फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   political,badaun,badaun 145 vidhan sabha 2022, bisauli 142 vidhan sabha 2022, sahaswan 143 vidhan sabha 2022, bilsi 144 vidhan sabha 2022, shekhupur 146 vidhan sabha 2022, dataganj 147 vidhan sabha 2022

बिल्सी ः पहली बार ताल ठोंक रहे कई सूरमा, जनता सबको दे रही जीत का भरोसा

Sat, 12 Feb 2022 01:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 12 Feb 2022 01:24 AM IST
विज्ञापन
political,badaun,badaun 145 vidhan sabha 2022, bisauli 142 vidhan sabha 2022, sahaswan 143 vidhan sabha 2022, bilsi 144 vidhan sabha 2022, shekhupur 146 vidhan sabha 2022, dataganj 147 vidhan sabha 2022
रिंकू पांडेय / रविंद्र रवि
विज्ञापन

बदायूं। मौर्य शाक्य बाहुल्य कही जाने वाली बिल्सी विधानसभा सीट का चुनावी गणित इस बार उलझा हुआ लग रहा है। कई सियासी सूरमा इस इलाके में पहली बार दांव आजमा रहे हैं। भाजपा के सामने यहां सीट बचाए रखने की चुनौती है तो दूसरे दल यहां जाति धर्म के दूसरे समीकरणों से अपना झंडा बुलंद करने की जुगत में हैं।
बिल्सी सीट से अब तक पंडित आरके शर्मा विधायक थे। क्षेत्र और दल बदलकर चुनाव लड़ने के माहिर शर्मा इस बार बरेली जिले की आंवला सीट से सपा के उम्मीदवार हैं। इस लिहाज से बिल्सी सीट पर भाजपा को यहां नया प्रत्याशी तय करना ही था। इससे पहले महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने सपा से गठबंधन कर अपने बेटे चंद्रप्रकाश मौर्य को गठबंधन प्रत्याशी बना दिया। वहीं भाजपा से वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य एकाएक सपा में चले गए। ऐसे में अगड़े वर्ग की बजाय भाजपा ने पलटवार करते हुए अपने संगठन के पदाधिकारी हरीश शाक्य को यहां प्रत्याशी घोषित कर दिया।
विज्ञापन

सपा से टिकट न मिलने पर लंबे समय से तैयारी कर रहीं ममता शाक्य बसपा से चुनाव मैदान में कूद पड़ी हैं तो भाजपा से टिकट की आस टूटने पर अंकित चौहान ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दावेदारी ठोंक दी। इस बीच राष्ट्रीय परिवर्तन दल ने ठाकुर वीपी सिंह सोलंकी को चुनाव मैदान में उतार दिया। सहसवान चेयरमैन मीर हादी अली उर्फ बाबर मियां ने भीम आर्मी के राजनीतिक फ्रंट आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी बतौर बिल्सी से नामांकन करा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

बात प्रत्याशियों की मजबूती और दावों की करें तो भाजपा हरीश शाक्य को टिकट देकर परंपरागत सवर्ण वोटरों के साथ मौर्य-शाक्य वोटरों को साधकर चुनावी जंग जीतने की तैयारी में है। वहीं इस सीट पर शाक्य वोटरों की बहुलता ही महान दल के नेताओं को बिल्सी खींच लाई है। चंद्रप्रकाश ने महान दल की बजाय साइकिल चुनाव चिह्न लेकर सपा के वोट बैंक को साधकर जीत की डगर तलाशने का जरिया बनाया है। बसपा की ममता शाक्य को कैडर वोट के साथ ही बिरादरी के शाक्य वोटरों से जीत की उम्मीद है। वह बांस बरौलिया गांव की निवासी हैं तो खुद को स्थानीय और दूसरों को बाहरी बताकर भी चुनावी गणित बना रही हैं। सपा के मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने का इंतजाम मीर हादी अली ने किया है। सहसवान कस्बे का काफी हिस्सा व गांव बिल्सी विधानसभा में हैं। सहसवान चेयरमैन होने के नाते बाबर को इसका लाभ मिल सकता है।
इधर, कांग्रेस के अंकित चौहान व रापद के ठाकुर वीपी सिंह को भी अपनी जीत का आंकड़ा इस इलाके में क्षत्रिय वोटों की बहुलता से मिलता दिख रहा है। सवर्ण वर्ग की दूसरी बिरादरियों में भी यह नेता सेंध लगा रहे हैं। इनके अलावा राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के किशोर कुमार, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के शैलेंद्र कुमार मिश्रा, आम आदमी पार्टी के देवेंद्र व दो निर्दलीय दीनानाथ और राजाराम शाक्य भी इलाके में प्रचार कर जीत का दावा कर रहे हैं। संवाद
-
कुल मतदाता- 354812
पुरुष मतदाता- 188790
महिला मतदाता- 166022
जातीय समीकरण
मुस्लिम- 53 हजार
मौर्य-शाक्य- 55 हजार
यादव- 36 हजार
जाटव -40 हजार
क्षत्रिय- 50 हजार
वैश्य- 17 हजार
ब्राह्मण- 20 हजार
कश्यप- 13 हजार
लोधे- 10 हजार
पाली- 05 हजार
नाई- 11 हजार
अन्य- 44812 हजार
प्रमुख मुद्दे
बिल्सी में रोडवेज बस डिपो
बिल्सी में बाईपास
कछला में गंगाघाट पर असुविधाएं
उझानी में राजकीय महाविद्यालय
सिचाई के संसाधनों की कमी
-
आरक्षित सीट पर चमके शोषित वर्ग के नेता, कांग्रेस ने भी खूब किया राज
1974 में पहली बार अस्तित्व में आई बिल्सी विधानसभा सीट पर सर्वाधिक पांच बार कांग्रेस का कब्जा रहा। पहली बार हालांकि भारतीय जनसंघ के सोहनलाल ने जीत हासिल की लेकिन इसके बाद जनता पार्टी के सोहनपाल जीते। कांग्रेस के केसोंराम तीन बार विधायक बने। सुरक्षित सीट से केसोंराम की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे भोलाशंकर मौर्या ने संभाला। वह दो बार कांग्रेस और एक बार बसपा से विधानसभा में पहुंचे। इस बीच जनता दल से सेवानिवत्त आईएएस अफसर दौलतराम की किस्मत चमकी और विधायकी जीते। इनमें भी सबसे रोचक चुनाव 1996 में देखने को मिला जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलित वोटों की बहुतायत के मद्देनजर उस वक्त बिल्सी और हरौड़ा सीट से एक साथ चुनाव लड़ा। बिल्सी सीट पर करीब ढाई हजार वोट के अंतर से उन्होंने भाजपा विधायक योगेंद्र सागर को हरा जरूर दिया लेकिन कम अंतर से जीत की वजह से बिल्सी से इस्तीफा दे दिया।
उप चुनाव में कांग्रेस के भोलाशंकर मौर्या ने बसपा का दामन थामकर जीत हासिल की। पूर्व मंत्री मौर्या के निधन के बाद सपा से उनके बेटे आशुतोष मौर्या जीते। बाद में भाजपा के योगेंद्र सागर बसपा में चले गए और चुनाव जीत गए। वर्ष-2012 में परिसीमन के बाद बिल्सी सीट सामान्य हुई और उसमें उझानी समेत कछला कस्बों को शामिल कर लिया गया। सहसवान विधानसभा का भी बड़ा क्षेत्र बिल्सी में शामिल हो गया। परिसीमन के बाद जातीय समीकरण भी बदल गए। पहली बार चुनाव लड़े बसपा के हाजी मुसर्रत अली उर्फ बिट्टन ने सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल को हराया तो वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के आरके शर्मा की जीत हुई। हाजी बिट्टन चुनाव हार गए। इस सीट पर सर्वाधिक केसोंराम और उनके पुत्र भोलाशंकर समेत नाती आशुतोष मौर्या का कब्जा रहा। भोलाशंकर मौर्य लगातार वीर बहादुर सिंह और नारायण दत्त तिवारी की सरकार में राज्यमंत्री रहे थे। जनता दल सरकार में दौलतराम भी राज्यमंत्री बने लेकिन उनका राजनीतिक सफर ज्यादा नहीं रहा। भाजपा दो तो सपा यहां एक बार जीती है।
-
बिल्सी में विकास तो हुआ पर बरसों से रोडवेज अड्डा मांग रही है जनता
- हमने बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाकों में घूमकर विधानसभा चुनाव को लेकर जनता का मन टटोलने का प्रयास किया तो लोगों ने इलाके में अलग-अलग तरह की समस्याओं से अवगत कराया। 1952 से ही बिल्सी नगर मुख्यालय है। पिछले कुछ साल में यहां विकास तो काफी हुआ है मगर जनता को जो सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए वह आज तक नहीं मिल पा रहीं हैं। गल्ला व्यापारी लोकेश बाबू का कहना था कि बिल्सी नगर व्यापार की दृष्टि से रुहेलखंड मंडल में अपना अहम स्थान रखता है। बावजूद इसके यहां की जनता को यातायात की बेहतर सुविधाएं आज तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने बताया 25 वर्षों से क्षेत्र की जनता बिल्सी नगर में रोडवेज डिपो की स्थापना कराने को लेकर मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से करती चली आ रही है लेकिन वह इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि बिल्सी की जनता को रोडवेज की बेहतर सुविधा नसीब नहीं हो पा रही है।

बिल्सी नगर निवासी डॉ उमेंद्र गुप्ता का कहना है कि कई वर्षों से क्षेत्र में वाहनों की संख्या काफी बढ़ी है। नगर के अंबियापुर चौराहे से लेकर खैरी बस स्टैंड तक अक्सर जाम की समस्या रहती है। हालांकि नगर की जनता ने बाईपास निर्माण को लेकर अपनी मांग सरकार के सामने रखी है मगर अब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। इसके कारण जाम की समस्या रहती है। शाहनवाज अल्वी ने बताया कि पूर्व में विधायक रहे स्वर्गीय भोलाशंकर मौर्य ने क्षेत्र की उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नगर में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना तो करा दी। इससे क्षेत्र की जनता को काफी राहत मिली है पर कॉलेज में बीएससी एवं बीकॉम की कक्षाएं न लगने के कारण यहां के छात्रों को बाहर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसलिए क्षेत्र की जनता को उसी प्रत्याशियों को अपना वोट देना चाहिए जो उनकी समस्याओं का निराकरण करने में सक्षम हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed