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जर्जर सड़क : दिन भर उड़ती धूल ने बढ़ा दिए सांस के रोगी
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मंडी समिति रोड पर उड़ती धूल। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाइवे पर मंडी समिति चौराहा और गौरीशंकर मंदिर के पास रहने वाले लोगों का सड़क पर उड़ते धूल के गुबार से बुरा हाल है। तीन- चार साल से यहां के लोग ये धूल झेल रहे हैं। लोगों का कहना है कि दिन भर वाहनों के कारण उड़ती धूल से आसपास के लोगों में सांस के रोग बढ़ने लगे हैं। बुजुर्गों को तो सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी है, जिस कारण वे परेशान हैं।
हाईवे पर गौरीशंकर मंदिर के नजदीक सड़क के हाल से सभी लोग परिचित हैं। चार पहिया वाहन तक यहां हिचकोले खाते हैं। ये वाहन जब यहां से गुजरते हैं तो दोपहिया वाहन चालकों समेत पैदल चलने वालों का बुरा हाल हो जाता है क्योंकि बड़े वाहन के पीछे उठते धूल के गुबार सीधे नाक के रास्ते होते हुए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। यहां आसपास रहने वाले लोग और दुकानदार इससे परेशान हैं। ज्यादातर लोग सुरक्षा की खातिर मास्क का प्रयोग करने लगे हैं।
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पहले सुबह टहलते थे, अब किया बंद
पहले सेहत अच्छी रखने के लिए हाईवे पर टहलने जाते थे, लेकिन जब से सड़क की हालत खस्ता हुई है, टहलना ही बंद कर दिया। अब तो यहां सांस तक लेने में परेशानी होती है।
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-गिरवारी लाल
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धूल से आंखों में होने लगी परेशानी
हाईवे पर दिन भर धूल भरे गुबार उड़ते हैं। रात को तो और भी ज्यादा बुरी स्थिति हो जाती है। हालांकि रात में धूल पता नहीं चलती लेकिन सांसों में तो जाती है। आंखों में भी जलन रहने लगी है।
- सतीश
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मास्क का उपयोग करते हैं हर वक्त
हाईवे की उड़ती धूल पास स्थित घरों में भी घुस जाती है। दिन भर सफाई करनी पड़ती है तो मुंह पर मास्क लगाकर रहना पड़ता है। डॉक्टर ने भी मास्क लगाने को कहा है ताकि धूल सांस के साथ अंदर न जाए।
- रवि कुमार
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सांस लेने में होती है दिक्कत
हाईवे किनारे पर हमारी ऑटो पार्ट्स की दुकान है। दिन भर दुकान से धूल ही साफ करते रहते हैं। काफी पुरानी समस्या है। अब तो सांस लेने तक में दिक्कत होने लगी है।
- श्याम
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फोटो- 28
अस्थमा के रोगियों को बड़ा खतरा है धूल
नाक और मुंह के रास्ते से होती हुई धूल सीधे फेफड़ों तक जाती है, जिससे धीरे-धीरे सांस की समस्या होने लगती है। सांस लेने में परेशानी, खांसी आदि दिक्कत आने लगती है। सबसे ज्यादा परेशानी अस्थमा के रोगियों को होती है। कभी कभी तो उनकी जान को भी खतरा हो जाता है। ऐसे में धूल से जहां तक हो सके, बचाव करना चाहिए। धूल होने पर अच्छे मास्क का प्रयोग करें ताकि धूल के कण सांस के साथ अंदर न जा सकें।
-डॉ. नितिन सिंह, ईएमओ, जिला अस्पताल
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हाईवे पर गौरीशंकर मंदिर के नजदीक सड़क के हाल से सभी लोग परिचित हैं। चार पहिया वाहन तक यहां हिचकोले खाते हैं। ये वाहन जब यहां से गुजरते हैं तो दोपहिया वाहन चालकों समेत पैदल चलने वालों का बुरा हाल हो जाता है क्योंकि बड़े वाहन के पीछे उठते धूल के गुबार सीधे नाक के रास्ते होते हुए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। यहां आसपास रहने वाले लोग और दुकानदार इससे परेशान हैं। ज्यादातर लोग सुरक्षा की खातिर मास्क का प्रयोग करने लगे हैं।
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पहले सुबह टहलते थे, अब किया बंद
पहले सेहत अच्छी रखने के लिए हाईवे पर टहलने जाते थे, लेकिन जब से सड़क की हालत खस्ता हुई है, टहलना ही बंद कर दिया। अब तो यहां सांस तक लेने में परेशानी होती है।
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-गिरवारी लाल
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धूल से आंखों में होने लगी परेशानी
हाईवे पर दिन भर धूल भरे गुबार उड़ते हैं। रात को तो और भी ज्यादा बुरी स्थिति हो जाती है। हालांकि रात में धूल पता नहीं चलती लेकिन सांसों में तो जाती है। आंखों में भी जलन रहने लगी है।
- सतीश
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मास्क का उपयोग करते हैं हर वक्त
हाईवे की उड़ती धूल पास स्थित घरों में भी घुस जाती है। दिन भर सफाई करनी पड़ती है तो मुंह पर मास्क लगाकर रहना पड़ता है। डॉक्टर ने भी मास्क लगाने को कहा है ताकि धूल सांस के साथ अंदर न जाए।
- रवि कुमार
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सांस लेने में होती है दिक्कत
हाईवे किनारे पर हमारी ऑटो पार्ट्स की दुकान है। दिन भर दुकान से धूल ही साफ करते रहते हैं। काफी पुरानी समस्या है। अब तो सांस लेने तक में दिक्कत होने लगी है।
- श्याम
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फोटो- 28
अस्थमा के रोगियों को बड़ा खतरा है धूल
नाक और मुंह के रास्ते से होती हुई धूल सीधे फेफड़ों तक जाती है, जिससे धीरे-धीरे सांस की समस्या होने लगती है। सांस लेने में परेशानी, खांसी आदि दिक्कत आने लगती है। सबसे ज्यादा परेशानी अस्थमा के रोगियों को होती है। कभी कभी तो उनकी जान को भी खतरा हो जाता है। ऐसे में धूल से जहां तक हो सके, बचाव करना चाहिए। धूल होने पर अच्छे मास्क का प्रयोग करें ताकि धूल के कण सांस के साथ अंदर न जा सकें।
-डॉ. नितिन सिंह, ईएमओ, जिला अस्पताल