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Budaun News: बाढ़ से सहसवान में सबसे ज्यादा तबाही, गंगा में बह गए 43 मकान
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बदायूं। गंगा व रामगंगा ने बाढ़ से तबाही मचाई हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान गंगा से सहसवान तहसील क्षेत्र के पक्के मकानों को हुआ है। गंगा में अब तक 43 पक्के मकान समा चुके हैं। इनमें सहसवान तहसील के सात गांवों के 27 और दातागंज तहसील क्षेत्र के गांव कदमनगला के 16 मकानों शामिल हैं। वहीं रामगंगा ने भी दातागंज तहसील के 28 गांवों में तबाही मचाई हुई है। बता दें कि जिला प्रशासन के सर्वे में 43 पक्के मकानों के नदी में समा जाने की पुष्टि होने के बाद इसकी रिपोर्ट आपदा पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। 16 मकान स्वामियों को क्षतिपूर्ति आवंटित कर दी गई है।
बाढ़ की तबाही में ग्रामीणों के मकानों काे भारी नुकसान होने के साथ उनकी रोजी-रोटी भी छिनी है। प्रशासन ने सहसवान और दातागंज तहसील क्षेत्र के 28 गांवों को बाढ़ से प्रभावित माना है। इन गांवों में प्रशासन ने लेखपालों के जरिए सर्वे कराया। प्रशासन को मिली रिपोर्ट के अनुसार, 688.582 हेक्टेयर फसलें और भूमि बाढ़ की भेंट चढ़ी हैं। फसलें व भूमि गंगा व रामगंगा में समा गईं। इससे हजारों की संख्या में किसान भूमिहीन हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, उसहैत क्षेत्र के कदमनगला गांव का अस्तित्व ही मिट चुका है। यहां पर पक्के 16 मकान गंगा में समाने के साथ स्कूल भी समा गया था।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि गंगा में आई बाढ़ में 43 पक्के मकान बहे हैं। इनकी सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद जिन ग्रामीणों के मकानों की क्षति हुई है, उन ग्रामीणों को भूमि पट्टा देने के साथ उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी दिया जाएगा।
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रिपोर्ट शासन को भेजने के बाद भूमि पट्टा आवंटित करने की अनुमति मांगी गई है। इसके साथ ही प्रत्येक ग्रामीण को मकान क्षति के रूप में 1.20 लाख रुपये भी दिए जाएंगे। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने बताया कि आठ पक्के मकान स्वामियों को 960000 रुपये बतौर क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। आठ झोंपड़ी स्वामियों को 64000 रुपये की सहायता आवंटित की जा चुकी है। अन्य के लिए बजट मांगा गया है।
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ये गांव हैं बाढ़ से प्रभावित
गंगा नदी से प्रभावित दातागंज तहसील के गांव जटा, खजुरा पुख्ता व कदमनगला और सहसवान तहसील के गांव तौफी नगला, भमरौलिया मजरा सिठौलिया खाम, खागी नगला मजरा सिठौलिया खाम, वीर सहाय नगला मजरा सिठौलिया खाम, गिरधारी नगला मजरा फाजिलपुर कुकरई, खिरकवारी मानपुर पुखता व जामनी हैं। वहीं रामगंगा नदी से सकतपुर, सिमरिया देंदू, गढ़ौला उर्फ जरतौली, मौजमपुर, हर्रापुर, गढि़या पैगंबरपुर, नवादा बदन, कुंडरा मजरा, शेरपुर, मोहशमपुर आनंदपुर, लालपुर खादर, पूरन भेड़ा, पट्टी बिजा खान, खानपुर पंचशाला, कटकौरा, नगरिया खनू, धमी पट्टी व रैपुरा प्रभावित हैं।
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बाढ़ की तबाही में ग्रामीणों के मकानों काे भारी नुकसान होने के साथ उनकी रोजी-रोटी भी छिनी है। प्रशासन ने सहसवान और दातागंज तहसील क्षेत्र के 28 गांवों को बाढ़ से प्रभावित माना है। इन गांवों में प्रशासन ने लेखपालों के जरिए सर्वे कराया। प्रशासन को मिली रिपोर्ट के अनुसार, 688.582 हेक्टेयर फसलें और भूमि बाढ़ की भेंट चढ़ी हैं। फसलें व भूमि गंगा व रामगंगा में समा गईं। इससे हजारों की संख्या में किसान भूमिहीन हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, उसहैत क्षेत्र के कदमनगला गांव का अस्तित्व ही मिट चुका है। यहां पर पक्के 16 मकान गंगा में समाने के साथ स्कूल भी समा गया था।
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि गंगा में आई बाढ़ में 43 पक्के मकान बहे हैं। इनकी सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद जिन ग्रामीणों के मकानों की क्षति हुई है, उन ग्रामीणों को भूमि पट्टा देने के साथ उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी दिया जाएगा।
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रिपोर्ट शासन को भेजने के बाद भूमि पट्टा आवंटित करने की अनुमति मांगी गई है। इसके साथ ही प्रत्येक ग्रामीण को मकान क्षति के रूप में 1.20 लाख रुपये भी दिए जाएंगे। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने बताया कि आठ पक्के मकान स्वामियों को 960000 रुपये बतौर क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। आठ झोंपड़ी स्वामियों को 64000 रुपये की सहायता आवंटित की जा चुकी है। अन्य के लिए बजट मांगा गया है।
ये गांव हैं बाढ़ से प्रभावित
गंगा नदी से प्रभावित दातागंज तहसील के गांव जटा, खजुरा पुख्ता व कदमनगला और सहसवान तहसील के गांव तौफी नगला, भमरौलिया मजरा सिठौलिया खाम, खागी नगला मजरा सिठौलिया खाम, वीर सहाय नगला मजरा सिठौलिया खाम, गिरधारी नगला मजरा फाजिलपुर कुकरई, खिरकवारी मानपुर पुखता व जामनी हैं। वहीं रामगंगा नदी से सकतपुर, सिमरिया देंदू, गढ़ौला उर्फ जरतौली, मौजमपुर, हर्रापुर, गढि़या पैगंबरपुर, नवादा बदन, कुंडरा मजरा, शेरपुर, मोहशमपुर आनंदपुर, लालपुर खादर, पूरन भेड़ा, पट्टी बिजा खान, खानपुर पंचशाला, कटकौरा, नगरिया खनू, धमी पट्टी व रैपुरा प्रभावित हैं।