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Budaun News: 14 विभागों पर जिम्मेदारी फिर भी 30 दिन में 50 मलेरिया संक्रमित मिले
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बदायूं। डेंगू और मलेरिया का संक्रमण रोकने की एहतियाती तैयारी 14 विभागों को सौंपी गई है, लेकिन अबतक किसी भी विभाग ने मच्छरों को मारने के उपाय शुरू नहीं किए हैं। यही कारण है कि 30 दिन में 50 मलेरिया संक्रमित मिल चुके हैं। बदइंतजामी के चलते पिछले साल मलेरिया बेकाबू हो गया था। मलेरिया के 3224 रिकॉर्ड में दर्ज किए गए थे। हर बार की तरह इस बार भी संचारी अभियान बैठकों तक ही सीमित होकर रह गया है।
जिले में 1037 ग्राम पंचायतें हैं। जिले में ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले मजरे जोड़ दिए जाएं तो संख्या 1500 से अधिक पहुंच जाएगी। कोई गांव ऐसा नहीं जहां जलभराव की स्थिति और मच्छरों का प्रकोप न हो, लेकिन व्यवस्थाएं ऐसी नहीं हैं कि मलेरिया फैलाने वाले मच्छर मारे जा सकें। अब इनकी वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं और कागजों में मच्छर मार के अभियान चल रहे हैं।
मलेरिया का प्रकोप जुलाई के अंत से शुरू होकर अक्तूबर तक कहर बरपाता है। इस बार मई में ही मच्छर डंक मारने लगा है। यही कारण है कि अब तक 50 लोगाें में मलेरिया संक्रमण फैल गया। पिछले माह जेडी हेल्थ एके चौधरी ने बिनावर क्षेत्र के गांव पुठी सराय में पहुंचकर संचारी रोग नियंत्रण का जायजा लिया था। गांव में गंदगी मिलने पर साफ- सफाई के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों का पालन नहीं हुआ। डीएम की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण के लिए बैठकें हो चुकी हैं लेकिन काम नहीं हो रहा है।
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मलेरिया विभाग के पांच साल के आंकड़े
वर्ष जांच संक्रमित
2019 157248 20339
2020 252745 11987
2021 157294 1665
2022 2,70377 1373
2023 3,72,684 3224
मलेरिया होने पर 14 दिन खानी होती है दवा
मलेरिया अधिकारी डॉ. योगेश सारस्वत ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति मलेरिया से संक्रमित हो जाता है तो उसको सीएचसी से 14 दिन की दवा फ्री में दी जाती है। गांव की आशा उसकी निगरानी करती है। दवा पूरी होने पर दोबारा जांच कराई जाती है। मलेरिया निगेटिव आता है तो उसको दवा बंद कर दी जाती है। मलेरिया पीवी से अधिक खतरा नहीं होता, जबकि पीएफ मलेरिया में दवा समय से न लेने पर रोग जानलेवा भी हो सकता है। विभाग का काम लोगों को जागरूक करना और मरीज मिलने पर उस घर के आसपास के 50 घरों में एंटी लार्वा या कीटनाशक दवा का छिड़काव कराना होता है।
गांव स्तर पर यह है लापरवाही
पंचायती राज विभाग को गांव-गांव सफाई करानी है, लेकिन आबादी की तुलना में कर्मचारी कम हैं। सफाई और कीटनाशक का छिड़काव नहीं कराया जाता है। मलेरिया विभाग की टीम तो तभी पहुंचती है जब वहां पर मलेरिया संक्रमित मिल जाता है। अगर मलेरिया रोकने के लिए पहले से उपाय किए जाएं तो मलेरिया फैलने की संभावना घटेगी।
इनकी भी है जिम्मेदारी
पंचायती राज के अलावा कृषि, बेसिक शिक्षा, नगर विकास, बाल विकास, ग्राम्य विकास, चिकित्सा, सिंचाई, पशुपालन, दिव्यांग जन सशक्तीकरण, सूचना एवं जन पर्क, वाणिज्यकर, नमामि गंगे तथा जल निगम तथा शिक्षा विभाग के ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को जागरूकता और जिला स्तरीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ संक्रामक रोग रोकने की जिम्मेदारी दी गई है।
विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। शहर में लगातार फॉगिंग भी कराई जा रही है। अभी मलेरिया के मरीज बढ़ने की आशंका नहीं है। साफ-सफाई को पंचायती राज विभाग समय समय पर पत्र भेजा जाता है। - डॉ.योगेश सारस्वत, मलेरिया अधिकारी
ऑक्सीजन प्लांट ठीक, जून में बनेगा मलेरिया और डेंगू वार्ड
संक्रमण रोकने के लिए विभाग ने पहले ही दवा का इंतजाम कर लिया है। जून में मलेरिया और डेंगू वार्ड भी बना दिए जाएंगे। जिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट ठीक करा दिया गया है। गांव स्तर पर सफाई के लिए ग्राम पंचायत और नगरीय क्षेत्र में नगर पालिका और नगर पंचायत की जिम्मेदारी है, उनसे कहा जा रहा है। - डॉ. अब्दुल सलाम, मुख्य चिकित्साधिकारी
