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Budaun News: माता-पिता के संघर्ष को सलाम, बेटियों को बनाया डॉक्टर
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बेटियों को कामयाब करने में संघर्ष करने वाले माता -पिता बाबू राम मौर्य व सरला मौर्य। संवाद
बदायूं। ऐसे माता-पिता के संघर्ष को सलाम है, जिन्होंने बेटियों को बोझ नहीं समझा और उन्हें अच्छी शिक्षा देकर डॉक्टर बनाया। एक बेटी बरेली में आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी है। दूसरी राजकीय मेडिकल कॉलेज झांसी में मेडिकल ऑफिसर है और तीसरी एमएससी बीएड करने के बाद पीएचडी कर रही है।
गांव फतेहपुर के रहने वाले बाबूराम मौर्य और सरला मौर्या किसानी करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद इन्होंने बेटियों को अच्छे संस्कार दिए। जो लोग बेटियों को बोझ समझते हैं, उनके लिए उन्होंने मिसाल पेश किया है। उनकी बड़ी बेटी डॉ. प्रगति मौर्य ने एमएससी बीएड करके नेट परीक्षा पास की। उन्होंने एमजेपी यूनिवर्सिटी बरेली से पीएचडी कर ली हैं।
दूसरी बेटी डॉ. शिवांगी मौर्य ने लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज से बीएएमएस की किया। अब वह बरेली के बहेड़ी में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी आदिति मौर्य मेडिकल कॉलेज झांसी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात हैंं। तीनों बेटियों के नाम के आगे डॉक्टर लगाने का संघर्ष तो उनके माता-पिता ही समझ सकते हैं। बेटियों को पढ़ाकर उन्होंने समाज के लिए वह नजीर बना दी है।
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गांव फतेहपुर के रहने वाले बाबूराम मौर्य और सरला मौर्या किसानी करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद इन्होंने बेटियों को अच्छे संस्कार दिए। जो लोग बेटियों को बोझ समझते हैं, उनके लिए उन्होंने मिसाल पेश किया है। उनकी बड़ी बेटी डॉ. प्रगति मौर्य ने एमएससी बीएड करके नेट परीक्षा पास की। उन्होंने एमजेपी यूनिवर्सिटी बरेली से पीएचडी कर ली हैं।
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दूसरी बेटी डॉ. शिवांगी मौर्य ने लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज से बीएएमएस की किया। अब वह बरेली के बहेड़ी में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी आदिति मौर्य मेडिकल कॉलेज झांसी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात हैंं। तीनों बेटियों के नाम के आगे डॉक्टर लगाने का संघर्ष तो उनके माता-पिता ही समझ सकते हैं। बेटियों को पढ़ाकर उन्होंने समाज के लिए वह नजीर बना दी है।

बेटियों को कामयाब करने में संघर्ष करने वाले माता -पिता बाबू राम मौर्य व सरला मौर्य। संवाद
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