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गंगा मैया को नमन कर मिनी कुंभ का समापन
ब्यूरो/बदायूं
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:06 PM IST
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गंगा मैया को नमन कर मिनी कुंभ का समापन
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ध्वज पताका या झंडा यश कीर्ति और पराक्रम का प्रतीक होता है। उसके वेग से नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है। ध्वज का सनातन धर्म में विशेष महत्व व आस्था है। देव स्थल के ध्वज की छत्र-छाया में किए गए कार्य सकुशल संपन्न होते हैं। मिनी कुंभ मेला ककोड़ा के लिए सदियों से ककोड़ा देवी के मंदिर से मेला स्थल पर ध्वज स्थापना की जाती रही है। 15 दिन तक मेला स्थल पर देवी की झंडी लहराती रहती है। मां गंगा और ककोड़ा देवी की कृपा से मेला संपन्न होता है। जिला पंचायत उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सोमवार को जिला पंचायत के प्रशासनिक अधिकारी विनोद कुमार यादव, मेला बाबू मनोज कुमार ने मेला स्थल पर पहुंचकर विधिविधान से मेला स्थल से झंडी को ले जाकर देवी के मंदिर पर स्थापित किया। इसके साथ ही मिनी कुंभ मेला ककोड़ा का समापन हो गया। अगले वर्ष पुन: गंगा मैया और ककोड़ा देवी से मेला की कामना की।
टेंट और खेल तमाशे का सामान बचा
कादरचौक। मिनी कुंभ में अब जहां दूर-दूर तक पॉलिथीन के साथ ही कचरा बिखरा पड़ा है। वहीं मेले में अभी टेंट का सामान और खेल तमाशे का सामान बचा है। लाइट भी गायब है। सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। पीएसी की फ्लड यूनिट सहित कोतवाली भी दो दिन पूर्व ही गायब हो गई। आज रात मे टेंट का सामान भी चला जाएगा। लेकिन मेला को लगने वाली ड्यूटी 15 दिन की होती है। किसी भी विभाग के कर्मचारी दो या तीन दिन से अधिक ड्यूटी नहीं करते हैं। सफाई कर्मी भी मेले में दो दिन ही दिखाई देते हैं। गंगा के तट पर फैला कचरा मेला के बाद निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जो अब तेज हवाओं के चलने पर गंगा में बहेगा या बाढ में बह जाएगा। इससे गंगा प्रदूषित होगी। मेला की ड्यूटी पूरी अवधि तक होती तो यह कचरा निस्तारण हो सकता था। जिला पंचायत भी पूर्णिमा के बाद निष्क्रिय हो जाता है। कैंप कार्यालय पर कोई भी नहीं दिखता है।
मनोरंजन में इस बार हुआ नुकसान
कादरचौक। मेले में मनोरंजन के साधन को ठेके पर लेकर आई याको ऐम्यूजमेंट के सर्कस, मौत का कुआं आदि को इस मेले में कुछ दिन पूर्व ही नोटबंदी के कारण भारी नुकसान हुआ। कंपनी के मैनेजर आरके पंडित के अनुसार मेले में करीब चार लाख का नुकसान हुआ है। नोटबंदी न होती तो अच्छा लाभ होता। बताया कि पिछली बार भी मेला के दूसरे दिन पंचायत चुनाव के कारण कम लोग ही आए थे। लेकिन फिर भी अच्छा लाभ हुआ था। वहीं मेला में आए मध्य प्रदेश के टेंट स्वामी पंकज अग्रवाल का भी काफी सामान गुम हो गया है। उनके मुताबिक 200 तिरपाल, 50 कुर्सी, टेबिल समेत करीब डेढ़ लाख का सामान गायब है।
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नहीं हुआ कोई हादसा, जीडी निल
