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बदायूं वालों ने सबको अपनाया, यहां से जीतकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बने नेता
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रिंकू पांडेय
बदायूं। विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनावों तक बदायूं में कद्दावरों ने चुनाव लड़ा। मायावती और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। शरद यादव, स्वामी चिन्मयानंद, सलीम शेरवानी बदायूं से लोकसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री बने। बदायूं वालों ने सभी को खूब प्यार दिया पर जिले का अपेक्षित विकास नहीं हो सका।
1996 से 2019 तक बदायूं लोकसभा सीट पर सपा का कब्जा रहा। 1996 के विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती बिल्सी और मुलायम सिंह यादव सहसवान सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2007 में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहते गुन्नौर से विधानसभा चुनाव लड़े। उस समय गुन्नौर विधानसभा सीट बदायूं जिले का हिस्सा हुआ करती थी। बदायूं लोकसभा में आज भी गुन्नौर विधानसभा शामिल है।
बदायूं की सियासी जमीन ने कई बड़े नेता दिए। 1989 में जनता दल से शरद यादव ने बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उनको 225712 और कांग्रेस के रामनरेश यादव को 133626 वोट मिले। केंद्र में गठबंधन की सरकार बनी और शरद यादव को केंद्रीय कपड़ा मंत्री के पद से नवाजा गया। 1991 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला जनता दल के शरद यादव और भाजपा के स्वामी चिन्मयानंद के बीच हुआ। इस चुनाव में स्वामी चिन्मयानंद को 161957 और शरद यादव को 146378 वोट मिले। चिन्मयानंद बदायूं से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे तो उनको अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बनाया गया।
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बदायूं लोकसभा सीट पर सपा का लंबे समय तक कब्जा रहा। 1984 में राजीव गांधी के करीबी इलाहाबाद निवासी सलीम शेरवानी कांग्रेस के टिकट पर बदायूं से चुनाव लड़े। बड़े अंतर से चुनाव जीत कर शेरवानी लोकसभा पहुंचे।
इसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 में सलीम शेरवानी सपा से बदायूं से सांसद चुने गए। इन वर्षों में केंद्र में किसी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण दो बार मध्यावधि चुनाव भी हुए। 1996 से 1998 के बीच केंद्र की गठबंधन सरकार में मुलायम सिंह यादव रक्षामंत्री और सलीम शेरवानी केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री व स्वास्थ्य राज्यमंत्री रहे। 1996 में रक्षामंत्री रहते हुए ही मुलायम सिंह यादव ने सहसवान विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। बाद में उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया। 2009 और 2014 में बदायूं से सपा के धर्मेंद्र यादव सांसद चुने गए। 2012 से 2017 तक प्रदेश में सपा सरकार के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव का खासा रसूख रहा। 2019 में बदायूं लोकसभा सीट पर स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य ने जीत दर्ज की।
गौर करने वाली बात यह है कि बदायूं लोकसभा सीट पर मतदाताओं ने स्थानीय प्रत्याशियों को तवज्जो नहीं दी। 1980 में स्थानीय के रूप में सैदपुर निवासी असरार अहमद बदायूं सीट से लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद अब तक बदायूं से कोई स्थानीय नेता लोकसभा नहीं पहुंचा। संवाद
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बदायूं। विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनावों तक बदायूं में कद्दावरों ने चुनाव लड़ा। मायावती और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। शरद यादव, स्वामी चिन्मयानंद, सलीम शेरवानी बदायूं से लोकसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री बने। बदायूं वालों ने सभी को खूब प्यार दिया पर जिले का अपेक्षित विकास नहीं हो सका।
1996 से 2019 तक बदायूं लोकसभा सीट पर सपा का कब्जा रहा। 1996 के विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती बिल्सी और मुलायम सिंह यादव सहसवान सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2007 में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहते गुन्नौर से विधानसभा चुनाव लड़े। उस समय गुन्नौर विधानसभा सीट बदायूं जिले का हिस्सा हुआ करती थी। बदायूं लोकसभा में आज भी गुन्नौर विधानसभा शामिल है।
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बदायूं की सियासी जमीन ने कई बड़े नेता दिए। 1989 में जनता दल से शरद यादव ने बदायूं लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उनको 225712 और कांग्रेस के रामनरेश यादव को 133626 वोट मिले। केंद्र में गठबंधन की सरकार बनी और शरद यादव को केंद्रीय कपड़ा मंत्री के पद से नवाजा गया। 1991 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला जनता दल के शरद यादव और भाजपा के स्वामी चिन्मयानंद के बीच हुआ। इस चुनाव में स्वामी चिन्मयानंद को 161957 और शरद यादव को 146378 वोट मिले। चिन्मयानंद बदायूं से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे तो उनको अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बनाया गया।
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बदायूं लोकसभा सीट पर सपा का लंबे समय तक कब्जा रहा। 1984 में राजीव गांधी के करीबी इलाहाबाद निवासी सलीम शेरवानी कांग्रेस के टिकट पर बदायूं से चुनाव लड़े। बड़े अंतर से चुनाव जीत कर शेरवानी लोकसभा पहुंचे।
इसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 में सलीम शेरवानी सपा से बदायूं से सांसद चुने गए। इन वर्षों में केंद्र में किसी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण दो बार मध्यावधि चुनाव भी हुए। 1996 से 1998 के बीच केंद्र की गठबंधन सरकार में मुलायम सिंह यादव रक्षामंत्री और सलीम शेरवानी केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री व स्वास्थ्य राज्यमंत्री रहे। 1996 में रक्षामंत्री रहते हुए ही मुलायम सिंह यादव ने सहसवान विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। बाद में उन्होंने यहां से इस्तीफा दे दिया। 2009 और 2014 में बदायूं से सपा के धर्मेंद्र यादव सांसद चुने गए। 2012 से 2017 तक प्रदेश में सपा सरकार के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव का खासा रसूख रहा। 2019 में बदायूं लोकसभा सीट पर स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य ने जीत दर्ज की।
गौर करने वाली बात यह है कि बदायूं लोकसभा सीट पर मतदाताओं ने स्थानीय प्रत्याशियों को तवज्जो नहीं दी। 1980 में स्थानीय के रूप में सैदपुर निवासी असरार अहमद बदायूं सीट से लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद अब तक बदायूं से कोई स्थानीय नेता लोकसभा नहीं पहुंचा। संवाद