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बछेली में वाल्मीकि लोगों को मंदिर में नहीं करने देते पूजा

अमर उजाला ब्यूरो बदायूं। Updated Sun, 02 Jul 2017 12:25 AM IST
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balmiki - फोटो : amar ujala
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वाल्मीकि परिवार ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

सहैत थाना क्षेत्र के बछेली गांव के वाल्मीकि परिवार को आज भी छूआछूत का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि न तो गांव के मंदिर में उन्हें पूजा करने दिया जाता है और न ही वे सार्वजनिक हैंडपंप से पानी पी सकते हैं। जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित भी किया जाता है। पीड़ित परिवार ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से कर न्याय की गुहार लगाई है।
बछेली गांव में वाल्मीकि परिवार के मुखिया गंगासहाय हैं। इनका घर गांव में बिल्कुल अलग है। इसमें इनके चार बेटे- धर्मपाल, रामदास, वीरपाल और देशराज अपने बच्चों के साथ रहते हैं। कुल 25-30 लोगों का कुनबा है। गंगासहाय बताते हैं कि उनके परिवार में किसी लड़के-लड़की की शादी के दौरान देवताओं का पूजन गांव के प्राचीन मंदिर में नहीं करने दिया जाता है। ऐसे में, दूसरे गांव टिकरा में स्थित मंदिर में पूजा के लिए जाना पड़ता है। गंगा सहाय के बेटे देशराज ने बताया कि पिछले दिनों गांव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्घार कराया जा रहा था। इसमें सहयोग बतौर उन्होंने अपनी ओर से 21 सौ रुपये पुजारी को दिए लेकिन वह रुपए बाद में यह कहकर वापस करा दिए गए कि वाल्मीकि लोगों का मंदिर से कोई लेना-देना नहीं है। रामदास की पत्नी गंगा देवी का कहना है कि उनके परिवार के बच्चे गांव में लगे सार्वजनिक हैंडपंप पर पानी पी लें तो उनको भगा दिया जाता है। सार्वजनिक होली पर आखर नहीं डालने दी जाती। गंगासहाय के पौत्र कुलदीप ने बताया कि सावन मास के कांवरियों की टोली में भी शामिल नहीं होने दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबका साथ-सबके विकास की बात करीते हैं इसलिए सामाजिक भेदभाव की शिकायत उन्हें भेजी है ताकि हम लोगों को न्याय मिल सके।


पहले भी हुआ था विवाद
गांव में प्राचीन मंदिर पर वाल्मीकि समाज की ओर से पूजा करने को लेकर करीब 20 साल पहले भी विवाद हुआ था। गांव के कुछ लोग बताते हैं कि उस वक्त विवाद होने के बाद तय हुआ था कि गांव में दूसरा मंदिर भी बनाया जाएगा। हालांकि तब तक वाल्मीकि परिवार इस मंदिर में पूजा करते रहेंगे लेकिन वाल्मीकि समाज के लोग दूसरा मंदिर नहीं बनवा सके। बाद में वह पड़ोसी गांव टिकरा के मंदिर में पूजा-अर्चना को जाने लगे थे।

अभी मामला संज्ञान में नहीं आया है फिर भी मामले को दिखवाएंगे, अगर सामाजिक पक्षपात की बात सामने आती है तो इसको बेहद गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश कुमार सिंह, एसडीएम दातागंज

शिकायत की कोई जानकारी मुझे नहीं है। रही मंदिर में पूजा करने की बात तो किसने रोका। मेरे संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं है। गांव में विकास कराने का काम हो रहा है।
-रामेश्वर- पति ग्राम प्रधान शांति देवी

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