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Budaun News: मिली राहत, 60 विद्यालयों का नहीं होगा विलय
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बदायूं। बेसिक शिक्षा परिषद ने विलय के मानक बदले तो 60 विद्यालयों को राहत मिल गई है। इससे बच्चों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। विलय के खिलाफ आंदोलन करने वाले शिक्षकों ने इसे अपनी जीत बताई है। कहा कि सभी विलय को निरस्त किया जाय।
प्रदेश सरकार ने 50 से कम बच्चों वाले प्राइमरी और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विलय का आदेश दिया था। इन विद्यालयों को दो किलोमीटर की परिधि वाले विद्यालयों विलय करना था। इस मानक के अनुसार जिले में 142 स्कूल प्रभावित हुए थे। विलय के आदेश का छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों से लेकर राजनैतिक दलों ने विरोध किया। उसके बाद शासन ने पुनर्विचार करते हुए यह दूरी घटाकर एक किलोमीटर कर दी है। इसका फायदा यह हुआ है कि पहले जो स्कूल एक से दो किलोमीटर के दायरे में थे, उन्हें अब फिर से अपनी पुरानी इमारतों में चलाने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के बाद कई गांवों में बच्चों के माता-पिता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संतोष जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि हमार बच्चा अब फिर से अपने गांव के स्कूल में पढ़ेगा।
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शिक्षक संघ लगातार कर रहा विलय का विरोध
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता संजीव शर्मा का कहना है कि शुरुआत से ही हम विलय के विरोध में थे और आज भी हैं। सरकार को चाहिए कि वह स्कूलों में सुविधाओं में बढ़ोतरी करें। साथ ही शिक्षकों पर केवल पढ़ाई संबंधित ही काम कराया जाएगा। बेवजह का बोझ शिक्षकों पर न डाला जाए। जब शिक्षक को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा तो शिक्षा की गुणवत्ता प्राइवेट स्कूलों की तुलना में कहीं बेहतर होगी।
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वर्जन-
- शासन के निर्देशानुसार पहले 142 स्कूलों का समायोजन किया गया था। अब नई गाइडलाइन के मुताबिक 60 स्कूलों को इस दायरे से बाहर किया गया है। ये सभी स्कूल अब अपने मूल भवनों में ही संचालित होंगे। -वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए
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प्रदेश सरकार ने 50 से कम बच्चों वाले प्राइमरी और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विलय का आदेश दिया था। इन विद्यालयों को दो किलोमीटर की परिधि वाले विद्यालयों विलय करना था। इस मानक के अनुसार जिले में 142 स्कूल प्रभावित हुए थे। विलय के आदेश का छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों से लेकर राजनैतिक दलों ने विरोध किया। उसके बाद शासन ने पुनर्विचार करते हुए यह दूरी घटाकर एक किलोमीटर कर दी है। इसका फायदा यह हुआ है कि पहले जो स्कूल एक से दो किलोमीटर के दायरे में थे, उन्हें अब फिर से अपनी पुरानी इमारतों में चलाने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के बाद कई गांवों में बच्चों के माता-पिता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संतोष जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि हमार बच्चा अब फिर से अपने गांव के स्कूल में पढ़ेगा।
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शिक्षक संघ लगातार कर रहा विलय का विरोध
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता संजीव शर्मा का कहना है कि शुरुआत से ही हम विलय के विरोध में थे और आज भी हैं। सरकार को चाहिए कि वह स्कूलों में सुविधाओं में बढ़ोतरी करें। साथ ही शिक्षकों पर केवल पढ़ाई संबंधित ही काम कराया जाएगा। बेवजह का बोझ शिक्षकों पर न डाला जाए। जब शिक्षक को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा तो शिक्षा की गुणवत्ता प्राइवेट स्कूलों की तुलना में कहीं बेहतर होगी।
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वर्जन-
- शासन के निर्देशानुसार पहले 142 स्कूलों का समायोजन किया गया था। अब नई गाइडलाइन के मुताबिक 60 स्कूलों को इस दायरे से बाहर किया गया है। ये सभी स्कूल अब अपने मूल भवनों में ही संचालित होंगे। -वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए