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नहीं होगा रामलीला महोत्सव का आयोजन, रस्म भर को होगा रावण के पुतले का दहन
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बदायूं। श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी ने साफ कर दिया है कि इस बार रामलीला महोत्सव का आयोजन नहीं किया जाएगा। परंपरा न टूटे इसके लिए कमेटी की ओर से सिर्फ विजय दशमी पर प्रतीकात्मक रूप से रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। रामलीला महोत्सव के करीब 115 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब महोत्सव का आयोजन बिल्कुल नहीं होगा।
कोरोना काल के चलते सरकार ने इस बार रामलीला महोत्सव के आयोजन को लेकर कई प्रतिबंध लागू किए हैं। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि रामलीला मंचन प्राचीन परंपरा है और इसका आयोजन किया जा सकता है लेकिन शर्त यह होगी कि दर्शक 100 से ज्यादा नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही रामलीला महोत्सव के दौरान दुकानें और मेला के आयोजन से पाबंदी नहीं हटाई है। मंचन के आयोजन में काफी खर्च आता है। इसके लिए कमेटी बिहार के दरभंगा से कलाकारों को बुलाती है। करीब एक महीने तक कलाकार यहां रहते हैं। इसके साथ ही मंच, कलाकारों की सज्जा, राम बारात आदि पर भी काफी खर्च आता है। यह खर्च कमेटी रामलीला महोत्सव में लगने वाली दुकानों, झूला, खेल-तमाशा आदि से सहयोग के रूप में लेती है। दुकानें न लगने से मेला का आयोजन नहीं होगा। ऐसे में धनराशि न होने पर मंचन भी खटाई में पड़ गया है।
श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के मंत्री अरविंद कांत ने बताया कि मेला के आयोजन को लेकर कमेटी ने डीएम कुमार प्रशांत से वार्ता की थी। दुकानें लगाने की अनुमति नहीं है। मंचन में भी 100 दर्शकों की संख्या का प्रतिबंध है। ऐसे में कमेटी ने कोरोना काल में महोत्सव का आयोजन न करने का फैसला किया है। पहले मंचन पर विचार किया जा रहा था, लेकिन अब कमेटी ने सिर्फ विजय दशमी पर प्रतीकात्मक रावण वध के आयोजन का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इतिहास में यह पहला मौका है जब रामलीला महोत्सव का आयोजन नहीं होगा। इससे पहले वर्ष 1989 में भी दंगे के दौरान मेला लगा था और कुछ दिन रामलीला महोत्सव का आयोजन भी किया गया था। हालांकि दंगा होने पर आयोजन समाप्त कर दिया गया था।
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कोरोना काल के चलते सरकार ने इस बार रामलीला महोत्सव के आयोजन को लेकर कई प्रतिबंध लागू किए हैं। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि रामलीला मंचन प्राचीन परंपरा है और इसका आयोजन किया जा सकता है लेकिन शर्त यह होगी कि दर्शक 100 से ज्यादा नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही रामलीला महोत्सव के दौरान दुकानें और मेला के आयोजन से पाबंदी नहीं हटाई है। मंचन के आयोजन में काफी खर्च आता है। इसके लिए कमेटी बिहार के दरभंगा से कलाकारों को बुलाती है। करीब एक महीने तक कलाकार यहां रहते हैं। इसके साथ ही मंच, कलाकारों की सज्जा, राम बारात आदि पर भी काफी खर्च आता है। यह खर्च कमेटी रामलीला महोत्सव में लगने वाली दुकानों, झूला, खेल-तमाशा आदि से सहयोग के रूप में लेती है। दुकानें न लगने से मेला का आयोजन नहीं होगा। ऐसे में धनराशि न होने पर मंचन भी खटाई में पड़ गया है।
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श्रीरामलीला महोत्सव कमेटी के मंत्री अरविंद कांत ने बताया कि मेला के आयोजन को लेकर कमेटी ने डीएम कुमार प्रशांत से वार्ता की थी। दुकानें लगाने की अनुमति नहीं है। मंचन में भी 100 दर्शकों की संख्या का प्रतिबंध है। ऐसे में कमेटी ने कोरोना काल में महोत्सव का आयोजन न करने का फैसला किया है। पहले मंचन पर विचार किया जा रहा था, लेकिन अब कमेटी ने सिर्फ विजय दशमी पर प्रतीकात्मक रावण वध के आयोजन का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इतिहास में यह पहला मौका है जब रामलीला महोत्सव का आयोजन नहीं होगा। इससे पहले वर्ष 1989 में भी दंगे के दौरान मेला लगा था और कुछ दिन रामलीला महोत्सव का आयोजन भी किया गया था। हालांकि दंगा होने पर आयोजन समाप्त कर दिया गया था।
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