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सांसद संघमित्रा के तेवर से सकते में भाजपा, पार्टी में लामबंदी

Thu, 03 Mar 2022 11:30 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 11:30 PM IST
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संघमित्रा मौर्य, सांसद। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। कुशीनगर के फाजिलपुर में स्वामी प्रसाद मौर्य के काफिले पर हुए कथित हमले से शुरू हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा बदायूं में भी चर्चा का केंद्र बना है। वहां लाठी लेकर घूमतीं और भाजपाइयों को गुंडा बताती उनकी बेटी स्थानीय सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य का वीडियो बदायूं में भी जबर्दस्त वायरल हो रहा है।
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बाद में हालांकि सांसद ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की सराहना कर बात साधने की कोशिश की है पर सूत्र बताते हैं कि गेंद पाले से बाहर हो चुकी है। पार्टी में लामबंदी तेज हो गई है।
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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन सपा सांसद धर्मेंद्र यादव को संघमित्रा ने हराया था। इससे पहले संघमित्रा की यहां कोई निजी पहचान नहीं थी। उनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा की प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और बदायूं के प्रभारी थे। पार्टी में अपने कद, बदायूं लोकसभा सीट पर स्थानीय प्रभावशाली नेता का अभाव और मौर्य शाक्य बिरादरी के वोटों की बहुलता की बदौलत स्वामी प्रसाद मौर्य ने बेटी के लिए हाईकमान से यह सीट हासिल की थी। उन दिनों संघमित्रा उस वक्त चर्चा में आईं जब उन्होंने मंच से सपा को गुंडों की पार्टी कहते हुए ललकारा था कि वे नहीं जानते मैं सबसे बड़ी गुंडी हूं।
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फाजिलपुर में एक बार फिर सांसद ने लाठी लेकर सड़क पर सरेआम गुस्सा दिखाकर अपनी दबंगई दिखाई है। शुरुआत में भाजपा और फिर भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ उनकी बयानबाजी यहां भी खूब वायरल हो रही है। सांसद वीडियो में अपील करती दिख रहीं हैं कि भाजपा प्रत्याशी को हराकर फाजिलनगर की जनता पिताजी को जिताए और दबंगों को उनके घर में कैद करने का काम करे। खुद महिला होने के नाते भी वह माताओं-बहनों से भी इसी तरह की अपील करती दिख रहीं हैं।
सपा प्रत्याशी पिता को जिताने की भाजपा सांसद की अपील को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने असहज स्थिति पैदा हो गई है और वह कमेंट करने से बच रहे हैं, वहीं सांसद से जुड़े पार्टी व निजी कार्यकर्ता भी खामोश हैं।
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प्रचार से दूर रहीं, बस नामांकन में दिखीं सांसद
चुनाव से पहले ही जहां स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा से नाता जोड़ लिया था वहीं सांसद संघमित्रा मौर्य ने भी भाजपा के कार्यक्रमों से पर्याप्त दूरी बना ली थी। स्वामी के पार्टी छोड़ने के दिनों में वह लखनऊ में ही रहीं। मीडिया को बताया गया कि उनकी तबीयत खराब है। जिले में वह उस दिन आईं जब शहर व बिल्सी सीट के भाजपा प्रत्याशी नामांकन कराने गए थे। सांसद केवल चुनिंदा भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन में शामिल हुईं थीं। यहां मीडिया से बात में कहा था कि वह भाजपा के साथ हैं। जिले की सभी छह सीटें भाजपा जीतेगी। उसके बाद वह प्रचार करने नहीं आईं। इसी तरह पंचायत चुनाव में वह केवल मतदान के दिन ही यहां पहुंची थीं।
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अपर्णा के बहाने की अगड़ों-पिछड़ों की बात
सांसद संघमित्रा कुछ महीनों से भाजपा की प्रदेश व जिला इकाई से आहत दिख रही हैं जिसका आभास उनकी फेसबुक पोस्ट व गतिविधियों से होता रहता है। दरअसल उनको कुछ समय पहले लखनऊ में भाजपा पिछड़ा मोर्चा के कार्यक्रम में मंच पर बोलने पर टोक दिया गया था। उस वक्त मंच पर सीएम योगी व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी मौजूद थे। मंच पर ही संघमित्रा ने अपनी नाराजगी का अहसास करा दिया था। इसके बाद उन्होंने भाजपा में पिछड़ों की राजनीति को अलग धार देने का प्रयास किया। इसी क्रम में कुछ दिनों पहले मुलायम परिवार की बहू अपर्णा के भाजपा में आने पर भी उन्होंने तंज कसा था और उन्हें बिष्ट (अगड़ा) व खुद को पिछड़ा बताकर पोस्ट डाली थी।
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सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहीं सांसद
फेसबुक पर लाइव डालने के बाद सांसद डॉ. संघमित्रा सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। फाजिलपुर के उनके कई और वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। साथ ही इन सभी वीडियो पर कमेंट की बाढ़ आई हुई है। इनमें करीब तीस फीसदी कमेंट उनके समर्थकों के हैं जो उनकी बात को सही ठहराते हुए उनका साथ देने का दम भर रहे हैं। इसके अलावा करीब सत्तर फीसदी कमेंट विरोध में आ रहे हैं। इनमें भी करीब बीस फीसदी कमेंट काफी तीखे हैं। इस तरह सोशल मीडिया पर सांसद को चौतरफा घेरा जा रहा है। अधिकतर लोग सलाह दे रहे हैं कि उन्हें अब उसी पार्टी में चले जाना चाहिए जहां उनके पिता चले गए हैं। सपाई इस मामले में कमेंट से बच रहे हैं।
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बदायूं जिलाध्यक्ष राजीव पर फाजिलपुर जिताने की जिम्मेदारी
बदायूं भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता 21 फरवरी से फाजिलपुर में ही हैं। पार्टी की ओर से वह वहां के विधानसभा क्षेत्र प्रवासी बनाकर भेजे गए हैं और भाजपा प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी दी गई है। वह तब से लगातार फाजिलपुर विधानसभा क्षेत्र में ही प्रवास व दौरा कर रहे हैं। उनसे फाजिलपुर के घटनाक्रम पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि सब सार्वजनिक है, कुछ बताने या छुपाने की जरूरत नहीं है। बताया कि वहां के भाजपा प्रत्याशी साफ सुधरी छवि के हैं। उनके पिता लगातार दो बार से विधायक हैं। विरोधियों की दाल नहीं गल रही है तो आरोप लगा रहे हैं।
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बीएल वर्मा बोले- गुंडागर्दी के खिलाफ ही भाजपा ने संघमित्रा को बनाया सांसद
सांसद संघमित्रा ने फेसबुक पर डाले गए लाइव में कटाक्ष किया है कि वह बदायूं में हो रहे खेला को हाईकमान के सामने रखेंगी। यहां सभी चुनावों में खेल हुआ है। उनके पास काफी साक्ष्य हैं जिन्हें जरूरत के आधार पर सामने रखा जाएगा। कहा है कि वह बदायूं की जनता द्वारा चुनी गई सांसद हैं। ऐसी नेता नहीं हैं जो किसी ने कृपा दृष्टि कर दी और बैकडोर से पार्लियामेंट में पहुंच गईं। स्थानीय स्तर पर सांसद के कटाक्ष को केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा से जोड़कर देखा जा रहा है जो पार्टी के कार्यकर्ता थे। संगठन में काम करते हुए सीधे चुनाव के बजाय राज्यसभा के सांसद और फिर केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री बने। इस मामले में हमने बीएल वर्मा से बात की तो उनका कहना था कि वह भाजपा के अनुशासित सिपाही हैं। उन्होंने कभी किसी पर कटाक्ष नहीं किया। सांसद संघमित्रा मौर्य को बदायूं जिले में सपा की गुंडागर्दी के खिलाफ जनता व भाजपा कार्यकर्ताओं ने वोट देकर सांसद बनाया था। अब वह भाजपा वालों पर ही गुंडागर्दी का आरोप लगा रहीं हैं। इस मामले में किसी को कुछ कहने की जरूरत नहीं, सारे वीडियो और बयान सार्वजनिक हैं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जो उचित होगा, वह करेगा।

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मैं नहीं, वक्त देगा विरोधियों को जवाब : संघमित्रा
सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य से सोशल मीडिया पर हो रहे कमेंट को लेकर बात की गई तो उनका कहना था कि मैं क्या जवाब दूं, वक्त पर सब छोड़ दिया है। उनके खिलाफ टिप्पणी करने वालों को अब वक्त ही जवाब देगा। बताया कि वह अब कुशीनगर से लखनऊ आवास पर आ गईं हैं। चुनाव के बाद बदायूं आएंगी और जनता व कार्यकर्ताओं से मिलेंगी। संवाद
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