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Budaun News: माध्यमिक स्कूलों में अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षा की तैयारी शुरू
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बदायूं। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षा को लेकर तैयारियां तेज हो गईं हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार परीक्षाएं सितंबर के अंतिम सप्ताह में कराई जानी हैं। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।
डीआईओएस लालजी यादव ने बताया कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षाएं और उसके बाद में अक्तूबर के द्वितीय और तृतीय सप्ताह में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं होंगी। ऐसे में दोनों परीक्षाओं की तैयारी के लिए सभी प्रधानाचार्य को निर्देशित कर दिया गया है।
अर्द्धवार्षिक परीक्षा के लिए बोर्ड निर्देशों के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, बैठने की योजना, अनुशासन बनाए रखने समेत मूल्यांकन कार्य को लेकर रूपरेखा भी तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस परीक्षाओं से विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर का सही आंकलन होता है।
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इसी क्रम में विद्यालय स्तर पर शिक्षकों ने भी बच्चों की परीक्षा की तैयारी को लेकर विशेष कक्षाएं लगानी शुरू कर दी हैं। अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में मुख्य रूप से अब तक की पढ़ाई का मूल्यांकन होगा, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्यार्थी किस विषय में कितना पारंगत है और आगे किन विषयों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
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डीआईओएस लालजी यादव ने बताया कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षाएं और उसके बाद में अक्तूबर के द्वितीय और तृतीय सप्ताह में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं होंगी। ऐसे में दोनों परीक्षाओं की तैयारी के लिए सभी प्रधानाचार्य को निर्देशित कर दिया गया है।
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अर्द्धवार्षिक परीक्षा के लिए बोर्ड निर्देशों के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, बैठने की योजना, अनुशासन बनाए रखने समेत मूल्यांकन कार्य को लेकर रूपरेखा भी तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस परीक्षाओं से विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर का सही आंकलन होता है।
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इसी क्रम में विद्यालय स्तर पर शिक्षकों ने भी बच्चों की परीक्षा की तैयारी को लेकर विशेष कक्षाएं लगानी शुरू कर दी हैं। अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में मुख्य रूप से अब तक की पढ़ाई का मूल्यांकन होगा, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्यार्थी किस विषय में कितना पारंगत है और आगे किन विषयों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।