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चार साल में कोर्ट में पहुंचे दुष्कर्म के 423 मामले
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बदायूं। जिले में दुष्कर्म की घटनाएं थम नहीं रही हैं। इनमें कई घटनाएं बेहद चर्चित भी रहीं। आंकड़ों पर गौर करें तो 2016 से लेकर 2018 तक 423 दुष्कर्म के मामले न्यायालय तक पहुंचे। वर्ष 2017 में सर्वाधिक 144 मामले कोर्ट में आए तो इस साल अब तक 73 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इसके अलावा पॉक्सो एक्ट के 111 मुकदमे कोर्ट में चल रहे हैं।
थाना मूसाझाग में तैनात सिपाहियों ने एक किशोरी को अगवा करने के बाद थाने में ही उससे गैंगरेप किया था। वर्ष 2013 की घटना सबसे अधिक चर्चा में रही थी। इसके अलावा वर्ष 2016 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिले में दुष्कर्म की घटनाएं कम नहीं रही हैं। बहुत सी घटनाओं को तो पुलिस ही दबा जाती है या फिर दुष्कर्म की घटना को छेड़छाड़ में दर्ज कर पीड़ित पक्ष को यह बात कहकर शांत कर देती है कि इज्जत का सवाल है, इसलिए बेहतर होगा कि खामोश होकर ही बैठ जाएं। ऐसे में कुछ लोग पुलिस की बातों में आ जाते हैं या फिर अन्य दबाव के चलते विरोधियों पर कार्रवाई नहीं करा पाते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2016 में करीब सौ दुष्कर्म के मामले कोर्ट पहुंचे। 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 144 हो गई तो वर्ष 2018 में 106 मामले कोर्ट पहुंचे। चालू वर्ष यानी 2019 अब तक 73 मामले कोर्ट में आए हैं। इसके अलावा नाबालिगों से दुष्कर्म की बात करें तो इस साल में अब तक 111 मामले पॉक्सो कोर्ट में पहुंचे हैं।
कुछ ही मामलों में हुई है सजा, बाकी लंबित
- दुष्कर्म के दर्ज 423 मामलों पर नजर डालें तो वर्ष 2016 के सौ मामलों में लगभग आधे मामलों में ही सजा हुई है, जबकि वर्ष 2017 में दर्ज 144 मामलों में 44 को सजा हुई है। इसके अलावा 2018 व 2019 के सभी मामले अभी लंबित हैं। पॉक्सो कोर्ट के मामले भी सभी लंबित चल रहे हैं।
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कोर्ट की सख्ती के बाद भी बढ़ रहीं हैं घटनाएं-दुष्कर्म के मामलों में कोर्ट लगातार आरोपियों को कड़ी सजा दे रहा है। इससे लोगों का न्याय पर और भरोसा बढ़ा है। यदि पुलिस अपनी कार्यशैली में बदलाव ले आए तो निश्चित तौर पर दुष्कर्म के आरोपियों पर कार्रवाई हो सकेगी, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर भी अंकुश लग सकेगा।
- दुष्कर्म के मामलों खासकर पॉक्सो एक्ट में कोर्ट बेहद सख्त है। कई मामलों में कोर्ट ने जल्द कार्रवाई करते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिया है। हालांकि कई मामलों में तो कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ जो डंडा चलाया है, उसने उन पुलिसवालों को भी परेशान कर दिया जिन्होंने आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में चार्जशीट भेजी। ऐसे मामलों में कोर्ट ने सीधे आरोपियों को कोर्ट में तलब किया, साथ ही बचाने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को उच्च अधिकारियों को भी लिखा।
-- मदन लाल राजपूत, एडीजीसी क्रिमिनल
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थाना मूसाझाग में तैनात सिपाहियों ने एक किशोरी को अगवा करने के बाद थाने में ही उससे गैंगरेप किया था। वर्ष 2013 की घटना सबसे अधिक चर्चा में रही थी। इसके अलावा वर्ष 2016 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिले में दुष्कर्म की घटनाएं कम नहीं रही हैं। बहुत सी घटनाओं को तो पुलिस ही दबा जाती है या फिर दुष्कर्म की घटना को छेड़छाड़ में दर्ज कर पीड़ित पक्ष को यह बात कहकर शांत कर देती है कि इज्जत का सवाल है, इसलिए बेहतर होगा कि खामोश होकर ही बैठ जाएं। ऐसे में कुछ लोग पुलिस की बातों में आ जाते हैं या फिर अन्य दबाव के चलते विरोधियों पर कार्रवाई नहीं करा पाते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2016 में करीब सौ दुष्कर्म के मामले कोर्ट पहुंचे। 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 144 हो गई तो वर्ष 2018 में 106 मामले कोर्ट पहुंचे। चालू वर्ष यानी 2019 अब तक 73 मामले कोर्ट में आए हैं। इसके अलावा नाबालिगों से दुष्कर्म की बात करें तो इस साल में अब तक 111 मामले पॉक्सो कोर्ट में पहुंचे हैं।
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कुछ ही मामलों में हुई है सजा, बाकी लंबित
- दुष्कर्म के दर्ज 423 मामलों पर नजर डालें तो वर्ष 2016 के सौ मामलों में लगभग आधे मामलों में ही सजा हुई है, जबकि वर्ष 2017 में दर्ज 144 मामलों में 44 को सजा हुई है। इसके अलावा 2018 व 2019 के सभी मामले अभी लंबित हैं। पॉक्सो कोर्ट के मामले भी सभी लंबित चल रहे हैं।
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कोर्ट की सख्ती के बाद भी बढ़ रहीं हैं घटनाएं-दुष्कर्म के मामलों में कोर्ट लगातार आरोपियों को कड़ी सजा दे रहा है। इससे लोगों का न्याय पर और भरोसा बढ़ा है। यदि पुलिस अपनी कार्यशैली में बदलाव ले आए तो निश्चित तौर पर दुष्कर्म के आरोपियों पर कार्रवाई हो सकेगी, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर भी अंकुश लग सकेगा।
- दुष्कर्म के मामलों खासकर पॉक्सो एक्ट में कोर्ट बेहद सख्त है। कई मामलों में कोर्ट ने जल्द कार्रवाई करते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिया है। हालांकि कई मामलों में तो कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ जो डंडा चलाया है, उसने उन पुलिसवालों को भी परेशान कर दिया जिन्होंने आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में चार्जशीट भेजी। ऐसे मामलों में कोर्ट ने सीधे आरोपियों को कोर्ट में तलब किया, साथ ही बचाने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को उच्च अधिकारियों को भी लिखा।
-- मदन लाल राजपूत, एडीजीसी क्रिमिनल