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संगीतमयी रामकथा में झूमे श्रोता
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2016 11:12 PM IST
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रामकथा
- फोटो : अमर उजाला
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हनुमान जयंती पर उझानी रोड बालाजी धाम पर चल रही संगीतमयी श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के विवाह का प्रसंग आया तो श्रोता झूम उठे। विवाह की तमाम परंपराओं को रोचक अंदाज में कथावाचक पं. दिनेश मोहन ने वर्णन किया।
पंडित जी ने कहा कि महामुनि विश्वामित्र के सानिध्य में भगवान राम ने धनुष भंग किया और स्वयंवर में अपना वर्चस्व स्थापित कर दिखाया। उन्होंने विवाह के मंगल गीत, वरमाला और वैवाहिक व्यवस्थाओं और उल्लास का जो वर्णन किया उसके आनंद में श्रोता सराबोर हो गए। कथा में बताया गया कि एकबारगी राजा जनक की निराशा भी देखने को मिली। धनुष भंजन में गुरू की कृपा का महत्व दिया गया। भगवान श्री राम ने गुरू को प्रणाम कर उनके आशीर्वाद के बाद ही धनुष का भंजन किया। कथा में पूरा वातावरण राममय हो गया। ध्रुव तिवारी ने तबले की थाप पर कथा को गति दी तो संगीत के अन्य वाद्य यंत्रों से योगेश तिवारी, बबलू ने गति प्रदान की। कथा के बाद आरती हुई और प्रसाद का वितरण किया गया। इसके साथ ही सुंदर कांड का पाठ भी हुआ जिसमें भक्तों ने श्रद्धा दिखाई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
पंडित जी ने कहा कि महामुनि विश्वामित्र के सानिध्य में भगवान राम ने धनुष भंग किया और स्वयंवर में अपना वर्चस्व स्थापित कर दिखाया। उन्होंने विवाह के मंगल गीत, वरमाला और वैवाहिक व्यवस्थाओं और उल्लास का जो वर्णन किया उसके आनंद में श्रोता सराबोर हो गए। कथा में बताया गया कि एकबारगी राजा जनक की निराशा भी देखने को मिली। धनुष भंजन में गुरू की कृपा का महत्व दिया गया। भगवान श्री राम ने गुरू को प्रणाम कर उनके आशीर्वाद के बाद ही धनुष का भंजन किया। कथा में पूरा वातावरण राममय हो गया। ध्रुव तिवारी ने तबले की थाप पर कथा को गति दी तो संगीत के अन्य वाद्य यंत्रों से योगेश तिवारी, बबलू ने गति प्रदान की। कथा के बाद आरती हुई और प्रसाद का वितरण किया गया। इसके साथ ही सुंदर कांड का पाठ भी हुआ जिसमें भक्तों ने श्रद्धा दिखाई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
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