मिनी कुंभ मेला ककोड़ा में इस बार कोई भी हादसा या अपराध नहीं हुआ। मेला कोतवाली की जीडी निल रही। गंगा में कई लोग डूबे तो लेकिन गोताखोरों की मुस्तैदी और पीएसी की फ्लड यूनिट की चौकसी से सभी को सकुशल निकाल लिया गया। गंगा में डूबने से कोई हादसा नहीं हुआ। जो एक मेला प्रशासन के लिए बड़ी सफलता है।
जिलाधिकारी की थी पैनी नजर
मेला को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए डीएम पवन कुमार के लिए चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने झंडी पूजन से पांच दिन पूर्व मेला स्थल पर सभी विभागों की बैठक कर कड़े निर्देश दिये थे। मंडलायुक्त ने भी बैठक ली थी। डीएम कुमार ने मेले में पूरा समय भी दिया।
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टेंट और खेल तमाशे का सामान बचा
कादरचौक। मिनी कुंभ में अब जहां दूर-दूर तक पॉलिथीन के साथ ही कचरा बिखरा पड़ा है। वहीं मेले में अभी टेंट का सामान और खेल तमाशे का सामान बचा है। लाइट भी गायब है। सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। पीएसी की फ्लड यूनिट सहित कोतवाली भी दो दिन पूर्व ही गायब हो गई। आज रात मे टेंट का सामान भी चला जाएगा। लेकिन मेला को लगने वाली ड्यूटी 15 दिन की होती है। किसी भी विभाग के कर्मचारी दो या तीन दिन से अधिक ड्यूटी नहीं करते हैं। सफाई कर्मी भी मेले में दो दिन ही दिखाई देते हैं। गंगा के तट पर फैला कचरा मेला के बाद निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जो अब तेज हवाओं के चलने पर गंगा में बहेगा या बाढ में बह जाएगा। इससे गंगा प्रदूषित होगी। मेला की ड्यूटी पूरी अवधि तक होती तो यह कचरा निस्तारण हो सकता था। जिला पंचायत भी पूर्णिमा के बाद निष्क्रिय हो जाता है। कैंप कार्यालय पर कोई भी नहीं दिखता है।
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मनोरंजन में इस बार हुआ नुकसान
कादरचौक। मेले में मनोरंजन के साधन को ठेके पर लेकर आई याको ऐम्यूजमेंट के सर्कस, मौत का कुआं आदि को इस मेले में कुछ दिन पूर्व ही नोटबंदी के कारण भारी नुकसान हुआ। कंपनी के मैनेजर आरके पंडित के अनुसार मेले में करीब चार लाख का नुकसान हुआ है। नोटबंदी न होती तो अच्छा लाभ होता। बताया कि पिछली बार भी मेला के दूसरे दिन पंचायत चुनाव के कारण कम लोग ही आए थे। लेकिन फिर भी अच्छा लाभ हुआ था। वहीं मेला में आए मध्य प्रदेश के टेंट स्वामी पंकज अग्रवाल का भी काफी सामान गुम हो गया है। उनके मुताबिक 200 तिरपाल, 50 कुर्सी, टेबिल समेत करीब डेढ़ लाख का सामान गायब है।
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नहीं हुआ कोई हादसा, जीडी निल
मिनी कुंभ मेला ककोड़ा में इस बार कोई भी हादसा या अपराध नहीं हुआ। मेला कोतवाली की जीडी निल रही। गंगा में कई लोग डूबे तो लेकिन गोताखोरों की मुस्तैदी और पीएसी की फ्लड यूनिट की चौकसी से सभी को सकुशल निकाल लिया गया। गंगा में डूबने से कोई हादसा नहीं हुआ। जो एक मेला प्रशासन के लिए बड़ी सफलता है।
जिलाधिकारी की थी पैनी नजर
मेला को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए डीएम पवन कुमार के लिए चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने झंडी पूजन से पांच दिन पूर्व मेला स्थल पर सभी विभागों की बैठक कर कड़े निर्देश दिये थे। मंडलायुक्त ने भी बैठक ली थी। डीएम कुमार ने मेले में पूरा समय भी दिया।