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बेटा मुसलमान तो पिता की हिंदू धर्म में आस्था
मुन्नालाल गुप्ता/दातागंज।
Updated Mon, 15 Dec 2014 07:50 PM IST
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दातागंज (बदायूं)। एक ओर धर्म परिवर्तन को लेकर देशभर में चर्चा चल रही है वहीं क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांव सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने हुए हैं। यहां कई परिवार ऐसे हैं, जिनके सदस्य दोनों धर्मों को मानने वाले हैं। ये वे परिवार हैं, जिनके कई सदस्यों ने दशकों पहले धर्म बदल लिया था।
क्षेत्र के गांव नौनी में एक ही परिवार के कल्लू, छोटे, नत्थू मस्लिम धर्म मानते हैं और इसी परिवार के जमादार, नवाब सिंह, नेकसू हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं। सभी लोग दोनों धर्मों के पर्व मिलकर मनाते हैं। इसी गांव के बुद्धन खां मुस्लिम धर्म को मानते हैं जबकि उनके पिता रामबहादुर हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं। अभयपुर, बखतपुर, चितरी, टिकन्ना, गनगोला और कुढ़रा मजरा में भी कई हिंदू-मुस्लिम परिवार हैं, जो साथ मिलकर रहते हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि इन गांवों में कभी सांप्रदायिक तनाव की स्थिति नहीं बनी। इन गांवों में भले दोनों धर्मों के लोग रहते हों लेकिन होली, दिवाली और ईद के त्योहार पर पता ही नहीं चलता कि कि गांव में दो धर्म के लोग बसते हैं। इन दिनों देश में धर्म परिवर्तन को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच इन गांवों के लोग दुखी हैं। इनका कहना है कि सभी को धार्मिक स्वतंत्रता होनी चाहिए।
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क्षेत्र के गांव नौनी में एक ही परिवार के कल्लू, छोटे, नत्थू मस्लिम धर्म मानते हैं और इसी परिवार के जमादार, नवाब सिंह, नेकसू हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं। सभी लोग दोनों धर्मों के पर्व मिलकर मनाते हैं। इसी गांव के बुद्धन खां मुस्लिम धर्म को मानते हैं जबकि उनके पिता रामबहादुर हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं। अभयपुर, बखतपुर, चितरी, टिकन्ना, गनगोला और कुढ़रा मजरा में भी कई हिंदू-मुस्लिम परिवार हैं, जो साथ मिलकर रहते हैं।
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गौर करने वाली बात यह भी है कि इन गांवों में कभी सांप्रदायिक तनाव की स्थिति नहीं बनी। इन गांवों में भले दोनों धर्मों के लोग रहते हों लेकिन होली, दिवाली और ईद के त्योहार पर पता ही नहीं चलता कि कि गांव में दो धर्म के लोग बसते हैं। इन दिनों देश में धर्म परिवर्तन को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच इन गांवों के लोग दुखी हैं। इनका कहना है कि सभी को धार्मिक स्वतंत्रता होनी चाहिए।
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