जिन ग्राम पंचायतों में मलेरिया के केस सामने आए हैं। उन गांवों में पहले चरण में ही एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराएंगे ताकि लोगों को दिक्कत न हो। अब तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा था। उसके तहत भी सभी पंचायत सचिवों को एंटी लार्वा का छिड़काव और फाॅगिंग कराने के आदेश दिए गए हैं। -श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ
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जिले में 1037 ग्राम पंचायतें हैं। जिले में ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले मजरे जोड़ दिए जाएं तो संख्या 1500 से अधिक पहुंच जाएगी। कोई गांव ऐसा नहीं जहां जलभराव की स्थिति और मच्छरों का प्रकोप न हो, लेकिन व्यवस्थाएं ऐसी नहीं हैं कि मलेरिया फैलाने वाले मच्छर मारे जा सकें। अब इनकी वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं और कागजों में मच्छर मार के अभियान चल रहे हैं।
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मलेरिया का प्रकोप जुलाई के अंत से शुरू होकर अक्तूबर तक कहर बरपाता है। इस बार मई में ही मच्छर डंक मारने लगा है। यही कारण है कि अब तक 50 लोगाें में मलेरिया संक्रमण फैल गया। पिछले माह जेडी हेल्थ एके चौधरी ने बिनावर क्षेत्र के गांव पुठी सराय में पहुंचकर संचारी रोग नियंत्रण का जायजा लिया था। गांव में गंदगी मिलने पर साफ- सफाई के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों का पालन नहीं हुआ। डीएम की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण के लिए बैठकें हो चुकी हैं लेकिन काम नहीं हो रहा है।
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मलेरिया विभाग के पांच साल के आंकड़े
वर्ष जांच संक्रमित
2019 157248 20339
2020 252745 11987
2021 157294 1665
2022 2,70377 1373
2023 3,72,684 3224
मलेरिया होने पर 14 दिन खानी होती है दवा
मलेरिया अधिकारी डॉ. योगेश सारस्वत ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति मलेरिया से संक्रमित हो जाता है तो उसको सीएचसी से 14 दिन की दवा फ्री में दी जाती है। गांव की आशा उसकी निगरानी करती है। दवा पूरी होने पर दोबारा जांच कराई जाती है। मलेरिया निगेटिव आता है तो उसको दवा बंद कर दी जाती है। मलेरिया पीवी से अधिक खतरा नहीं होता, जबकि पीएफ मलेरिया में दवा समय से न लेने पर रोग जानलेवा भी हो सकता है। विभाग का काम लोगों को जागरूक करना और मरीज मिलने पर उस घर के आसपास के 50 घरों में एंटी लार्वा या कीटनाशक दवा का छिड़काव कराना होता है।
गांव स्तर पर यह है लापरवाही
पंचायती राज विभाग को गांव-गांव सफाई करानी है, लेकिन आबादी की तुलना में कर्मचारी कम हैं। सफाई और कीटनाशक का छिड़काव नहीं कराया जाता है। मलेरिया विभाग की टीम तो तभी पहुंचती है जब वहां पर मलेरिया संक्रमित मिल जाता है। अगर मलेरिया रोकने के लिए पहले से उपाय किए जाएं तो मलेरिया फैलने की संभावना घटेगी।
इनकी भी है जिम्मेदारी
पंचायती राज के अलावा कृषि, बेसिक शिक्षा, नगर विकास, बाल विकास, ग्राम्य विकास, चिकित्सा, सिंचाई, पशुपालन, दिव्यांग जन सशक्तीकरण, सूचना एवं जन पर्क, वाणिज्यकर, नमामि गंगे तथा जल निगम तथा शिक्षा विभाग के ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को जागरूकता और जिला स्तरीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ संक्रामक रोग रोकने की जिम्मेदारी दी गई है।
विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। शहर में लगातार फॉगिंग भी कराई जा रही है। अभी मलेरिया के मरीज बढ़ने की आशंका नहीं है। साफ-सफाई को पंचायती राज विभाग समय समय पर पत्र भेजा जाता है। - डॉ.योगेश सारस्वत, मलेरिया अधिकारी
ऑक्सीजन प्लांट ठीक, जून में बनेगा मलेरिया और डेंगू वार्ड
संक्रमण रोकने के लिए विभाग ने पहले ही दवा का इंतजाम कर लिया है। जून में मलेरिया और डेंगू वार्ड भी बना दिए जाएंगे। जिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट ठीक करा दिया गया है। गांव स्तर पर सफाई के लिए ग्राम पंचायत और नगरीय क्षेत्र में नगर पालिका और नगर पंचायत की जिम्मेदारी है, उनसे कहा जा रहा है। - डॉ. अब्दुल सलाम, मुख्य चिकित्साधिकारी
जिन ग्राम पंचायतों में मलेरिया के केस सामने आए हैं। उन गांवों में पहले चरण में ही एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराएंगे ताकि लोगों को दिक्कत न हो। अब तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा था। उसके तहत भी सभी पंचायत सचिवों को एंटी लार्वा का छिड़काव और फाॅगिंग कराने के आदेश दिए गए हैं। -श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