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राजकीय मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठा पैरा मेडिकल स्टाफ, दो घंटे ओपीडी ठप
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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में तैनात पैरा मेडिकल स्टाफ का मानदेय पहले की अपेक्षा कम होने से नाराजगी है। सोमवार को स्टाफ हड़ताल पर चले गए। करीब दो घंटे बाद प्राचार्य ने मौके पर जाकर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को आश्वासन दिया। इसके बाद हड़ताल खत्म हो गई। इधर, ओपीडी में पर्चा बनवाने व अन्य तरह की समस्याओं से मरीजों को परेशान होना पड़ा।
धरने पर बैठी राजकीय मेडिकल कॉलेज में काम कर रहे संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रेखा ने कहा कि जिला समेत पूरे प्रदेश में अब कोविड-19 का संक्रमण बेहद कम हो गया है। संक्रमण के तेज होने के दौरान पैरामेडिकल कर्मचारियों ने काफी मेहनत की पर अब मानदेय पहले की अपेक्षा कम कर दिया गया है। इससे कर्मचारी आहत हैं। उन्होंने बताया कि पैरा मेडिकल स्टाफ ने मानदेय को पहले जैसा रखने की मांग को लेकर कॉलेज प्राचार्य से लेकर डीएम तक से मांग की। सुनवाई न होने पर सोमवार सुबह आठ बजे से पैरा मेडिकल स्टाफ ओपीडी गेट पर हड़ताल करके बैठ गया। इस दौरान ओपीडी पूरी तरह से ठप रही। करीब दो घंटे बाद कॉलेज प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता मौके पर पहुंचे। वहां पर पहुंचकर उन्होंने स्टाफ की मांगों को सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में शासन से वार्ता करेंगे। प्रयास करेंगे कि कर्मचारियों को पहले जितना मानदेय मिलता रहे। संघ के महासचिव वसीम अहमद गद्दी, जिला उपाध्यक्ष मयंक यादव ने भी नीतियों का विरोध किया। धरना और हड़ताल में करीब डेढ़ सौ कर्मचारी मौजूद रहे।
दो घंटे नहीं बने पर्चे, खाली बैठे डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज का पैरा मेडिकल स्टाफ हड़ताल पर जाने के बाद में ओपीडी ठप हो गई। स्टाफ द्वारा पर्चा काउंटर पर न बैठने की वजह से नए पर्चे नहीं बन सके। इसकी वजह से डॉक्टर यूं ही खाली बैठे रहे। हालांकि जो पर्चे पहले से बने हुए थे, उन्हीं को डॉक्टर देख सके लेकिन मरीजों को दवाएं नहीं मिल सकीं।
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बिचौलियों के रास्ते को किया जाए बंद
पैरामेडिकल स्टाफ ने कहा कि सरकार के निर्देश है किसी भी स्तर पर सरकारी योजना के तहत लाभार्थी को सीधा लाभ दिया जाए। बिचौलियों के रास्ते को बंद किया जाए पर सरकार आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया में कर्मियों को ठेकेदार के माध्यम से मानदेय दे रही है। यह व्यवस्था सही नहीं है, इसे बंद किया जाए।
इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात रहा स्टाफ
कॉलेज में तैनात पैरा मेडिकल स्टाफ ने अपनी मांगों के पूरा नहीं होने से चलते धरना दिया, लेकिन इस दौरान उन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि इमरजेंसी के दौरान किसी भी मरीज को कोई परेशानी न हो। इसको ध्यान में रखते हुए यहां स्टाफ को तैनात रखा।
कॉलेज में तैनात स्टाफ
- लिपिक- छह
- स्टाफ नर्स-110
- चतुर्थ श्रेणी-75
- स्वीपर-28
पैरामेडिकल स्टाफ की ओर से धरने के बारे में पता चला था। उनकी मांगों को सुना गया। उनकी मांग के बारे में उच्च अधिकारियों को बताया जाएगा ताकि कर्मचारियों की समस्याओं को निस्तारण हो सके। - डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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धरने पर बैठी राजकीय मेडिकल कॉलेज में काम कर रहे संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रेखा ने कहा कि जिला समेत पूरे प्रदेश में अब कोविड-19 का संक्रमण बेहद कम हो गया है। संक्रमण के तेज होने के दौरान पैरामेडिकल कर्मचारियों ने काफी मेहनत की पर अब मानदेय पहले की अपेक्षा कम कर दिया गया है। इससे कर्मचारी आहत हैं। उन्होंने बताया कि पैरा मेडिकल स्टाफ ने मानदेय को पहले जैसा रखने की मांग को लेकर कॉलेज प्राचार्य से लेकर डीएम तक से मांग की। सुनवाई न होने पर सोमवार सुबह आठ बजे से पैरा मेडिकल स्टाफ ओपीडी गेट पर हड़ताल करके बैठ गया। इस दौरान ओपीडी पूरी तरह से ठप रही। करीब दो घंटे बाद कॉलेज प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता मौके पर पहुंचे। वहां पर पहुंचकर उन्होंने स्टाफ की मांगों को सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में शासन से वार्ता करेंगे। प्रयास करेंगे कि कर्मचारियों को पहले जितना मानदेय मिलता रहे। संघ के महासचिव वसीम अहमद गद्दी, जिला उपाध्यक्ष मयंक यादव ने भी नीतियों का विरोध किया। धरना और हड़ताल में करीब डेढ़ सौ कर्मचारी मौजूद रहे।
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दो घंटे नहीं बने पर्चे, खाली बैठे डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज का पैरा मेडिकल स्टाफ हड़ताल पर जाने के बाद में ओपीडी ठप हो गई। स्टाफ द्वारा पर्चा काउंटर पर न बैठने की वजह से नए पर्चे नहीं बन सके। इसकी वजह से डॉक्टर यूं ही खाली बैठे रहे। हालांकि जो पर्चे पहले से बने हुए थे, उन्हीं को डॉक्टर देख सके लेकिन मरीजों को दवाएं नहीं मिल सकीं।
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बिचौलियों के रास्ते को किया जाए बंद
पैरामेडिकल स्टाफ ने कहा कि सरकार के निर्देश है किसी भी स्तर पर सरकारी योजना के तहत लाभार्थी को सीधा लाभ दिया जाए। बिचौलियों के रास्ते को बंद किया जाए पर सरकार आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया में कर्मियों को ठेकेदार के माध्यम से मानदेय दे रही है। यह व्यवस्था सही नहीं है, इसे बंद किया जाए।
इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात रहा स्टाफ
कॉलेज में तैनात पैरा मेडिकल स्टाफ ने अपनी मांगों के पूरा नहीं होने से चलते धरना दिया, लेकिन इस दौरान उन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि इमरजेंसी के दौरान किसी भी मरीज को कोई परेशानी न हो। इसको ध्यान में रखते हुए यहां स्टाफ को तैनात रखा।
कॉलेज में तैनात स्टाफ
- लिपिक- छह
- स्टाफ नर्स-110
- चतुर्थ श्रेणी-75
- स्वीपर-28
पैरामेडिकल स्टाफ की ओर से धरने के बारे में पता चला था। उनकी मांगों को सुना गया। उनकी मांग के बारे में उच्च अधिकारियों को बताया जाएगा ताकि कर्मचारियों की समस्याओं को निस्तारण हो सके। - डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज