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जानिए छहों विधानसभा सीटों के प्रमुख प्रत्याशियों के बारे में

Mon, 14 Feb 2022 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 14 Feb 2022 12:57 AM IST
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बदायूं। जिले की छह विधानसभा सीटों पर प्रमुख प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा, सपा-महानदल गठबंधन, बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत के लिए ताकत लगा दी है। रापद भी कुछ सीट पर जोर आजमाइश कर रहा है।
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बदायूं सदर
भाजपा- महेश चंद्र गुप्ता
मजबूती : मौजूदा विधायक, भाजपा का मजबूत संगठन और नगर विकास राज्यमंत्री के रूप में किया काम।
कमजोरी : शहर में पालिका स्तर की सफाई, निर्माण कार्य की खराब स्थिति, कुर्मी वोटों में बिखराव की आशंका।
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सपा- हाजी रईस अहमद
मजबूती: सपा सुप्रीमो की सभा से बना माहौल, टिकट के दूसरे दावेदारों को साधने की कोशिश।
कमजोरी: बाहरी प्रत्याशी का ठप्पा, पूर्व शहर विधायक आबिद रजा के तीखे विरोध से नुकसान की आशंका।
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बसपा- राजेश कुमार सिंह
मजबूती : सजातीय व बसपा का कैडर वोट, आबिद रजा फैक्टर से मुस्लिम वोटों की उम्मीद।
कमजोरी : व्यवसायी से राजनीति में आने का पहला अनुभव, बसपा के बड़े नेताओं की चुनाव से दूरी।
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कांग्रेस- रजनी सिंह
मजबूती : क्षेत्र में इकलौती महिला प्रत्याशी, गांव-गांव तक जनसंपर्क कर पहुंच बनाना।
कमजोरी: कांग्रेस पार्टी स्तर पर चमक का अभाव, पार्टी में तत्काल आमद कर टिकट लेना।
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शेखूपुर
भाजपा : धर्मेंद्र शाक्य
मजबूती : भाजपा का बूथ स्तर तक मजबूत संगठन। मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि और सरकार की कल्याणकारी योजनाएं।
कमजोरी : विधानसभा क्षेत्र के गंगा के तटवर्ती गांवों में विकास न होना, शिक्षा के लिहाज से पिछड़ापन।
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सपा : हिमांशु यादव
मजबूती : युवा प्रत्याशी होने के साथ पार्टी संगठन की एकजुटता। गंगा के तटवर्ती गांवों के पिछडे़पन का मुद्दा।
कमजोरी : सपा के मुस्लिम वोट बैंक में बसपा प्रत्याशी मुस्लिम खां की सेंधमारी की आशंका। भाजपा की बूथ स्तर तक पकड़।
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बसपा- मुस्लिम खां
मजबूती : बसपा का कैडर वोट बैंक और मुस्लिम मतदाताओं की खासी संख्या। आबिद रजा का समर्थन मिलना।
कमजोरी : भाजपा और सपा की मजबूत स्थिति, वोट बैंक में सेंधमारी का खतरा।
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कांग्रेस : ममता प्रजापति
मजबूती: पिछड़ी जाति की महिला प्रत्याशी होना। भाजपा, सपा और बसपा से मतदाताओं की नाराजगी।
कमजोरी : कांग्रेस का कमजोर संगठन, मतदाताओं पर कमजोर पकड़ और चुनाव प्रचार से बड़े नेताओं की दूरी।
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दातागंज
भाजपा : राजीव कुमार सिंह
मजबूती : भाजपा सरकार में कराए गए विकास कार्य। संगठन की मंडल से लेकर बूथ स्तर तक मजबूती।
कमजोरी : भितरघात का डर। टिकट कटने से नाराज नेताओं का चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखना।
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सपा- अर्जुन प्रताप सिंह
मजबूती : युवा प्रत्याशी, मौर्य-शाक्य मतदाताओं की क्षेत्र में भाजपा से नाराजगी। सपा का कोर वोट बैंक।
कमजोरी : पार्टी के स्थानीय नेताओं की टिकट कटने से नाराजगी। भितरघात का खतरा।
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बसपा : रचित गुप्ता
मजबूती: बसपा का कोर वोट बैंक, 2007 और 2012 में बसपा की बड़े अंतर से जीत। भाजपा और सपा में भितरघात।
कमजोरी : पार्टी के बड़े नेताओं का चुनाव प्रचार में न आना। 2017 के चुनाव में बसपा के वोट बैंक में बिखराव।
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कांग्रेस : आतिफ खां
मजबूती : मुस्लिम मतदाताओं से उम्मीद, किसान नेता के रूप में लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहना।
कमजोरी : कांग्रेस के आधार वोट बैंक का खिसकना, बूथ स्तर तक पार्टी की कमजोरी से प्रचार में पिछड़ना।
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बिसौली (सुरक्षित)
भाजपा : कुशाग्र सागर
मजबूती : पिछले विधानसभा चुनाव में बड़े अंतर से जीत। युवा प्रत्याशी होना।
कमजोरी : विकास कार्यों का मुद्दा, ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाताओं में बिखराव का डर और पिता का विवादों से नाता।
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सपा : आशुतोष मौर्य
मजबूती : किसानों और पिछड़ा वर्ग की भाजपा से नाराजगी, बसपा की कमजोर स्थिति और सपा की एकजुटता।
कमजोरी : भाजपा के मुकाबले सपा का प्रचार में पिछड़ना, विधायक रहते सपा सरकार में कम विकास कार्य।
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बसपा : जयपाल सिंह
मजबूती : दलित मतदाताओं की खासी संख्या, ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाताओं में बिखराव से लाभ की उम्मीद।
कमजोरी : बसपा के किसी बड़े नेता का चुनाव प्रचार में शामिल न होना। भाजपा और सपा की मजबूत स्थिति।
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कांग्रेस : प्रज्ञा यशोदा
मजबूती : भाजपा, सपा और बसपा से मतदाताओं की नाराजगी, लंबे समय तक सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहना।
कमजोरी : कांग्रेस का कमजोर संगठन और चुनाव प्रचार में किसी बड़े नेता की रैली न होना।
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बिल्सी
भाजपा : हरीश शाक्य
मजबूती : भाजपा का मजबूत संगठन, छात्र नेता के तौर पर पहचान। मौर्य-शाक्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण मतदाताओं की ज्यादा संख्या।
कमजोरी : सपा-महान दल गठबंधन से मौर्य-शाक्य मतदाताओं में बिखराव, बसपा से भी मौर्य प्रत्याशी।
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चंद्रप्रकाश मौर्य- महान दल सपा गठबंधन
मजबूती: सपा का कोर वोट बैंक, मौर्य-शाक्य मतदाताओं में बिखराव की उम्मीद, निवर्तमान विधायक से नाराजगी।
कमजोरी : बाहरी प्रत्याशी होना। क्षेत्र में प्रत्याशी के रूप में मतदाताओं पर कमजोर पकड़, स्थानीय सपा इकाई से ही दूरी।
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ममता शाक्य- बसपा
मजबूती- बसपा का कोर वोट बैंक, इकलौती महिला प्रत्याशी ओर जिपं सदस्य की पूर्व सदस्य के रूप में फायदा होना।
कमजोरी : बसपा के बड़े नेताओं की प्रचार से दूरी। बसपा सुप्रीमो के बिल्सी से विधायक बनने के बाद भी रोडवेज डिपो न बनना।
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अंकित चौहान- कांग्रेस
मजबूती : युवा प्रत्याशी, विधानसभा क्षेत्र में पकड़ और क्षत्रिय प्रत्याशी होना। भाजपा के वोट बैंक में बिखराव की उम्मीद।
कमजोरी : कांग्रेस के किसी बड़े नेता की सभा न होना। कांग्रेस के पास ठोस वोट बैंक और कमजोर पार्टी संगठन।
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सहसवान
डीके भारद्वाज- भाजपा
मजबूती : भाजपा के कई बड़े नेताओं की माहौल बनाने के लिए जनसभाएं, पार्टी संगठन की मजबूत स्थिति।
कमजोरी : सपा के पास मजबूत वोट बैंक होना। रापद प्रत्याशी के मैदान में आने से वोट बैंक का खिसकना।
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ब्रजेश यादव- सपा
मजबूती : यादव-मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता, लंबे समय से सीट पर सपा का कब्जा। पार्टी की मजबूत स्थिति।
कमजोरी : रापद के कारण यादव मतदाताओं में बिखराव की संभावना, बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी।
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हाजी मुर्सरत अली बिट्टन- बसपा
मजबूती : बसपा का कोर वोट बैंक और मुस्लिम प्रत्याशी होना। मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा सीट का होना।
कमजोरी : उपलब्धियां गिनाने के नाम पर बसपा शासनकाल और प्रचार से पार्टी के बड़े नेताओं की दूरी।
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राजवीर यादव- कांग्रेस
मजबूती : यादव वोट बैंक से उम्मीद, कांग्रेस का कैडर वोट और मतदाताओं की दूसरे दलों से नाराजगी।
कमजोरी : कांग्रेस के पास बूथ स्तर तक संगठन और असरदार नेताओं की कमी होना।
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कुणाल सिंह यादव-राष्ट्रीय परिवर्तन दल
मजबूती : पिता डीपी यादव की पहचान का सहारा, यादव व भाजपा के सवर्ण वोट बैंक से उम्मीद।
कमजोरी : नया चेहरा। दूसरे दलों के पास मजबूत प्रत्याशी होना। रापद के पास संगठन का अभाव।
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