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किसानों ने इफको का गोदाम घेरा, हाईवे पर जाम लगाकर की नारेबाजी
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उझानी (बदायूं)। कृषि उत्पादन मंडी समिति में रविवार को इफको का गोदाम खुला नहीं मिलने पर यूरिया के लिए जुटे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने पहले तो गोदाम पर हंगामा किया फिर नारेबाजी करते हुए बाहर निकलकर बरेली-मथुरा हाईवे पर जाम लगा दिया। किसानों में से ही दो-तीन युवकों ने रोडवेज की एक बस में तोड़फोड़ की कोशिश की।
बरेली-मथुरा हाईवे पर कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर स्थित इफको के गोदाम से नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतरे किसानों ने अपनी बाइकें और साइकिलें हाईवे पर खड़ी कर दीं। नारेबाजी करते हुए उन्होंने वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया। चार-पांच रोडवेज बसों को रोक लिया गया। उसी दौरान बदायूं की ओर से कासगंज को निकली रोडवेज की बस पर दो युवक टूट पड़े। उनके पास डंडे भी थे। वह तो गनीमत रही जो चालक ने रोडवेज को दौड़ा लिया नहीं तो उसके शीशे चकनाचूर कर दिए जाते। इसके बाद चालक खुद ही बसों समेत निजी वाहनों से नीचे उतरकर खड़े हो गए।
हाईवे पर जाम की भनक लगते ही दरोगा जितेंद्र सक्सेना पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को यह कहते हुए समझा दिया कि रविवार होने की वजह से गोदाम पर यूरिया का वितरण नहीं किया गया है। सोमवार को यूरिया का रोज की तरह वितरण होगा। एक युवक ने पुलिस कर्मियों को आड़े हाथ लेने की कोशिश की तो उसे हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद किसानों ने साइकिलें और बाइकें हाईवे पर से हटाकर आवागमन सुचारु करा दिया।
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उझानी। रविवार को किसानों का गुस्सा फूटने के पीछे वजह यह रही कि पिछले रविवार को इफको गोदाम पर यूरिया बांटी गई थी। अब फिर रविवार को भी किसान यूरिया मिलने की आशा में पहुंच गए। वहां ताला लगा देखकर वे गुस्सा गए, क्योंकि कई-कई किलोमीटर से वे लोग पहुंचे थे।
प्रदर्शनकारियों में शामिल विजय कुमार, नेमपाल, लक्ष्मण सिंह और आशीष ने बताया कि पिछले रविवार को यूरिया का वितरण किया गया था, लेकिन शनिवार को गोदाम बंद करते समय किसी भी किसान से यह नहीं कहा गया कि रविवार को गोदाम बंद रहेगा। इसी वजह से अचानक लोग भड़क गए और जाम लगा दिया। करीब आधा-पौन घंटा तक वाहन फंसे रहे। इससे जाम में फंसे वाहन सवार लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
उझानी। गुस्साए किसानों ने जाम खोलने से पहले दरोगा जितेंद्र सक्सेना को बताया कि यूरिया का वितरण करने में कुछेक पल्लेदारों की भूमिका संदिग्ध है। एक पल्लेदार तो 50 रुपये अतिरिक्त वसूल कर यूरिया का कट्टा मुहैया करा देता है। उसकी शिकायत गोदाम प्रभारी से भी की गई थी, लेकिन उन्होंने पल्लेदार की हरकतों पर गौर नहीं किया। इससे कालाबाजारी को भी बढ़ावा मिल रहा है। किसानों में सत्यभान ओर भान सिंह के इस आरोप के बारे में हकीकत जानने के लिए गोदाम प्रभारी देवेंद्र सिंह को कॉल की गई तो परिजनों ने उन्हें दवा लेने बाहर चले जाने की कहकर शाम को बात करने की कहकर टाल दिया।
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बरेली-मथुरा हाईवे पर कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर स्थित इफको के गोदाम से नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतरे किसानों ने अपनी बाइकें और साइकिलें हाईवे पर खड़ी कर दीं। नारेबाजी करते हुए उन्होंने वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया। चार-पांच रोडवेज बसों को रोक लिया गया। उसी दौरान बदायूं की ओर से कासगंज को निकली रोडवेज की बस पर दो युवक टूट पड़े। उनके पास डंडे भी थे। वह तो गनीमत रही जो चालक ने रोडवेज को दौड़ा लिया नहीं तो उसके शीशे चकनाचूर कर दिए जाते। इसके बाद चालक खुद ही बसों समेत निजी वाहनों से नीचे उतरकर खड़े हो गए।
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हाईवे पर जाम की भनक लगते ही दरोगा जितेंद्र सक्सेना पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों को यह कहते हुए समझा दिया कि रविवार होने की वजह से गोदाम पर यूरिया का वितरण नहीं किया गया है। सोमवार को यूरिया का रोज की तरह वितरण होगा। एक युवक ने पुलिस कर्मियों को आड़े हाथ लेने की कोशिश की तो उसे हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद किसानों ने साइकिलें और बाइकें हाईवे पर से हटाकर आवागमन सुचारु करा दिया।
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उझानी। रविवार को किसानों का गुस्सा फूटने के पीछे वजह यह रही कि पिछले रविवार को इफको गोदाम पर यूरिया बांटी गई थी। अब फिर रविवार को भी किसान यूरिया मिलने की आशा में पहुंच गए। वहां ताला लगा देखकर वे गुस्सा गए, क्योंकि कई-कई किलोमीटर से वे लोग पहुंचे थे।
प्रदर्शनकारियों में शामिल विजय कुमार, नेमपाल, लक्ष्मण सिंह और आशीष ने बताया कि पिछले रविवार को यूरिया का वितरण किया गया था, लेकिन शनिवार को गोदाम बंद करते समय किसी भी किसान से यह नहीं कहा गया कि रविवार को गोदाम बंद रहेगा। इसी वजह से अचानक लोग भड़क गए और जाम लगा दिया। करीब आधा-पौन घंटा तक वाहन फंसे रहे। इससे जाम में फंसे वाहन सवार लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
उझानी। गुस्साए किसानों ने जाम खोलने से पहले दरोगा जितेंद्र सक्सेना को बताया कि यूरिया का वितरण करने में कुछेक पल्लेदारों की भूमिका संदिग्ध है। एक पल्लेदार तो 50 रुपये अतिरिक्त वसूल कर यूरिया का कट्टा मुहैया करा देता है। उसकी शिकायत गोदाम प्रभारी से भी की गई थी, लेकिन उन्होंने पल्लेदार की हरकतों पर गौर नहीं किया। इससे कालाबाजारी को भी बढ़ावा मिल रहा है। किसानों में सत्यभान ओर भान सिंह के इस आरोप के बारे में हकीकत जानने के लिए गोदाम प्रभारी देवेंद्र सिंह को कॉल की गई तो परिजनों ने उन्हें दवा लेने बाहर चले जाने की कहकर शाम को बात करने की कहकर टाल दिया।