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Budaun News: कैद से ‘रिहा’ हो रहा बंदियों का हुनर
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जेल में इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन मरम्मत का प्रशिक्षण लेते बंदी।
कौशल विकास योजना के तहत सिखाई जा रही उपकरणों की मरम्मत
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। बदायूं जेल के बंदी और कैदी अब इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत सीख रहे हैं। कौशल विकास योजना के तहत जेल के बंदियों और कैदियों को पंखा, कूलर, मिक्सर आदि की मरम्मत सिखाई जा रही है, जिससे वे जेल से निकलकर दोबारा अपना छोटा-मोटा रोजगार कर सकें और दोबारा अपराध की तरफ उन्मुख न हों। इस प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वह लोन भी ले सकेंगे।
जेल में इस समय 1100 बंदी और कैदी रह रहे हैं। जेल में 20 जुलाई से कौशल विकास योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। यह प्रशिक्षण लेने के लिए 54 बंदियों और कैदियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके तहत 27-27 कैदियों और बंदियों के दो बैच बना दिए गए हैं।
यह प्रशिक्षण कौशल विकास योजना के पदाधिकारी सुधीर यादव के निर्देशन में दिया जा रहा है। दोनों बैच के बंदियों और कैदियों को अलग-अलग समय पर बुलाकर मरम्मत कार्य सिखाया जा रहा है। डिप्टी जेलर केपी सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण में कैदियों और बंदियों को माइक्रोवेव, प्रेस, जूसर, मिक्सर, पंखा, कूलर और फ्रीज आदि की रिपेयरिंग करना सिखाया जा रहा है।
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यह दो माह का प्रशिक्षण है। प्रशिक्षण पूरा होने के उपरांत सभी कैदियों और बंदियों को एक-एक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे वे जेल से निकलने के बाद अपना रोजगार कर सकें। प्रमाण पत्र के आधार पर वह कहीं भी अपनी दुकान खोल सकेंगे। उससे लोन भी ले सकेंगे।
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कंपोस्ट खाद बनाना सीख चुके हैं जेल के बंदी
पिछले साल जेल में कौशल विकास योजना के तहत ही बंदियों को कंपोस्ट खाद बनाना सिखाया गया था। जेल में ही एक गड्ढा बना लिया गया था। वहीं प्रशिक्षण देने वालों ने खाद कैसे बनाई जाती है, कितने दिनों में बनाया जा सकता है। यह सब सिखाया गया।
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जेल में 20 जुलाई से कौशल विकास योजना के तहत बंदियों और कैदियों को इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत सिखाई जा रही है। यह दो माह का प्रशिक्षण है। इसके उपरांत उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे वे जेल से निकलकर अपना रोजगार कर सकें।
- डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। बदायूं जेल के बंदी और कैदी अब इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत सीख रहे हैं। कौशल विकास योजना के तहत जेल के बंदियों और कैदियों को पंखा, कूलर, मिक्सर आदि की मरम्मत सिखाई जा रही है, जिससे वे जेल से निकलकर दोबारा अपना छोटा-मोटा रोजगार कर सकें और दोबारा अपराध की तरफ उन्मुख न हों। इस प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वह लोन भी ले सकेंगे।
जेल में इस समय 1100 बंदी और कैदी रह रहे हैं। जेल में 20 जुलाई से कौशल विकास योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। यह प्रशिक्षण लेने के लिए 54 बंदियों और कैदियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके तहत 27-27 कैदियों और बंदियों के दो बैच बना दिए गए हैं।
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यह प्रशिक्षण कौशल विकास योजना के पदाधिकारी सुधीर यादव के निर्देशन में दिया जा रहा है। दोनों बैच के बंदियों और कैदियों को अलग-अलग समय पर बुलाकर मरम्मत कार्य सिखाया जा रहा है। डिप्टी जेलर केपी सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण में कैदियों और बंदियों को माइक्रोवेव, प्रेस, जूसर, मिक्सर, पंखा, कूलर और फ्रीज आदि की रिपेयरिंग करना सिखाया जा रहा है।
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यह दो माह का प्रशिक्षण है। प्रशिक्षण पूरा होने के उपरांत सभी कैदियों और बंदियों को एक-एक प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे वे जेल से निकलने के बाद अपना रोजगार कर सकें। प्रमाण पत्र के आधार पर वह कहीं भी अपनी दुकान खोल सकेंगे। उससे लोन भी ले सकेंगे।
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कंपोस्ट खाद बनाना सीख चुके हैं जेल के बंदी
पिछले साल जेल में कौशल विकास योजना के तहत ही बंदियों को कंपोस्ट खाद बनाना सिखाया गया था। जेल में ही एक गड्ढा बना लिया गया था। वहीं प्रशिक्षण देने वालों ने खाद कैसे बनाई जाती है, कितने दिनों में बनाया जा सकता है। यह सब सिखाया गया।
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जेल में 20 जुलाई से कौशल विकास योजना के तहत बंदियों और कैदियों को इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मरम्मत सिखाई जा रही है। यह दो माह का प्रशिक्षण है। इसके उपरांत उन्हें एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे वे जेल से निकलकर अपना रोजगार कर सकें।
- डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक