी लगाने से मना कर दिया। मौके पर गवाहों के सामने दूध खरीदकर तीन साफ शीशियों में सैंपल भरा गया। सैंपल की जांच के बाद दूध में मिलावट में निर्धारित मानकों से 25 फीसदी कम फैट पाया गया। आरोपी के विरुद्ध दूध में मिलावट करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया।
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मजिस्ट्रेट श्री सिद्दीकी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आरोपी किशनपाल को दूध में मिलावट करने का दोषी पाकर दो वर्ष की कैद सहित पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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