{"_id":"58287eac4f1c1b8553b3ca39","slug":"peoples-in-trouble-note-exchange","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोट बदलने की आस में उड़ी भूख-प्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोट बदलने की आस में उड़ी भूख-प्यास
ब्यूरो/बदायूं
Updated Sun, 13 Nov 2016 11:00 PM IST
विज्ञापन
नोट बदलने की आस में उड़ी भूख-प्यास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़े नोट बदलने की चाह में अब लोगों को भूख-प्यास तक की सुध नहीं है। हालांकि रविवार को चौथा दिन था, लेकिन बैंकों में भीड़ और दिनों से ज्यादा थी। एसबीआई में लगी लाइन तो इतनी लंबी हो गई कि उसको नगर पालिका परिषद की ओर मोड़ना पड़ा। बैंक खुलने से पहले ही महिला-पुरुषों की लंबी लाइन लगनी शुरू हुई, जो देर शाम तक जाकर सिमटती नजर आई। लोग नोट बदलने के लिए इतने अधीर थे कि अगर कोई व्यक्ति बैंक में चेक डालने और फार्म लेने भी घुसता तो वह उससे भिड़ जाते थे। शाम तक बैंकों के बाहर ये नजारे देखने को मिलते रहे। शाम को बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में कैश खत्म होने पर लोगों ने हंगामा काटा। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभालने को लाठियां फटकारीं। कई बैंकों ने एटीएम सेवा शुरू कर दी, लेकिन वह चंद घंटे में ही बंद भी हो गई, क्योंकि उनमें भरा कैश खत्म हो गया। वहीं, दो हजार रुपये के नए नोट जारी होने से लोगों को नया नोट पाने की हसरत पूरी हो गई।
जिले में विभिन्न बैंकों की संचालित हो रही 188 बैंक शाखाओं में से चंद बैंक शाखाओं को छोड़ दें तो अधिकांश में रुपये एक्सचेंज नहीं हुए और न ही निकासी की गई। केवल रुपये जमा किए। वहीं, एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा की बैंक शाखाओं में रुपये एक्सचेंज किए गए, लेकिन इनमें दोपहर के बाद से रुपये खत्म हो गए। रुपये एक्सचेंज करने वालों को घंटों लाइन में लगने के बाद बताया गया कि कैश खत्म होने की वजह से अब रुपये एक्सचेंज नहीं किए जाएंगे। इससे आक्रोशित लोगों ने वहां पर हंगामा करना शुरू कर दिया। अधिकांश बैंक शाखाओं में दोपहर से लेकर शाम तक हंगामा और प्रदर्शन हो गया।
एक्सचेंज करने की अपेक्षा रुपये जमा करने वालों की संख्या रविवार को ज्यादा रही। छोटे लोगों के साथ ही बड़े व्यापारियों, पेट्रोल पंप संचालकों, मेडिकल स्टोर संचालक और डॉक्टरों ने भी अपने रुपये बैंकों में जमा कराए। इससे बैंकों में डिपॉजिट बढ़ गया। रोजाना के खर्च के लिए रुपये न होने पर लाइन में लगे लोगों को इससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में जब मामला बढ़ा तो हंगामा और प्रदर्शन हो गया, जिसे काबू करना पुलिस के लिए मुश्किल होता जा रहा है। आरबीआई से पर्याप्त मात्रा में रुपये न आने पर बैंकों के बाहर हंगामा और प्रदर्शन की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
जिले में संचालित बैंकों की शाखाओं में जिनके पास सौ, पचास, बीस, दस रुपये के नोट नहीं रहे। रुपये खत्म होने पर ही बैंक कर्मचारी मना करते हैं। ऐसे में लोगों को बैंक कर्मियों की मजबूरी को समझते हुए धैर्य से काम करना चाहिए, ना कि हंगामा या प्रदर्शन करके परेशान करना चाहिए।
-अनुराग रमन, लीड बैंक मैनेजर, पीएनबी
विज्ञापन
जिले में विभिन्न बैंकों की संचालित हो रही 188 बैंक शाखाओं में से चंद बैंक शाखाओं को छोड़ दें तो अधिकांश में रुपये एक्सचेंज नहीं हुए और न ही निकासी की गई। केवल रुपये जमा किए। वहीं, एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा की बैंक शाखाओं में रुपये एक्सचेंज किए गए, लेकिन इनमें दोपहर के बाद से रुपये खत्म हो गए। रुपये एक्सचेंज करने वालों को घंटों लाइन में लगने के बाद बताया गया कि कैश खत्म होने की वजह से अब रुपये एक्सचेंज नहीं किए जाएंगे। इससे आक्रोशित लोगों ने वहां पर हंगामा करना शुरू कर दिया। अधिकांश बैंक शाखाओं में दोपहर से लेकर शाम तक हंगामा और प्रदर्शन हो गया।
विज्ञापन
एक्सचेंज करने की अपेक्षा रुपये जमा करने वालों की संख्या रविवार को ज्यादा रही। छोटे लोगों के साथ ही बड़े व्यापारियों, पेट्रोल पंप संचालकों, मेडिकल स्टोर संचालक और डॉक्टरों ने भी अपने रुपये बैंकों में जमा कराए। इससे बैंकों में डिपॉजिट बढ़ गया। रोजाना के खर्च के लिए रुपये न होने पर लाइन में लगे लोगों को इससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में जब मामला बढ़ा तो हंगामा और प्रदर्शन हो गया, जिसे काबू करना पुलिस के लिए मुश्किल होता जा रहा है। आरबीआई से पर्याप्त मात्रा में रुपये न आने पर बैंकों के बाहर हंगामा और प्रदर्शन की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
जिले में संचालित बैंकों की शाखाओं में जिनके पास सौ, पचास, बीस, दस रुपये के नोट नहीं रहे। रुपये खत्म होने पर ही बैंक कर्मचारी मना करते हैं। ऐसे में लोगों को बैंक कर्मियों की मजबूरी को समझते हुए धैर्य से काम करना चाहिए, ना कि हंगामा या प्रदर्शन करके परेशान करना चाहिए।
-अनुराग रमन, लीड बैंक मैनेजर, पीएनबी