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जल निगम को जमीन नहीं दे सकी पालिका, नहीं बन सका सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

Wed, 02 Dec 2020 02:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 02 Dec 2020 02:00 AM IST
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palika not acquired land for sewage treatment  plant
बदायूं। शहरवासियों को सीवर लाइन के धरातल पर आने का इंतजार है। लेकिन इसमें नगर पालिका अड़ंगा बनी हई है। आज तक नगर पालिका सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जल निगम को जमीन मुहैया नहीं करा पाई, जिस वजह से आज भी शहर इससे वंचित है। केवल यही नहीं पालिका द्वारा भूमि उपलब्ध न कराए जाने के कारण शासन से आई पहली किस्त तक वापस लौट गई। 84 करोड़ से यह काम कराया जाना था।
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तकरीबन एक दशक पहले इसकी तैयारी शुरू की गई थी। नगर पालिका परिषद बोर्ड में प्रस्ताव पास होकर कार्यदायी संस्था जल निगम को सौंपा गया था। प्रस्ताव में कुछ खामियां मिलने पर जल निगम ने इसका सुधार कराया। सुधार होने के बाद जल निगम ने नक्शा तैयार कर वर्ष 2006-07 में इसका स्टीमेट तैयार कर लिया। उसने 84 करोड़ 27 लाख 24 हजार रुपये का खर्च बताया। शासन ने इसको मंजूर करते हुए करीब नौ करोड़ रुपये की पहली किस्त कार्यदायी संस्था को दे दी। रुपये मिलने के बाद जल निगम ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए नगर पालिका प्रशासन से करीब 32 बीघे जमीन मुहैया कराने की मांग की। जमीन के लिए 18 करोड़ 67 लाख 84 हजार रुपया भी देना भी तय किया गया। लेकिन पालिका प्रशासन ने जमीन मुहैया नहीं करा पाया। कई प्रयासों के बाद भी जब जमीन नहीं मिल पाई तो शासन से आई रकम वापस भेज दी गई।
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दो जोन में बनना है ट्रीटमेंट प्लांट
-शहर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनना था। शहर के अंदर से होकर रेलवे लाइन जा रही है। ऐसे में इस प्लांट के पाइप लाइन रेलवे लाइन को पार नहीं कर सकते थे। इसकी वजह से रेलवे लाइन की दूसरी ओर से दूसरा सीवरेज प्लांट बनाया जाना था। ऐसे में जल निगम को पूरे शहर में सीवरेज प्लांट लगाने के लिए दो जगह चाहिए थी, लेकिन तमाम पत्राचार के बावजूद भी पालिका जलनिगम को जगह नहीं उपलब्ध करा पाई।
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सीवर लाइन होती तो ये होता फायदा
सीवर लाइन पड़ने से जहां शहर में गंदगी कम हो जाती, तो वहीं जलभराव की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिल जाती। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से किसानों की फसलों को भी काफी फायदा होता। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी शुद्ध होने के बाद उससे खेतों की सिंचाई हो सकती है। इस योजना को धरातल पर देखने के लिए किसान भी बेचैन हैं।
क्या बोले लोग
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- काफी कोशिशों के बाद भी शहर में आज तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बना है। अगर ये बन जाता, तो शहर के अंदर से जलभराव की समस्या हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जाती। लोग आज भी जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं।
-प्रवीण सचदेवा
फोटो-9
सत्ता परिवर्तन के बाद में सभी को उम्मीद जागी थी कि अब बदायूं जनपद की तस्वीर और तकदीर बदल जाएगी। क्योंकि केंद्र से लेकर पालिकाध्यक्ष तक भाजपा की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बदायूं शहर के हालात आज भी बदतर हैं।
-सुरजीत रैना
आंकड़े पर नजर
-शहर की आबादी - 369,221 (वर्ष 2011 के अनुसार)
-पुरुष-188,475
-महिला-180,746
-सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को स्वीकृत राशि-84 करोड़ 27 लाख 24 लाख
-जमीन की जरूरत-32 बीघा
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नगर पालिका के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था कि वह जमीन को उपलब्ध करा दे। काफी प्रयासों के बावजूद भी नगर पालिका की तरफ से भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में ये योजना शुरू नहीं हो सकी।

रामहेत सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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-जितनी जमीन की मांग की जा रही है, उतनी जमीन पालिका के पास खाली नहीं है। ऐसे में उनको नहीं दी जा सकी है। सीमा विस्तार होने के बाद जमीन बढ़ जाएगी। उसके बाद में देखते हैं कि उस जमीन पर क्या-क्या बनाया जा सकता है।
-दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
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