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भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए वर्षा यादव पर लगाया दांव
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बदायूं। भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव की पत्नी वर्षा यादव पर दांव लगा दिया है। इसके पीछे भाजपा की मंशा सपा के ठोस वोट बैंक माने जाने वाले यादव वर्ग में सेंधमारी करने की है। वहीं, सपा की नजर भी भाजपा के मौर्य-शाक्य बिरादरी के वोट बैंक पर है। हालांकि सपा ने अभी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा और सपा के बीच मुकाबला होना है। नामांकन पत्रों की बिक्री के अंतिम दिन शुक्रवार को काफी ऊहापोह के बाद भाजपा की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए वर्षा यादव के नाम का एलान कर दिया गया। वर्षा यादव ने शुक्रवार को पर्चा भी खरीद लिया है। सपा की ओर से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं किया गया। इस बीच सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव की पुत्रवधू ऐश्वर्या यादव और पूर्व विधायक सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य ने पर्चा खरीद कर राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर ली है। सपा सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य को वर्षा यादव के मुकाबले मैदान में उतार सकती है। हालांकि, सत्तापक्ष से तकरार में मौके की नजाकत भांपकर ऐश्वर्या यादव को भी तैयार रखा गया है।
जिले की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इनमें यादवों के साथ मौर्य-शाक्य- कुशवाहा बिरादरी का भी अच्छा असर है। यादव वर्ग को परंपरागत सपा का वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में सपा की तैयारी आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के मौर्य-शाक्य वोट बैंक में सेंधमारी की है। दरअसल, बसपा से निष्कासित सिनोद शाक्य को भी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जमीन की तलाश है। ऐसे में उनकी सपा से नजदीकियां काफी बढ़ी हुई हैं।
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नामांकन में गिनती के लोग शामिल होंगे
कलक्ट्रेट में शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन से पूर्व जिला प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट में बेरिकेडिंग कराई गई। इस दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा। शनिवार को गिनती के लोग ही प्रत्याशियों के साथ नामांकन कराने अंदर जा सकेंगे। शनिवार 26 जून को नामांकन पत्र दोपहर तीन बजे तक भरे जाएंगे। इसके बाद इसी दिन कार्य समाप्ति तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। 29 जून को नाम वापसी होगी। तीन जुलाई को अपराह्न तीन बजे तक मतदान होगा। इसके बाद वोटों की गिनती होगी और फिर नतीजा घोषित कर दिया जाएगा। सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रवेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष का नामांकन कलक्ट्रेट परिसर में होना है।अब तक तीन दावेदारों ने पर्चे खरीदे गए हैं।
ये है जिला पंचायत का गणित
जिला पंचायत के निर्वाचित कुल 51 सदस्यों में 26 सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं। इसके अलावा 14 सदस्य सामान्य और 11 अनुसूचित जातियों से ताल्लुक रखते हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के कुल 26 सदस्यों में सबसे ज्यादा 13 यादव बिरादरी के हैं। भाजपा के पास 17 और सपा के पास 12 सदस्य हैं। निर्दलियों की संख्या 15 है। इसके अलावा बसपा के छह और कांग्रेस का एक सदस्य है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कम से कम 26 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। भाजपा और सपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। पूर्व विधायक सिनोद शाक्य पंचायत चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही निर्दलियों की घेराबंदी में लगे हुए हैं। भाजपा से हरीश शाक्य की पत्नी रेखा शाक्य का नाम दावेदारी से बाहर होने के बाद से सिनोद शाक्य ज्यादा सक्रिय हैं। इतना तो साफ है कि बिना निर्दलियों के जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कोई नहीं पहुंच सकता। अगर सपा के साथ मिलकर सिनोद शाक्य निर्दलियों को भाजपा के साथ जाने से रोकने में कामयाब होते हैं तो भाजपा को मुश्किल हो सकती है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा और सपा के बीच मुकाबला होना है। नामांकन पत्रों की बिक्री के अंतिम दिन शुक्रवार को काफी ऊहापोह के बाद भाजपा की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए वर्षा यादव के नाम का एलान कर दिया गया। वर्षा यादव ने शुक्रवार को पर्चा भी खरीद लिया है। सपा की ओर से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं किया गया। इस बीच सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव की पुत्रवधू ऐश्वर्या यादव और पूर्व विधायक सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य ने पर्चा खरीद कर राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर ली है। सपा सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य को वर्षा यादव के मुकाबले मैदान में उतार सकती है। हालांकि, सत्तापक्ष से तकरार में मौके की नजाकत भांपकर ऐश्वर्या यादव को भी तैयार रखा गया है।
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जिले की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इनमें यादवों के साथ मौर्य-शाक्य- कुशवाहा बिरादरी का भी अच्छा असर है। यादव वर्ग को परंपरागत सपा का वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में सपा की तैयारी आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के मौर्य-शाक्य वोट बैंक में सेंधमारी की है। दरअसल, बसपा से निष्कासित सिनोद शाक्य को भी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जमीन की तलाश है। ऐसे में उनकी सपा से नजदीकियां काफी बढ़ी हुई हैं।
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नामांकन में गिनती के लोग शामिल होंगे
कलक्ट्रेट में शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन से पूर्व जिला प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट में बेरिकेडिंग कराई गई। इस दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा। शनिवार को गिनती के लोग ही प्रत्याशियों के साथ नामांकन कराने अंदर जा सकेंगे। शनिवार 26 जून को नामांकन पत्र दोपहर तीन बजे तक भरे जाएंगे। इसके बाद इसी दिन कार्य समाप्ति तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। 29 जून को नाम वापसी होगी। तीन जुलाई को अपराह्न तीन बजे तक मतदान होगा। इसके बाद वोटों की गिनती होगी और फिर नतीजा घोषित कर दिया जाएगा। सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रवेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष का नामांकन कलक्ट्रेट परिसर में होना है।अब तक तीन दावेदारों ने पर्चे खरीदे गए हैं।
ये है जिला पंचायत का गणित
जिला पंचायत के निर्वाचित कुल 51 सदस्यों में 26 सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं। इसके अलावा 14 सदस्य सामान्य और 11 अनुसूचित जातियों से ताल्लुक रखते हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के कुल 26 सदस्यों में सबसे ज्यादा 13 यादव बिरादरी के हैं। भाजपा के पास 17 और सपा के पास 12 सदस्य हैं। निर्दलियों की संख्या 15 है। इसके अलावा बसपा के छह और कांग्रेस का एक सदस्य है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कम से कम 26 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। भाजपा और सपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है। पूर्व विधायक सिनोद शाक्य पंचायत चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही निर्दलियों की घेराबंदी में लगे हुए हैं। भाजपा से हरीश शाक्य की पत्नी रेखा शाक्य का नाम दावेदारी से बाहर होने के बाद से सिनोद शाक्य ज्यादा सक्रिय हैं। इतना तो साफ है कि बिना निर्दलियों के जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कोई नहीं पहुंच सकता। अगर सपा के साथ मिलकर सिनोद शाक्य निर्दलियों को भाजपा के साथ जाने से रोकने में कामयाब होते हैं तो भाजपा को मुश्किल हो सकती है।