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Budaun News: 2.93 करोड़ की जीएसटी के फर्जीवाड़े में वांछित सद्दाम अली गिरफ्तार

Sun, 25 Oct 2026 02:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:22 AM IST
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Saddam Ali, wanted in a GST fraud case worth Rs 2.93 crore, arrested
जीएसटी चोरी का आरोपी सद्वाम अली। स्त्रोत पुलिस
बदायूं। लकड़ी के कारोबार की आड़ में 2.93 करोड़ रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले में वांछित मुख्य आरोपी सद्दाम अली को कोतवाली पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर फर्जी फर्म के जरिये कागजों में करोड़ों रुपये की खरीद-बिक्री दिखाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के इस्तेमाल और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की जांच में फर्म के पंजीकरण से लेकर कारोबार तक में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं।
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कोतवाली पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार सद्दाम अली बिल्सी क्षेत्र के नगर पुखरा का निवासी है। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा रेंज-ए बरेली की तहरीर पर कोतवाली में सद्दाम के विरुद्ध धोखाधड़ी और कूटरचना समेत विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। शनिवार को सूचना मिलने पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
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जांच में सामने आया कि आरोपी ने बदायूं की अंदरचुंगी स्थित सर्वश्री सरकार इंटरप्राइजेज नाम से फर्म का पंजीकरण कराया था। वर्ष 2024-25 में इस फर्म के माध्यम से 13.40 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्शाया गया, जबकि टैक्स के रूप में बेहद कम नकद राशि जमा की थी।
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सीओ सिटी सुमेध मिलिंद जाधव ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद जांच में आरोप सही पाए गए थे। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम दबिश दे रही थी। शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के सामने पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।


मौके पर नहीं मिली थी फर्म, मृत व्यक्ति के हस्ताक्षर का इस्तेमाल
राज्य कर विभाग की टीम ने 30 अप्रैल 2025 को फर्म के पते का भौतिक सत्यापन किया था, जिसमें वहां लकड़ी का कारोबार होता नहीं मिला था। जांच में यह सामने आया था कि फर्म के पंजीकरण के लिए मृतक अमर सिंह के नाम से कथित फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित किरायानामा लगाया था। आरोप है कि वास्तविक माल की आवाजाही के बिना कागजों पर फर्जी बिलिंग कर बोगस आईटीसी का लाभ लिया गया, जिससे सरकार को करीब 2.93 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर फर्जी फर्म के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
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