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आसमान से बरसी आफत
badaun
Updated Sun, 08 Mar 2015 07:14 PM IST
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कृषि प्रधान इस जिले में मौसम ने एक सप्ताह में दो बार कहर बरपाया है। शनिवार रात कादरचौक क्षेत्र में ओला वृष्टि भी हुई। जिले में बारिश और तेज हवाओं ने किसानों का बंटाधार कर दिया है। पिछली फसल को सूखा खा गया तो इस फसल को बेमौसम बारिश और ओलों ने निगल लिया। पूरे साल की मेहनत और पूंजी पर डाका पड़ गया। ऐसे हालातों के बाद भी शासन किसान के आंसू भी नहीं पोंछ पा रहा है।
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मार्च के शुरूआत में दो दिन लगातार बारिश और तेज हवाओं ने गेहूं की फसल का बहुत बड़ा रकबा गिरा दिया। अन्य सरसों आदि की फसलों पर भी कहर बरपाया। आलू भी नहीं खुदने दिए। पिछली फसल सूखे में मारी जाने के बाद जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया था। बावजूद अभी तक किसानों को मुआवजा की आस लगी है। केंद्र और प्रदेश सरकार में सही तालमेल न हो पाने के कारण सूखा राहत कोष से बदायूं को कुछ हाथ नहीं लगा है। अभी सूखा के मुआवजा को आस बंधी थी। किसान सोच रहा है कि गेहूं की अच्छी फसल से कुछ भरपाई कर लेगा लेकिन होली के पूर्व और होली के बाद बारिश, ओलावृष्टि का कहर हुआ तो किसान माथा पीटने के अलावा कुछ नहीं कर सका। बीती रात जिलेभर में बारिश और हवाएं चलीं। वहीं कादरचौक ब्लाक में ओलावृष्टि ने फसलों का तबाह कर दिया।
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पिछला नुकसान 17 करोड़ का, रिपोर्ट भेजी
शनिवार रात को हुई बारिश और ओलावृष्टि को छोड़ दें तो पिछली शुरू मार्च में हुई बारिश और तेज हवाओं से किसानों की 50 प्रतिशत से अधिक नष्ट फसलों का आंकलन कर लिया गया था। उस समय 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाली फसलों में करीब 17 करोड़ का नुकसान आंकलन किया गया था। एडीएम एफआर आरपी यादव की ओर से आई रिपोर्ट डीएम शंभूनाथ ने शासन को भी भिजवा दी है।
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मौजूदा जिंस जिनका बारिश से हुआ नुकसान
गेहूं 2.40 लाख हेक्टेयर
आलू 0.25 लाख हेक्टेयर
सरसों 0.35 लाख हेक्टेयर
खेतों से पानी निकाल दें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र उझानी के वैज्ञानिक डॉ. अर्जुन सिंह का कहना है कि दूसरी बार बारिश से इतना नुकसान नहीं होगा लेकिन जहां ओलावृष्टि हो गई है वहां सभी फसलों को नुकसान है। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में भरा पानी निकाल दें तो अच्छा रहेगा। आलू के खेतों में नमी रहने से आलू भंडारण योग्य नहीं रह जाएगा।
जायद की फसल और आम के बौर भी नष्ट
कादरचौक। शनिवार रात हुई बारिश और ओलावृष्टि से जायद की फसल भी तबाह हो गई है, वहीं आम के बौर झड़ जाने से आम की पैदावार पर भी भारी फर्क पड़ेगा। सदर तहसील के इस इलाके में गंगा की तलहटी में पालेज होती है। बरसात और ओलावृष्टि से पॉलेज के कोमल तनों को भारी नुकसान हुआ है। इससे फसलें तबाही की ओर हैं। गेहूं और आलू के अलावा तंबाकू की फसल भी बर्बाद हुई है। पत्ते झड़ गए हैं या बुरी तरह फट गए हैं। इसके अलावा आम के पेड़ों पर आया बौर भी बारिश और ओलों के कारण झड़ गया है। इस तरह कृषि उपज को भारी धक्का लगा है।
कहते हैं पीड़ित किसान
किसान का परिवार खेती पर ही निर्भर है। खेती में अब ऐसा नहीं होता जो किसान खाने के अलावा कुछ बचा ले। पिछली फसल सूखा ने लील ली तब से किसान बेहाल है। इस बारिश ने उम्मीदों पर ही पानी फेर दिया है। किसान को भविष्य की चिंता सताने लगी है। -शिशुपाल, कादरचौक
रबी की फसल ही नहीं, जायद की फसल भी मौसम में नष्ट कर दी। आम की फसल भी नहीं हो पाएगी। ऐसे में किसान का क्या होगा। किसान की परेशानी को शासन और प्रशासन को समझ आनी चाहिए। किसान का सब कुछ तो खेती ही है। ये नष्ट हो गई तो किसान पर क्या बचा। इस बार तो किसान का सब कुछ खो गया है।
-शफी अहमद, कादरचौक
पिछली बारिश से किसानों के नुकसान का आंकलन करा लिया गया था। शनिवार रात में फिर बारिश होने से नुकसान है। इसके लिए एडीएम एफआर को इस नुकसान का आंकलन कराने को भी कह दिया गया है। रिपोर्ट मिलने पर शासन को सहायता दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। -शंभूनाथ, जिलाधिकारी, बदायूं।