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Budaun News: तत्कालीन डीपीआरओ समेत चारों आरोपियों पर चार्जशीट, गैर-जमानती वारंट की तैयारी
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बदायूं। फैजगंज बेहटा थानाक्षेत्र के गांव पिसनहरी की ग्राम पंचायत सदस्य ने अदालत के आदेश पर गबन के आरोप में तत्कालीन डीपीआरओ, ग्राम प्रधान, प्रधान पति व ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ रिपोर्ट मामले की जांच अब अंतिम चरण में है। इसकी जांच करीब पौने तीन माह से चल रही है। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट व गैर-जमानती वारंट जारी करने की तैयारी कर रही है। अदालत से गैरजमानती वारंट का आदेश होने के बाद पुलिस गिरफ्तारी की कोशिश में जुट जाएगी।
पिसनहरी गांव की ग्राम पंचायत सदस्य रेनू यादव ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र बताया था कि साल 2022 में गांव की प्रधान ओमवती के विकास कार्यों में हुई घपलेबाजी की शिकायत को लेकर एक कमेटी ने जांच की थी। कमेटी ने जांच में पाया गया था कि ग्राम प्रधान ने 56 हजार रुपये का अनधिकृत भुगतान किया है। इसके अलावा मजदूरों के 1.56 लाख रुपये उनको न देकर प्रधान के पति ऋषिपाल सिंह के खाते में डाल दिए गए। आरोप था कि तत्कालीन डीपीआरओ (वर्तमान तैनाती महाराजगंज) व सचिव समेत इन लोगों ने मिलकर भुगतान में हेराफेरी कर फर्जी बाउचर लगाए हैं। जिला विकास अधिकारी के 23 अक्तूबर 2023 के पत्र में भी इस बात का जिक्र किया था कि प्रधान व उसके पति ने 1.56 लाख रुपये निकाले थे।
अदालत ने गबन के इस मामले को गंभीर अपराध मानते हुए थानाध्यक्ष को प्रधान ओमवती, प्रधान के पति ऋषिपाल सिंह, तत्कालीन डीपीआरओ श्रेया मिश्रा व सचिव स्वर्णकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। पुलिस ने पांच फरवरी को अदालत के आदेश पर सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। जांच एसएसआई नरेंद्र कुमार को सौंपी गई थी। पुलिस का दावा किया जा रहा है कि जांच में ग्राम पंचायत के लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए है। इसके चलते पुलिस अब विवेचना पूरी कर सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट के आदेश की प्रक्रिया कर रही है। ऐसे में डीपीआरओ, ग्राम प्रधान समेत सभी की मुश्किलें बढ़ सकती है। फैजगंज बेहटा एसओ रामेंद्र सिंह ने बताया कि, मामले की जांच पूरी हो चुकी है। सभी आरोपियों पर लगे आरोप सही पाए गए है। मुकदमे में चार्जशीट के साथ ही गैर जमानती वारंट की तैयारी की जा रही है।
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पिसनहरी गांव की ग्राम पंचायत सदस्य रेनू यादव ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र बताया था कि साल 2022 में गांव की प्रधान ओमवती के विकास कार्यों में हुई घपलेबाजी की शिकायत को लेकर एक कमेटी ने जांच की थी। कमेटी ने जांच में पाया गया था कि ग्राम प्रधान ने 56 हजार रुपये का अनधिकृत भुगतान किया है। इसके अलावा मजदूरों के 1.56 लाख रुपये उनको न देकर प्रधान के पति ऋषिपाल सिंह के खाते में डाल दिए गए। आरोप था कि तत्कालीन डीपीआरओ (वर्तमान तैनाती महाराजगंज) व सचिव समेत इन लोगों ने मिलकर भुगतान में हेराफेरी कर फर्जी बाउचर लगाए हैं। जिला विकास अधिकारी के 23 अक्तूबर 2023 के पत्र में भी इस बात का जिक्र किया था कि प्रधान व उसके पति ने 1.56 लाख रुपये निकाले थे।
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अदालत ने गबन के इस मामले को गंभीर अपराध मानते हुए थानाध्यक्ष को प्रधान ओमवती, प्रधान के पति ऋषिपाल सिंह, तत्कालीन डीपीआरओ श्रेया मिश्रा व सचिव स्वर्णकेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। पुलिस ने पांच फरवरी को अदालत के आदेश पर सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। जांच एसएसआई नरेंद्र कुमार को सौंपी गई थी। पुलिस का दावा किया जा रहा है कि जांच में ग्राम पंचायत के लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए है। इसके चलते पुलिस अब विवेचना पूरी कर सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट के आदेश की प्रक्रिया कर रही है। ऐसे में डीपीआरओ, ग्राम प्रधान समेत सभी की मुश्किलें बढ़ सकती है। फैजगंज बेहटा एसओ रामेंद्र सिंह ने बताया कि, मामले की जांच पूरी हो चुकी है। सभी आरोपियों पर लगे आरोप सही पाए गए है। मुकदमे में चार्जशीट के साथ ही गैर जमानती वारंट की तैयारी की जा रही है।
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