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...और टूट रहा सब्र का बांध

Mon, 06 Apr 2015 07:59 PM IST
badaun
badaun Updated Mon, 06 Apr 2015 07:59 PM IST
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... Patience is breaking dam

किसी को बेटी के हाथ पीले करने थे...किसी को साहूकार का पैसा लौटाना था...तो कोई अपनेे बीमार भाई का ऑपरेशन कराने वाला था। ऐसी जाने कितनी समस्याओं का हल थी रबी की फसल। फसल नष्ट क्या हुई अन्नदाता पर आफत टूट पड़ी। अब तो आंसुओं के सब्र का बांध भी टूट गया। शासन आकलन में उलझा है। अभी तक आकलन उनके दर्द पर मरहम नहीं लगा सका है। ‘मुंह देखी’ राहत ने किसानों की पीर को और बढ़ा दिया है।

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जिले में रबी फसलों का रकबा 2,93,125 हेक्टेयर है। शुरू मार्च में खराब मौसम के कारण 17,590 हेक्टेयर रकबा की फसल ऐसी थी जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ। इसमें 16,000 हेक्टेयर से अधिक गेहूं की फसल ही है। बाकी में सरसों, मसूर और मटर की फसल है। गेेहूं प्रति हेक्टेयर 35 से 40 क्विंटल पैदावार होती है। प्रभावित हेक्टेयर में 17 से 20 क्विंटल तक की पैदावार हुई।
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मुआवजे के लिए आए 16.40 करोड़
इसके लिए शासन से 16.40 करोड़ का मुआवजा आया है। जो बंटना शुरू हो चुका है। पहले मुआवजा की राशि सिंचित खेतों को नौ हजार रुपये और असिंचित को साढ़े चार हजार रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जो अब शासन ने दोगुनी कर दी है। अब तक मुआवजा 50 प्रतिशत से अधिक के नुकसान पर दिया गया था। अब नए आदेश के तहत मुआवजा के लिए 25 से 50 प्रतिशत के बीच के नुकसान का भी सर्वे शुरू करा दिया गया है, जिसके लिए अभी मुआवजा निर्धारित नहीं हो सका है। करीब दो तिहाई किसानों को मुआवजा बांटा जा चुका है। बाकी सर्वे भी चल रहा है।
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जिले में 1,414 किसानों ने कराया बीमा
जिले में केवल 1,414 किसानों ने ही फसल बीमा कराया था। अब सर्वे होगा, रिपोर्ट आने के बाद नुकसान की भरपाई के लिए किसान आवेदन करेगा, तब उसको भुगतान मिलेगा। ये लंबा प्रोसेस है।

लेखपालों की ‘कृपा’ पर टिकी राहत
राहत की जमीनी स्थिति यह है कि सब कुछ लेखपालों की कृपा पर ही टिकी हुई है। पिछले दिनों उघैती गर्वी के किसानों ने लेखपाल द्वारा घर बैठे सर्वे कर वाजिब हकदारों को छोड़ दिए जाने पर प्रदर्शन किया था। कादरचौक इलाके के किसानों ने लेखपाल पर ठीक से सर्वे न करने का आरोप लगाया था।


जिले में रबी फसल का रकबा
कुल रकबा- 3.29 लाख हेक्टेयर
गेहूं का रकबा- 2.40 लाख हेक्टेयर
आलू का रकबा- 24000 हेक्टेयर
मसूर का रकबा- 5600 हेक्टेयर
लाही का रकबा- 12000 हेक्टेयर,
सरसों का रकबा- 38000 हेक्टेयर
मटर का रकबा- 3000 हेक्टेयर
चना का रकबा - 80 हेक्टेयर
बाकी का रकबा- सौंफ, जौ, दलहन आदि

0 सर्वाधिक गेहूं की फसल में हुआ है नुकसान, 60 प्रतिशत से अधिक का सामान्य आकलन।
0 सरकारी आंकड़ों में केवल 20,923 हेक्टयर फसलों का आकलन हुआ है।
0 33,522 किसानों को 8,90,30,783 रुपये बांटे जा चुके हैं।

मार्च के प्रथम सप्ताह की बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। किसानों का ख्याल कर सरकार ने मुआवजा भी दोगुना कर दिया गया है। सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं कि हर त्रस्त किसान को मुआवजा मिले। 25 से 50 प्रतिशत नुकसान का भी सर्वे जल्दी पूरा होगा। इसके लिए भी मुआवजा राशि मिलेगी। पिछले सर्वे पर किसानों को मुआवजा लगातार दिया जा रहा है। किसान इस संकट की घड़ी में थोड़ा सब्र करें।
- आरपी यादव, राहत प्रभारी/एडीएम वित्त एवं राजस्व

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